Astrology Warning: युद्ध खत्म या नया संकट? देखें ज्योतिष ने क्या बताया

Israel iran War Astrology: इजरायल की कुंडली में चंद्रमा और शनि एक साथ बैठा हुआ है। सूर्य और राहु यह दोनों की युति हैं। जबकि सूर्य उच्च का है।

Devendra Bhatt (Guru ji)
Published on: 3 April 2026 5:25 PM IST
Donald Trump Astrology Truth
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Israel iran War Astrology: इजरायल अमेरिका बनाम फिलिस्तीन के बीच का यह युद्ध विश्व में सर्वाधिक चिंता का विषय बना हुआ है। लिहाज़ा इसे भू राजनीतिक नजरिये से देखने के साथ ही साथ ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी देखने की जरूरत हैं। इस युद्ध का फलादेश समझने के लिए हमें सर्वप्रथम अतीत के कुछ बिंदुओं पर ध्यान देना होगा, जो इसराइल और फिलीस्तीन के बीच के संघर्ष के केंद्र रहे। सर्वप्रथम द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात इजरायल की स्थापना की बात करते हैं। इज़राइल की स्थापना 14 मई 1948 को की गई। यह भी कहा जा सकता है कि इसी तारीख को इसराइल ने स्वयं को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया । यहूदी लंबे समय से उपेक्षा के साथ ही आतंक के साए में जीवन बिताते रहे थे। इसराइल और फिलिस्तीन के बीच के विवाद में अरबों की जमीन पर इजरायल का दावा, येरुशलम और तमाम अंतरराष्ट्रीय समबन्धों से जुड़े हुए मुद्दे हैं। इसलिए किसी भी तरह की भी भविष्यवाणी के लिए अंतरराष्ट्रीय संबंधों से संबंधित उन घटनाओं पर प्रकाश डालना बहुत आवश्यक है, जो इन्हें प्रभावित करती हैं । उनकी तिथियां, उनका योग और उस समय की गोचरी स्थिति राशि चक्र इत्यादि के अध्ययन पर ही भविष्य का निर्धारण किया जा सकता है। इसराइल द्वारा खुद को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करने के बाद से ही छोटे बडे संघर्ष चलते रहे। मुख्य रूप से फिलिस्तीन के विस्थापितों को लेकर सदैव तनाव की स्थिति रही। ज्योतिष के लिहाज से दूसरी मुख्य तिथी दिनांक 13 सितंबर 1993 की है। जब इसराइल और फिलीस्तीन मुक्ति संगठन के बीच अमेरिकी व्हाइट हाउस में ‘ओस्लो समझौता’ होता है । ज्योतिष की नजर से उसे तिथि की ग्रहीय स्थितियां भी फलादेश हेतु निर्णायक होंगी।

इजरायल की कुंडली में चंद्रमा और शनि एक साथ बैठा हुआ है। सूर्य और राहु यह दोनों की युति हैं। जबकि सूर्य उच्च का है। मंगल सूर्य के घर में है। इनका दुष्परिणाम यह है कि इजरायल को सदैव अपनी सैनिक और युद्ध की तैयारी बनाए रखनी पड़ती है और बार-बार मुस्लिम कहे जाने वाले राष्ट्रों से घिरा हुआ यह इजरायल अपने अस्तित्व के लिए युद्ध करता रहता है। परन्तु मंगल शनि और शुक्र पर शुभ दृष्टि ने विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र की मजबूती के कारण इसे में यह खुद को अजेय बनाए हुए है।


वर्तमान मे ईजराईल हमास फिलीस्तीन ईरान के के मध्य जो तनाव की स्थिति बनी हुई है, उसकी वजह 7 अक्टूबर, 2023 की सुबह इसराइल पर हमास के आतंकवादियों द्वारा पैराग्लाइडर्स अथवा पैराशूट से अचानक हमला बोलना है। इस तनाव की स्थिति में सैकड़ो लोग मारे गए। हमास ने बहुत से इसराइलियों को बंदी बना लिया । उस समय ग्रहों की गोचरीय स्थिति में राहु और गुरु दोनों सूर्य के घर में स्थित थे, जो गुरु चांडाल योग बना रहे थे। उस पर मंगल की सीधी दृष्टि थी, जिसके कारण विनाशकारी घटनाएं हुई। युद्ध लंबा चला। समय-समय पर इसमें कुछ विराम भी आते रहे पर दोनों ही पक्षों का काफी नुकसान हुआ, जिसका कारण गुरु चांडाल योग और उस पर मंगल जैसे पाप ग्रह की पूर्ण दृष्टि रहा।

इस युद्ध में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका नितांत महत्वपूर्ण रही अर्थात उनकी सीधी एंट्री इस युद्ध को भयावह बना दिया । अब यहां डोनाल्ड ट्रंप जैसे विरोधाभासी व्यक्तित्व की कुंडली पर विचार करना आवश्यक है। उनकी कुंडली वृश्चिक राशि की है। वृश्चिक राशि में चंद्रमा नीच का होता है। अतः ऐसे जातक स्थिर और ठंडे दिमाग के न होकर उग्र व्यक्तित्व और अस्थिर विचारों के होते हैं। उनकी कुण्डली ज्येष्ठा नक्षत्र के शुभ योग की कुंडली है। शुक्र एवं शनि दोनों ही वर्ग उत्तम के हैं। मंगल सिंह राशि अर्थात सूर्य की राशि में है। सूर्य राहु भी वृष राशि में है तथा चंद्रमा केतु के कारण पीड़ित है। अतः डोनाल्ड ट्रंप जैसी कुंडली के जातक सफल व्यवसायी होने के साथ-साथ जीवन के उत्तरार्ध में राज सत्ता का सुख प्राप्त करते हैं।


स्वभाव की उग्रता उनकी व्यक्तिगत जीवन में दांपत्य की और स्थिरता के साथ-साथ कार्य व्यवहार को भी प्रभावित करती रहेगी । वर्तमान मे उनकी कुण्डली मे शनि मीन राशि में पंचम स्थान पर विराजमान है। जो 29 मार्च, 2025 तक से 3 जून, 2027 तक रहेगा। उल्लेखनीय है कि डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी, 2025 को अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में पद संभाला। पदासीन होने के दो माह पश्चात से ही शनि की प्रतिकूल परिस्थिति उनके मस्तिष्क को प्रभावित किए हुए है। उस पर भी गोचर वश जब-जब कोई पाप ग्रह के प्रभाव में शनि आ रहा है। तब तक उनके फैसले और भी अविवेकपूर्ण हो रहे हैं । 15 फरवरी को सूर्य कुंभ राशि में प्रवेश के साथ उनके द्वारा जल्दबाजी और बिना किसी ठोस तैयारी के ईरान पर 28 फरवरी। 2026 को सीधा हमला कर दिया गया।


15 मार्च को सूर्य, मीन राशि में शनि के साथ आ गया। अतः अमेरिकी राष्ट्रपति ने अविवेकपूर्ण कृत्यों एवं अपने वक्तव्य से अपने मित्र राष्ट्रों का भी सहयोग खो दिया । 15 अप्रैल को सूर्य संक्रमण होकर शनि का साथ छोड़ देगा। अतः ट्रंप के आचरण एवं व्यवहार में समझौता पूर्ण रूप दिखाई देगा। ज्यादा संभावना है की 15 अप्रैल के शीघ्र पश्चात वे अपनी स्वयं की जीत का आधा अधूरा दावा करते हुए अपनी पीठ थपथपा कर यह घोषणा करेंगे कि ईरान को हरा दिया गया है तथा एक तरफा युद्ध से हट जाएंगे । परंतु फिलिस्तीन -गाजापट्टी -ईरान और इजरायल के मध्य तनाव की स्थिति बनी रहेगी । फिर से किसी बड़े युद्ध का संकेत तो नहीं दिख रहा परंतु छुटपुट हमले होते रहेंगे। किसी भी पक्ष द्वारा किसी परमाणु या रासायनिक या जैविक हथियारों का प्रयोग नहीं किया जाएगा।

समाधान— ओस्लो समझौते के परिपेक्ष में जो 13 सितंबर, 1993 को वाशिंगटन में हुआ था। उस समय की ग्रहीय स्थिती के हिसाब से समाधान तलाश की कोशिश करते हैं । 13 अप्रैल 1993 (ओस्लो समझौते) को चंद्रमा और शुक्र , कर्क राशि में सूर्य स्वग्रही था, गुरु मंगल बुध तीनो कन्या राशि के थे। राहु वृश्चिक राशि में शनि स्वगृही कुम्भ मे था । केतु वृष राशि का रहा । ओस्लो समझौते के हिसाब से प्रत्यंतर में इस समय 22 मई, 2026 तक राहु का प्रभाव रहेगा। अतः इजरायल फिलिस्तीन और ईरान के मध्य का जो वर्तमान तनाव और संघर्ष है, यह 22 मई, 2026 के पश्चात बिना किसी ठोस नतीजे पर पहुंचे हुए समाप्त हो जाएगा। ओस्लो समझौते के अनुसार जिसका उद्देश्य ‘दो-राज्य समाधान’ के माध्यम से एक सुरक्षित इजरायल के साथ एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य का मार्ग प्रशस्त करना था। इस समझौते की ग्रहीय स्थिति इतनी मजबूत है कि दोनो देशों के अमन चैन के लिए इसे अपनाना ही अन्तिम समाधान है।

( लेखक प्रख्यात वास्तु व ज्योतिर्विद हैं।)

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