Election 2026 Astrology: बंगाल में ममता, असम में हिमंत, केरल में UDF, यहां देखें कौन जीत रहा?

Election Result 2026 Astrology: पूर्व के परिणाम के समय की गोचरीय व नक्षत्र स्थिति की तुलना के आधार पर ही ज्योतिष में आगामी परिणाम की भविष्यवाणी करने की संभावना तलाशी जाती है ।

Devendra Bhatt (Guru ji)
Published on: 10 April 2026 5:43 PM IST (Updated on: 10 April 2026 6:37 PM IST)
Election Result 2026 Astrology
X

Election Result 2026 Astrology

Election 2026 Astrology: ग्रह-नक्षत्रों की चाल और राजनेताओं की कुंडली के विश्लेषण से जानिए 2026 के चुनावी महासंग्राम का सटीक फल। असम से बंगाल तक, क्या बदलेगी सत्ता या फिर लौटेगा पुराना दौर? पढ़िए एक निष्पक्ष ज्योतिषीय रिपोर्ट।

15 मार्च, 2026 से लेकर 4 मई, 2026 तक भारत की राजनीति बेहद महत्वपूर्ण है, कारण पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव हैं। 15 मार्च की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में चुनाव आयोग ने पांच राज्यों की वोटिंग एवं मतगणना की तिथि का ऐलान करते हुए इन राज्यों में अधिसूचना लागू कर दी थी। राजनीति में पार्टियों का लक्ष्य होता है येन-केन प्रकारेण सत्ता प्राप्त करना। ऐसे में एक कुशल ज्योतिषी का यह उद्देश्य होना चाहिए कि बिना किसी पक्षपात के ग्रहों के आधार पर स्पष्ट ज्योतिष की विद्या जो कहती हो, वही फलादेश किया जाए।

मतदान के लिए असम, केरल, पांडिचेरी में 9 अप्रैल 2026 की तिथि निर्धारित की गई थी। दक्षिण के तमिलनाडु में 23 अप्रैल, 2026 को एक चरण में ही मतदान होंगे। राजनीति में पश्चिम बंगाल क्रिटिकल माना जाता है। अतः इसके लिए मतदान की तिथि 23 एवं 29 अप्रैल,2026 को निर्धारित की गई। अर्थात 29 अप्रैल को सायं 6 बजे तक इन राज्यों से जुड़े हुए सारे उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य मत पेटियों में बंद हो जाएंगे। 4 मई, 2026 की मतगणना में यह निश्चित होगा कि किस पार्टी के हिस्से में क्या आया।

फलादेश मे हम क्रमशः कुछ बिंदुओं को लेते हैं जिन पर ज्योतिष की राजनीतिक भविष्यवाणी निर्धारित करती हैं। सर्वप्रथम जिस तिथि को अधिसूचना जारी की जाती है। दूसरा मतदान की तिथि। तीसरा जिस राज्य का चुनाव प्रस्तावित है, उस राज्य के ऊपर ग्रहों की दृष्टि अक्षांश और देशांतर सहित तथा उन राज्यों में लीडिंग पार्टियों या चर्चित राजनेताओं की व्यक्तिगत कुंडली का विशेष महत्व होता है। पूर्व के परिणाम के समय की गोचरीय व नक्षत्र स्थिति की तुलना के आधार पर ही ज्योतिष में आगामी परिणाम की भविष्यवाणी करने की संभावना तलाशी जाती है । अब प्रत्येक राज्य के विषय में हम संक्षेप में विचार करते हुए अपने विचार प्रस्तुत करते हुए परिणाम के नजदीक पहुंचने का प्रयास करेंगे ।

असम राज्य (Assam Election Result 2026)

सर्वप्रथम असम राज्य की बात करेंगे। असम में हिमंत बिस्वा सरमा बतौर मुख्यमंत्री पदासीन हैं। वह भारतीय जनता पार्टी के मुख्य चेहरा हैं। अभी सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और उसकी सहयोगी दोनों के पास कुल 79 सीट हैं। जबकि विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 126 है। काँग्रेस के पास 22 सीटें हैं। बीजेपी 89 सीटों पर चुनाव लड़ी है। शेष पर इसके सहयोगी अन्य दल चुनाव लड़े हैं। ज्योतिष लिहाज से हेमंत बिस्वा सरमा की कुंडली तुला राशि एवं वृष लग्न की है। सूर्य बुध की युति बुधआदित्य योग उनके नवम स्थान पर है, जिस पर उच्च के गुरु की पूर्ण दृष्टि है। लग्नेश और राशि का मालिक शुक्र दशम स्थान पर विराजमान है।


अतः किस्मत और भाग्य के बली हेमंत बिस्वा सरमा सबसे प्रबल दावेदार हैं। काँग्रेस की तरफ से हेमंत बिस्वा सरमा के प्रतिपक्ष में तरुण गोगोई के पुत्र गौरव गोगोई को देखा जा रहा है। उनकी कुंडली पर विचार करें तो उनकी कुंभ राशि वृश्चिक लग्न की कुंडली है, जिसमें चंद्रमा चौथे स्थान पर और दसवें स्थान पर स्वग्रही सूर्य है। मंगल और गुरु की युति द्वादश में है, राहु आठवें और केतु दूसरे स्थान पर है। उनकी वर्तमान में बुद्ध की महादशा चल रही है, जो उतरने वाली है और केतु की महादशा शुरू होगी। अतः असम में जो ग्रह नक्षत्र की स्थिति है, उस हिसाब से भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार पुन: रिपीट होगी । सीटों की संख्या बीजेपी की लगभग उतनी ही होगी जिसमें प्लस माइनस 5 माना जा सकता है। अर्थात असम में हेमंत बिस्वा सरमा की सरकार पुनः सत्ता में वापस आएगी!

पश्चिम बंगाल (West Bengal Election Result 2026)

इन पांच राज्यों के चुनाव में जो चुनाव सबसे कठिन माना जा रहा है, वह पश्चिम बंगाल का इलेक्शन है। जहां दो चरणों में मतदान संपन्न होंगे । पश्चिम बंगाल में कुल सीटों की संख्या 294 है, जिसमें सत्तारूढ तृणमूल कांग्रेस 219 एवं अपने सहयोगी दलों को मिलाकर कुल 221 सीटों पर काबिज होकर अपनी सरकार बनाए हुए है। पिछले चुनाव के नतीजे में बीजेपी 64 सीटों पर थी । इस बार के नतीजे को पुनः नक्षत्र और ग्रहों के आधार पर विश्लेषण करते हुए परिणाम के निकट पहुंचने का प्रयास करते हैं। सर्वप्रथम ममता बनर्जी की कुंडली जो वृष राशि की कुंडली है, इसमें मंगल कुंभ का शनि सप्तम स्थान में उच्च का होकर बैठा है। गुरु भी उच्च का और वर्गोंतम होकर सुख भाव में बैठा हुआ है। राहु, सूर्य और बुद्ध की युति धनु राशि में है, कुंभ राशि में मंगल विराजमान है। यह स्थिति ममता बनर्जी को स्पष्ट राज्य सत्ता सुख का संकेत देती रही है।


यही कारण रहा है की 40 वर्षों के कम्युनिस्ट शासन के विरुद्ध आंदोलन खड़ा करके ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में अपनी एक जगह बना रखी है । उनके प्रतिपक्ष में बीजेपी की तरफ से सुभेंदु अधिकारी हैं, जिनकी कुंडली मिथुन राशि की है, जहां चंद्रमा और वर्गोंतम की स्थिति में है । शनि नीच का होकर दूसरे स्थान पर है। राहु और केतु क्रमशः 12 वें और छठे स्थान पर है तथा शुक्र और मंगल की युति आठवें स्थान पर है जो तुला राशि का है । शुक्र मंगल की विपरीत राजयोगकारी स्थिति सुवेंदु अधिकारी के लिए अच्छी और अनुकूल परिस्थितियां पैदा करती रही है। राजनीति में कम समय में ही उन्होंने अच्छा स्थान प्राप्त किया है । अब दोनों की कुंडली तथा भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस 6 अप्रैल, 1980 से विचार करने पर ज्ञात होता है कि इस वर्ष भारतीय जनता पार्टी की स्थिति में नतीजा पिछले परिणाम की अपेक्षा 20 फीसद तक बढ़ने की गुंजाइश है। बंगाल की राजनीति में बीजेपी अपनी भूमि तलाश कर पाएगी। परंतु ममता की कुंडली में फिलहाल उनके सत्ता से हटने का कोई योग नहीं दिख रहा है। अतः यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि इस चुनाव में भी 4 मई को आने वाले परिणाम ममता बनर्जी को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का अवसर पश्चिम बंगाल में पुनः देने जा रहे हैं।

केरल राज्य (Keral Election Result 2026)

भारत के सुदूर दक्षिण दिशा में केरल में 9 अप्रैल को मतदान संपन्न हुए तथा मतगणना का परिणाम 4 मई, 2026 को आएगा। मुख्य रूप से यहां दो गठबंधन सक्रिय हैं। एक एलडीएफ है और दूसरा यूडीएफ । 140 सदस्यीय इस असेंबली में सीपीआई(एम ) 61 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल है। सीपीआई 16 सीटें, केरल कांग्रेस (एम) 15 सीटों के साथ इसकी सहयोगी हैं। वर्तमान में पिनाराई विजयन यहां मुख्यमंत्री पद पर आसीन हैं। इस राज्य में जो चुनाव के परिणाम हैं, इसमें परिवर्तन की अधिक संभावना नहीं है।


कांग्रेस पिछले विधानसभा में 21 सीटे प्राप्त कर पाई थी व इसके विपक्ष के नेता की हैसियत वी• डी• सथासीन हैं। उनकी कुण्डली मे सूर्य की स्थिति जन्म नक्षत्र को देखते हुए कुछ बेहतर परिणाम की भविष्यवाणी की जा सकती हैं। पिछले चुनाव परिणाम से एक तिहाई तक की बढ़ोतरी संभव है। अर्थात कांग्रेस लगभग 30 सीटे तक प्राप्त कर सकती है। वी• डी• सथासीन का भविष्य उज्जवल है। परन्तु इस बार के कुल चुनाव के नतीजे यहां रिपीट होंगे। पिनाराई विजयन पुनः मुख्यमंत्री पद पर आसीन होंगे।

तमिलनाडु राज्य (Tamil Nadu Election Result 2026)

तमिलनाडु राज्य में 23 अप्रैल , 2026 को मतदान संपन्न होंगे। मतगणना 4 मई, 2026 को होगी। फिलहाल वहां के राजनीतिक समीकरण में गठबंधन की सरकार है। जिस गठबंधन में कुल 158 सीट है। तमिलनाडु विधानसभा में सीटों की संख्या 243 है। डीएमके 133 विधायक, इंडियन नेशनल कांग्रेस के 17 विधायक के साथ गठबंधन की सरकार है। जिसमें डीएमके के एमके स्टालिन बतौर मुख्यमंत्री पदासीन हैं। अपोजिशन में एआईडीएमके गठबंधन के साथ चुनाव लड़ रही है। जहां उनके सीटों की संख्या लगभग 60 है। भारतीय जनता पार्टी की 4 और इस गठबंधन की कुल 67 सीटे हैं। डीएमके के ईके पलानीस्वामी विपक्ष के नेता हैं। इस बार तमिलनाडु का चुनाव परिणाम रोचक होने की संभावना है। स्टालिन की कुंडली तथा विपक्ष के नेता ईके पलानीस्वामी की कुंडली का विश्लेषण करने पर दिखता है कि स्टालिन सिंह राशि की कुंडली के हैं तथा सूर्य व शनि उच्च के और आमने-सामने की स्थिति में हैं। परंतु वर्तमान की गोचरीय दशाएं उन्हें पिछली बार की अपेक्षा कम सपोर्ट कर रही हैं।

उधर ईके पलानीस्वामी भी सिंह राशि व वृष लग्न के जो, अपने आप में बेहद मजबूत हैं। सूर्य दशम में उस पर चंद्रमा की पूर्ण दृष्टि है। शनि उच्च का होकर के छठे भाव में बैठा हुआ है। जो कर्मेश और भाग्येश दोनों का स्वामी है। वर्तमान में शनि की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा भी चल रही है। ऐसी स्थिति में स्टालिन की नेतृत्व वाली डीएमके की सरकार की पिछली बार की सीटों की संख्या 133 थी। जिसमें 30 प्रतिशत सीट कम होते हुए दिख रही है। जबकि उनकी सहयोगी दलों में कांग्रेस लगभग उतनी ही सीटे प्राप्त कर पायेगी जितनी पहले थी। दूसरी तरफ ईके पलानीस्वामी जो 60 सीटों पर काबिज हैं, उनकी सीटो की संख्या लगभग 20 प्रतिशत बढ़ती हुई दिख रही है। तमिलनाडु का चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए भी लाभकारी सिद्ध हो सकता है । निष्कर्षतः वहां पर सत्ता परिवर्तन नही भी हो तो भी सकता है। वर्तमान सत्ताधारी सरकार को बेहद मुश्किलों का सामना करते हुए जोड़-तोड़ करके सरकार बनाने की स्थिति दिख रही है।

पुडुचेरी ( पाण्डिचेरी)

पुडुचेरी यानी पांडिचेरी में 9 अप्रैल को मतदान संपन्न हो गये। मतगणना 4 मई को होगी। पांच राज्यों की मतगणना के साथ परिणाम घोषित किए जाएंगे। केंद्र शासित प्रदेश होने के बावजूद यहां विधानसभा विधानसभा कार्यरत है। वहां पर 30 सीट हैं। तीन मनोनीत सीटें है। 30+ 3 में 16 सीटों पर विजय प्राप्त करने वाला दल सरकार बनाता है। वर्तमान में एनडीए यानी कि एआएएनआरसी व बीजेपी का कुल 19 सीटों पर कब्जा है। रंगास्वामी जी वहां मुख्यमंत्री है। डीएमके और कांग्रेस की कुल 14 सीट हैं। ऐसी स्थिति में रंग स्वामी जी की कुंडली मेष राशि और तुला लग्न की चंद्रमा और मंगल आमने-सामने विराजमान हैं। तुला लग्न स्वयं में बलवती होती है। राहु भी छठे स्थान पर है। सूर्य दशम स्थान पर चंद्रमा के घर पर है । महादशा गुरु की है, जिसमें अंतर्दशा शुक्र की चल रही है। शुक्र नवे स्थान में भाग्य भाव पर बैठा हुआ है। रंग स्वामी जी के नेतृत्व वाला यह चुनाव पांडिचेरी के उन्ही की सत्तासीन होने की ओर निर्देशित कर रहा है। यद्यपि की कांग्रेस की एक दो सीटों पर पिछले परिणाम की अपेक्षा हो सकती है । परंतु सत्ता परिवर्तन का यहां भी कोई आसार नहीं दिख रहा है।

निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि अप्रैल में प्रस्तावित पांच राज्यों के चुनाव में असम में हेमंत बिस्वा सरमा की सरकार पुन: रिपीट होगी। सीटों की संख्या प्लस माइनस 5 हो सकती है । पश्चिम बंगाल में बीजेपी पिछले इलेक्शन की अपेक्षा 20 प्रतिशत सीट अधिक पाएगी। जबकि तृणमूल कांग्रेस को पिछली बार की अपेक्षा 10 प्रतिशत सीटों का नुकसान होगा। परंतु सरकार तृणमूल कांग्रेस की बनती हुई दिख रही है । तमिलनाडु में स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार जिसके सीटों की संख्या 133 है। लगभग 30 फीसदी सीटों का नुकसान सहना पड़ सकता है, जबकि बीजेपी के लिए अपनी सीटें बढ़ाना आसान होगा।

पलानीस्वामी 60 सीटों से बढ़कर 72 से 75 सीटों के बीच आएंगे । कठिन मुकाबले के पश्चात स्टालिन जोड़-तोड़कर तमिलनाडु में अपनी सत्ता कायम कर सकेंगे। केरल में भी सरकार रिपीट होती हुई दिख रही है। पांडिचेरी में कांग्रेस को दो से तीन सीटों का बढ़त मिल सकता है। परंतु सरकार बदल जाए इस तरह की गोचरी स्थिति कांग्रेस को सपोर्ट नहीं कर रही।

ग्रह नक्षत्र योग गोचर इत्यादि का विश्लेषण करते हुये, निष्पक्ष फलादेश यह है। पर लोकतंत्र मे जनता का आदेश, ईश्वर का निर्णय होता है। और ईश्वर का निर्णय सभी फलादेश तथा कर्म के ऊपर है।

(लेखक प्रख्यात वास्तुविद व ज्योतिर्विद हैं।)

Devendra Bhatt (Guru ji)
ABOUT THE AUTHOR

Devendra Bhatt (Guru ji)

Next Story