Global Oil Crisis Deepens: तेल संकट की चपेट में दुनिया, भारत का क्या होगा

Global Oil Crisis Deepens: ईरान इस्रायल और ईरान अमेरिका युद्ध और होर्मुज संकट के बाद पूरी दुनिया में ईंधन का संकट उत्पन्न हो गया है। तेल की कीमतों का उछाल विकासशील देशों को संकट में ढकेल रहा है।

Ramkrishna Vajpei
Published on: 18 May 2026 5:36 PM IST
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Global Oil Crisis Deepens: ईरान इस्रायल और ईरान अमेरिका युद्ध और होर्मुज संकट के बाद पूरी दुनिया में ईंधन का संकट उत्पन्न हो गया है। तेल की कीमतों का उछाल विकासशील देशों को संकट में ढकेल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। जिसने दुनिया के तमाम देशों में खलबली मच गई है। कई देशों में कम से अधिक तक पेट्रोल डीजल कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। हाल ही में भारत में भी तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है लेकिन यह बहुत अधिक नहीं है। अगर दूसरे देशों को देखें तो यह बढ़ोतरी मामूली ही कही जाएगी। जब दुनिया के तमाम देशों में तेल की कीमतों में 20 से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है ऐसे में भारत में एक साल में 3.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी यह दर्शा रही है कि सरकारी तेल कंपनियां और सरकार मिलकर यह दबाव झेल रही हैं।

दुनिया में कहां कितनी बढ़ी कीमतें?

अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमतों में करीब 40 फीसद की वृद्धि हुई है।

ब्रिटेन में यह बढ़ोतरी 19 प्रतिशत और फ्रांस में 21 प्रतिशत तक है।

तेल उत्पादक देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भी पेट्रोल 46 प्रतिशत महंगा हो गया है।

पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और वहां पेट्रोल लगभग 395 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।

दक्षिण कोरिया में 20 प्रतिशत और वियतनाम में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

अगर भारतीय रुपये में तुलना करें तो फ्रांस में पेट्रोल लगभग 224 रुपये प्रति लीटर, ब्रिटेन में 203 रुपये, पाकिस्तान में 134 रुपये और दक्षिण कोरिया में लगभग 131 रुपये प्रति लीटर के बराबर बैठता है। भारत में यह कीमत 97.77 रुपये प्रति लीटर है, जो तमाम देशों के मुकाबले काफी कम कही जाएगी।

डेटा का ताजा विश्लेषण बताता है कि भारतीय तेल कंपनियों को हर महीने लगभग 55 हजार करोड़ का नुकसान झेलना पड़ रहा है। हालिया वृद्धि के बाद यह घाटा लगभग 52 हजार करोड़ रहने का अनुमान है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि कंपनियों को पिछले वर्ष जैसी लाभ स्थिति में लौटना है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आगे और वृद्धि करनी पड़ सकती है।

देखने में यह बहुत अच्छा लग रहा है कि भारत में जनता पर तेल कीमतों का दबाव सबसे कम है लेकिन भारत में प्रति व्यक्ति आय बहुत कम होने के कारण जनता पर इस वृद्धि का घरेलू जरूरतों का सामान महंगा होने से परोक्ष रूप से लोड बहुत अधिक हो जाता है। अगर तेल संकट की यह समस्या जल्दी हल नहीं हुई तो आने वाले समय में होने वाली वृद्धि उपभोक्ताओं का संकट बढ़ा सकती है।

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Ramkrishna Vajpei

Ram Krishna Vajpei is a veteran cross-media journalist, political analyst, and data journalism expert whose distinguished career began in 1982. Spanning over four decades across print, broadcast (TV/Radio), and digital platforms, he specializes in rigorous research and deep analytical reporting on socio-political affairs. An authority on modern data journalism and the technical application of AI/LLMs in media, Vajpei also trains next-generation journalists and is currently pursuing a PhD in media studies. His work is defined by an absolute commitment to objectivity and a comprehensive editorial vision.

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