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Akshay Tritiya-Parashuram Jayanti: सोमवार को रोहिणी नक्षत्र में अक्षय तृतीया व परशुराम जयंती
Akshay Tritiya-Parashuram Jayanti: वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया पर्व मनाते हैं । कुछ प्रदेशों में इसे आखा तीज भी कहा जाता है । अक्षय शब्द का अर्थ है जिसका कभी नाश या क्षय नहीं हो, जो स्थाई रहे ।
Akshay Tritiya Parashuram Jayanti (Photo_ Social Media)
Akshay Tritiya-Parashuram Jayanti:: सोमवार 20 अप्रैल को रोहिणी नक्षत्र में अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम जयंती मनायी जाएगी । भारतीय संस्कृति में व्रत , पर्व और त्योहारों को बहुत महत्व दिया जाता है । हमारे सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन में इनसे, प्रेरणा और स्फूर्ति का संवहन होता है । हमारे ऋषियों और महर्षियों ने व्रत और पर्वों का आयोजन विशिष्ट तिथियों में करके समाज को गलत रास्ते पर जाने से बचाने का बहुत ही बड़ा कार्य किया है ।
कालगणना के अनुसार चार ऐसे अभिजीत मुहूर्त हैं, जिनमें कोई भी कार्य , विशेषकर मांगलिक कार्य किया जा सकता है । ये हैं चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (गुड़ी पड़वा ), अक्षय तृतीया, दशहरा और दीपावली के पहले की प्रदोष- तिथि ।
वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया पर्व मनाते हैं । कुछ प्रदेशों में इसे आखा तीज भी कहा जाता है । अक्षय शब्द का अर्थ है जिसका कभी नाश या क्षय नहीं हो, जो स्थाई रहे । स्थाई वही रह सकता है , जो हमेशा सत्य हो ।
प्रतिवर्ष इसी तिथि में चारों धामों में एक बद्रीनाथ धाम के पट खुलते हैं । श्रद्धालुओं द्वारा इस दिन किए हुए पुण्य कार्य ,जप - तप हवन इत्यादि गंगा स्नान, अक्षय की श्रेणी में आते हैं । इसी दिन वृंदावन में श्री बिहारी जी के चरणों के दर्शन, वर्ष में एक बार होते हैं। और श्रद्धालु गण इस दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से आते हैं ।
यह दिन शुद्ध रूप से क्षय के कार्यों के स्थान पर, अक्षय कार्य यानी स्थाई कार्य करने का दिन है । हमें यह देखना चाहिए कि भौतिक रूप से जो दिखाई देता है, चाहे शरीर हो या संसार की अन्य वस्तुएं इनका सभी का क्षय होना है। जबकि सकारात्मक विचार ,चिंतन,मनन,परोपकार आध्यात्म इत्यादि अक्षय रहते हैं ।
अक्षय तृतीया एक सामाजिक त्यौहार है ।इस दिन कोई दूसरा मुहूर्त नहीं देखकर स्वयं सिद्ध अभिजित, शुभ मुहूर्त के कारण विवाह इत्यादि मांगलिक कार्य संपन्न किए जाते हैं । जीवन की सार्थकता को समझते हुए अक्षय तत्व को प्राप्त किया जा सकता है। हमारा दृढ़ संकल्प श्रद्धा पूर्ण और हमारी निष्ठा भगवत प्रेम में अटूट होनी चाहिये। तभी इन सब का वास्तविक अर्थों में परिणाम प्राप्त हो सकता है।
विष्णु धर्मसूत्र ,मत्स्य पुराण, नारद पुराण और भविष्य पुराण इत्यादि में अक्षय तृतीया का विस्तृत रूप से वर्णन किया गया है । इस व्रत की कई कथाएं भी हैं । इस दिन किए गए दान, स्नान,जप तप, हवन आदि कर्मों का शुभ और अनंत परिणाम मिलता है ।
भविष्य पुराण में एक जगह वर्णन है कि,इस दिन के सभी कर्मों का फल अक्षय हो जाता है इसलिए इसका नाम अक्षय पड़ा है। इसी तिथि से, युगादि तिथियों की गणना होती है । क्योंकि सतयुग का और काल भेद से त्रेता युग का प्रारंभ , इसी तिथि से हुआ है ।
इस दिन जल से भरे हुए कलश ,पंखा, चरण पादुका, छाता, गाय ,भूमि, पात्र इत्यादि का दान पुण्य किया जाता है ।
अगर इसे हम दूसरे दृष्टि से देखें तो इस महीने में गर्मी बहुत रहती है इसलिए अभाव ग्रस्त लोगों को ये वस्तुएं दान की जाती हैं । बुंदेलखंड में अक्षय तृतीया से पूर्णिमा तक, यह व्रत बहुत धूमधाम से मनाया जाता है । राजस्थान में वर्षा के लिए इस दिन शगुन निकाला जाता है, और वर्षा की कामना की जाती है। और सात अन्न की पूजा की जाती है । मालवा में नये घड़े के ऊपर खरबूजा और आम का पल्लव रखकर पूजा होती है । किसानों के लिए यह नए वर्ष के प्रारंभ का शुभ दिन माना जाता है । इस दिन कृषि कार्य का प्रारंभ होता है । ऐसा विश्वास किया जाता है कि, इस दिन से प्रारंभ किए हुए कार्य से समृद्धि होती है ।
इसी दिन नर - नारायण, परशुराम और हयग्रीव का अवतार हुआ था । इसलिए इनकी जयंती भी अक्षय तृतीया को मनाई जाती है । इसी दिन गौरी की भी पूजा होती है । कन्याए गौरी पूजन करके मिठाई फल और भीगे हुए चने बांटती हैं । सुख समृद्धि की कामना के साथ नए वस्त्र, आभूषण बनवाए खरीदे और धारण किए जाते हैं ।
नई भूमि को खरीदना , भवन , संस्था आदि में प्रथम प्रवेश इस तिथि को शुभ परिणाम दायक माना जाता है। कहीं-कहीं पर इस दिन गन्ने के रस से बने पदार्थ ,दही , चावल दूध से बने व्यंजन, खरबूज ,तरबूज और लड्डू का भोग लगाकर दान करने का विधान है ।


