Concert Economy: कॉन्सर्ट्स से भर रहे होटल, बढ़ रहा कारोबार; इवेंट इकोनॉमी से चमक रही भारतीय अर्थव्यवस्था

India Event Industry Growth 2026: भारत में कॉन्सर्ट्स, डेस्टिनेशन वेडिंग और बड़े आयोजनों के बढ़ते क्रेज ने होटल, ट्रैवल, लाइटिंग, इवेंट मैनेजमेंट और लोकल बिजनेस को नई रफ्तार दी है

Jyotsana Singh
Published on: 1 Jun 2026 7:30 AM IST
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India Event Industry Growth 2026 India

India Event Industry Growth 2026: शादी ब्याह अब महज रश्मों रिवाजों के बीच मेहमाननवाजी का एक अवसर नहीं बल्कि कैमरे के मुताबिक फिल्मी अंदाज में फिक्स सारी परम्पराओं के साथ डिजिटल क्रांति का एक हिस्सा बन चुकी है। यही वजह है कि अब वेडिंग डेस्टिनेशन का क्रेज बेहद ज्यादा चलन में हो गया है। यही वजह है कि मौजूदा समय में राजस्थान की शाही डेस्टिनेशन वेडिंग हो या हजारों लोगों से खचाखच भरे लाइव म्यूजिक कॉन्सर्ट, भारत में इवेंट्स अब सिर्फ आयोजन नहीं बल्कि एक बड़ा अनुभव बन चुके हैं। देश का प्रोफेशनल ऑडियो, विजुअल और लाइटिंग (Pro AV) उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है। बड़ी एलईडी स्क्रीन, अत्याधुनिक साउंड सिस्टम, इंटेलिजेंट लाइटिंग और डिजिटल इफेक्ट्स की बढ़ती मांग ने भारत को इस क्षेत्र में नई पहचान दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत न केवल एशिया बल्कि वैश्विक इवेंट टेक्नोलॉजी बाजार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इवेंट्स की दुनिया में तेजी से बढ़ रहा भारत

पिछले कुछ वर्षों में भारत में मनोरंजन और समारोहों का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। पहले जहां शादी या कॉर्पोरेट कार्यक्रम सीमित संसाधनों के साथ आयोजित होते थे, वहीं अब लोग विश्वस्तरीय अनुभव की मांग कर रहे हैं। बड़े-बड़े मंच, हाई-डेफिनिशन एलईडी स्क्रीन, लेजर शो, ड्रोन लाइटिंग और 3डी विजुअल इफेक्ट्स जैसे तत्व अब आम होते जा रहे हैं। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की लाइव इवेंट्स इंडस्ट्री अगले कुछ वर्षों में 15,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर सकती है। वहीं घरेलू प्रो-एवी बाजार के 2034 तक लगभग 150 मिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

शादियां अब बन चुकी हैं मेगा एंटरटेनमेंट शो

भारतीय शादियां हमेशा से भव्य रही हैं, लेकिन अब उनका स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। खासकर राजस्थान के उदयपुर, जयपुर और जैसलमेर जैसे शहर दुनिया के प्रमुख वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहे हैं। मेगा साउंड इंडिया के प्रबंध निदेशक सिद्धार्थ चौहान के अनुसार, आज की शाही शादियां कई दिनों तक चलने वाले मिनी फेस्टिवल जैसी होती हैं। इनमें संगीत, कॉकटेल, थीम पार्टियां, लाइव बैंड, सेलिब्रिटी कलाकारों की प्रस्तुति और अत्याधुनिक लाइटिंग व्यवस्था शामिल होती है। कई आयोजनों में 25 से अधिक कलाकार अलग-अलग कार्यक्रमों में परफॉर्म करते हैं। इसी बढ़ती मांग का परिणाम है कि अकेले राजस्थान का वेडिंग मार्केट 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का हो चुका है। इससे इवेंट मैनेजमेंट, लाइटिंग, साउंड, सजावट और डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़े हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है।

कॉन्सर्ट इकोनॉमी ने बदली स्थानीय अर्थव्यवस्था

देश में लाइव कॉन्सर्ट्स का क्रेज भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। अंतरराष्ट्रीय कलाकारों से लेकर बड़े भारतीय गायकों के शो अब लाखों दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं। मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शहर बड़े कॉन्सर्ट हब बनते जा रहे हैं।

पाम एक्सपो के फाउंडर डायरेक्टर अनिल चोपड़ा के मुताबिक, स्टेडियम स्तर के इन आयोजनों का लाभ केवल इवेंट कंपनियों तक सीमित नहीं रहता। जब किसी शहर में बड़ा कॉन्सर्ट आयोजित होता है तो होटल बुकिंग बढ़ जाती है, टैक्सी सेवाओं की मांग बढ़ती है और स्थानीय दुकानदारों की बिक्री में भी उछाल आता है। विशेषज्ञ इसे कॉन्सर्ट इकोनॉमी का प्रभाव बताते हैं, जो मनोरंजन उद्योग के साथ-साथ पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।

एलईडी स्क्रीन निर्माण में चीन को चुनौती दे रहा भारत

दुनिया भर में एलईडी डिस्प्ले उद्योग पर लंबे समय से चीन का दबदबा रहा है। अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर 90 प्रतिशत से अधिक एलईडी स्क्रीन का उत्पादन चीन में होता है। हालांकि अब भारत इस क्षेत्र में तेजी से अपनी जगह बना रहा है।

एक्सट्रीम मीडिया के प्रबंध निदेशक संकेत रंभिया के अनुसार, भारत का एलईडी डिस्प्ले बाजार लगभग 2,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और यह हर साल करीब 15 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि केवल एलईडी स्क्रीन रेंटल का कारोबार ही करीब 650 करोड़ रुपये का हो चुका है।

स्थानीय उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम हो रही है और भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के उत्पाद तैयार कर रही हैं। इससे भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थान मिलने की उम्मीद है।

नई तकनीक से बदल रहा इवेंट्स का अनुभव

आज के इवेंट्स में केवल साउंड और लाइटिंग ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, रियल-टाइम कंट्रोल सिस्टम, डिजिटल मैपिंग और इंटरैक्टिव डिस्प्ले जैसी तकनीकों का भी तेजी से उपयोग हो रहा है। इवेंट आयोजक अब दर्शकों को ऐसा अनुभव देने की कोशिश कर रहे हैं, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो सके। यही वजह है कि हाई-रिजॉल्यूशन स्क्रीन, इमर्सिव विजुअल्स और सिंक्रोनाइज्ड लाइट शो की मांग लगातार बढ़ रही है।

बढ़ते उद्योग का गवाह बना बॉम्बे एक्जीबिशन सेंटर

देश में इस तेजी से बढ़ते उद्योग को नई दिशा देने के लिए मुंबई के बॉम्बे एक्जीबिशन सेंटर में 28 से 30 मई 2026 तक पाम एवी-आईसीएन एक्सपो 2026 का आयोजन किया गया। यह इस प्रतिष्ठित आयोजन का 24वां संस्करण था, जिसमें देश-विदेश की प्रमुख तकनीकी कंपनियों और उद्योग विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इन्फॉर्मा मार्केट्स इंडिया के प्रबंध निदेशक योगेश मुद्रास के अनुसार, अत्याधुनिक आयोजन स्थलों और बढ़ती मांग के कारण एंटरटेनमेंट लाइटिंग बाजार करीब 9 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2031 तक यह बाजार 18 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

भारत के लिए बड़ा अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास युवा आबादी, तेजी से बढ़ता मनोरंजन बाजार और मजबूत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसी कई बड़ी ताकतें हैं। शादियों, कॉन्सर्ट्स, खेल आयोजनों और कॉर्पोरेट इवेंट्स की बढ़ती संख्या देश को प्रोफेशनल ऑडियो-विजुअल टेक्नोलॉजी का प्रमुख केंद्र बना सकती है। अगर यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में भारत केवल बड़े इवेंट आयोजित करने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया को इवेंट टेक्नोलॉजी और एलईडी समाधान उपलब्ध कराने वाले प्रमुख देशों में भी शामिल हो सकता है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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