होलिका दहन, चंद्रग्रहण व रंगोत्सव: तिथि-मुहूर्त का समाधान

2 मार्च रात्रि होलिका दहन, 3 मार्च आंशिक चंद्रग्रहण व 4 मार्च रंगोत्सव—भद्रा, सूतक व शास्त्रीय तिथि गणना का विस्तृत समाधान।

Devendra Bhatt (Guru ji)
Published on: 28 Feb 2026 4:05 PM IST (Updated on: 28 Feb 2026 4:06 PM IST)
होलिका दहन, चंद्रग्रहण व रंगोत्सव: तिथि-मुहूर्त का समाधान
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Holi 2026: हिंदुस्तान एवं उसका सनातन हिंदू धर्म अनेक विविधताओं को समेटे हुए एक उत्सवधर्मी देश है। गणपति पूजा, दशहरा, दीपावली, होली सभी प्रमुख त्योहार असत्य पर सत्य की स्थापना का संदेश देते हैं। वर्तमान फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा विक्रम संवत 2082 यानी 2 मार्च 2026 को सायं 5:18 पर पूर्णिमा का प्रारंभ होगा जिसकी समाप्ति या उसका कालखंड 3 मार्च 2026 सायं 4:33 तक रहेगा, क्योंकि 2 मार्च को सूर्यास्त सायं 5:46 पर होगा तथा पूर्णिमा की तिथी चंद्रमा से प्रभावित होने के कारण रात्रि प्रधान होती है अतः होलिका को 2 मार्च की रात्रि में ही जलाया जाएगा।अगले दिन पूर्णिमा 3 मार्च को साइन 4:33 तक भोग करेगी क्योंकि सभी धर्मशास्त्र एक स्वर से कहते हैं,

"फाल्गुन पौर्णमासी होलिका। सा च सायाहृव्यापिनी ग्राह्या। सायाह्ने होलीकां कुर्यात्।"

अर्थात फाल्गुन मास के पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाना चाहिए। सायं काल अर्थात रात्रि काल में पूर्णिमा ग्राह्य है। पूर्णिमा की रात्रि काल में होलिका दहन करें । ​​​

इसी दिन सायं 5:18 से देर रात्रि 4:56 तक सिंह राशि का भद्रा है। ऐसे में शास्त्रों का मत है —

"प्रदोष व्यापिनी ग्राह्या पौर्णिमा फाल्गुनी सदा। तस्यां भद्रामुखं त्यक्वा पूज्या होली निशा मुखे।"

अर्थात, भद्रा की स्थिति होने पर फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन हेतु प्रदोष व्यापिनी ग्रहण करना चाहिए उसमें यदि भद्रा भी निहित हो तो भद्रा के मुख का त्याग कर निशा मुख में होलिका दहन करें । समग्र विश्लेषण करने पर समय रात्रि 12:50 से 2:02 बजे के मध्य निर्धारित होता है। अर्थात होलिका दहन का कार्यक्रम 2 मार्च दिन सोमवार की रात्रि में 12:50 से रात्रि 2 बजकर 2 मिनट के मध्य किया जाएगा।


बसंतोत्सव (रंगोत्सव)—

होली रंग खेलने या रंगोत्सव मनाने के संदर्भ में भविष्य पुराण का कथन है कि चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा को बसंत उत्सव मनाया जाना चाहिए, और वह प्रतिपदा उदय कल में ग्रहण करना चाहिए अर्थात चैत्र प्रतिपदा जो कृष्ण पक्ष की है वह उदय कल में जिस दिन आएगी उसे ग्रहण किया जाएगा। अब चैत्र कृष्ण प्रतिपदा 3 मार्च दिन मंगलवार को साय॔ 4:33 बजे से 4 मार्च साय॔ 4:15 बजे तक है । इसमें उदय का काल 4 मार्च दिन बुधवार को है। अतः धर्मशास्त्र रंग खेले जाने के संदर्भ में दिनांक 4 मार्च का दिन ही निर्धारित करते है।


चन्द्र ग्रहण—

विक्रम सम्वत्तम 2082 अर्थात अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 2025–26 में दो चंद्र ग्रहण भारत में दृश्य होगा। दूसरा चंद्र ग्रहण फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा दिनांक 3 मार्च 2026 दिन मंगलवार को भारतीय समय अनुसार अपराहन 3:20 पर प्रारंभ होगा जिसका मध्य सायं 5:04 पर और मोक्ष सायं 6:45 पर होगा इस चंद्र ग्रहण का प्रारंभ भारत में दृश्य नहीं है ।चंद्र ग्रहण का मोक्ष काल भारत के सुदूर पूर्वी भाग से दिखाई देगा शेष भारत में चंद्र ग्रहण नहीं दिखेगा । ग्रहण के सूतक काल के विषय में धर्म शास्त्रों का मत है कि चंद्र ग्रहण के लिए 9 घंटा एवं सूर्य ग्रहण के लिए 12 घंटा पूर्व सूतक मान्य है। सूतक के दरमियान भोजन करना निषिद्ध माना जाता है। इस दरमियान यदि कोई भोजन बाद में भी इस्तेमाल करने योग्य रखना है तो उसमें तुलसी दल डाल कर रखने से चंद्र ग्रहण से निकलने वाली विकिरण या बुरी प्रभाव से सुरक्षित किया जा सकता है।


सूतक काल के विषय में शास्त्र लिखते हैं —

"सूर्य ग्रह तू नाश्नीयात पूर्व धाम चतुष्टयम।

चंद्रग्रहे तू यामास्त्रीन बाल वृद्धा तुरैर्पिना।।"

अर्थात बालक वृद्धि और रोगी को छोड़कर बाकी लोगों को भोजनादि निषिद्ध है । गर्भवती स्त्रियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए । सावधानी से तात्पर्य यह है कि ग्रहण से निकलने वाली विकिरण से गर्भ में पल रहे शिशु के किसी भी अंग पर दुष्प्रभाव पढ़ने की संभावना होती है अतः ऐसे में गर्भवती स्त्रियों को एक स्थान पर लेटना चाहिए । गाय के गोबर से अपने शरीर के चारो तरफ रेखा खींच लेनी चाहिए। ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो। भोजन इत्यादि ग्रहण नहीं करना चाहिए ।भगवान चंद्रमा ग्रहण कल के दरमियान मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठा हुई होती है अतः उनके कपाट सार्वजनिक पूजन हेतु बंद कर दिए जाते हैं परंतु भक्तगण स्वयं जप नियम संयम का पालन करें पूजन इत्यादि करें, चंद्र भगवान को होने वाले कष्ट से जल्दी ही मुक्ति की प्रार्थना करें और ग्रहण की समाप्ति के पश्चात स्नान करके दान और धर्म करें। ग्रहण पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के सिंह राशि पर लगेगा जिसका विभिन्न राशियों पर प्रभाव एक स्थूल रूप में इस प्रकार है की मेष राशि के लिए चिंता का कारण, वृष राशि के लिए व्यथा यानी दुख का कारण, मिथुन राशि के लिए श्री यानी कि धन प्राप्ति, कर्क राशि के लिए क्षति का कार्य, सिंह के लिए अपने करीबियों से घात की संभावना, कन्या राशि के लिए हानिकारक, तुला राशि के लिए लाभप्रद , वृश्चिक के लिए सुखद, धनु राशि के लिए माननाश अर्थात सम्मान को हानि पहुंचाने वाली घटनाएं, मकर राशि के लिए शारीरिक कष्ट, कुंभ राशि के लिए स्त्री पीड़ा और मीन राशि के लिए शौख्यकारी होगा।

इस वर्ष पूर्णिमा, होलिका दहन, खण्डग्रास चन्द्रग्रहण, सिंहस्थ भद्रा एवं वसंतोत्सव (रंगोत्सव) एक साथ होने के कारण शुभचिन्तकों/ विद्वत्तजन के द्वारा प्रश्न पूछे जा रहे थे, जिसका समाधान प्रस्तुत है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवीन विक्रम संवत प्रारंभ होगा। नूतन वर्ष मे वार्षिक राशिफल एवं देश का राजनैतिक आर्थिक फलादेश लेकर उपस्थित हो जाऊंगा। सभी देश वासियों को वसंतोत्सव की हार्दिक शुभकामना।

देवेन्द्र भट्ट (गुरू जी)

Devendra Bhatt (Guru ji)
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