Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी ने 1,200 करोड़ से अधिक की संपत्तियां कीं जब्त

Chhattisgarh News : ईडी ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में 1,200 करोड़ से अधिक की संपत्तियां जब्त कीं, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच तेज।

Newstrack Network
Published on: 2 Jun 2026 8:01 AM IST
Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी ने 1,200 करोड़ से अधिक की संपत्तियां कीं जब्त
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Chhattisgarh Liquor Scam

Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल ऑफिस ने 28 मई को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत तीन प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) जारी किए हैं। इन आदेशों के तहत शराब घोटाले के सिलसिले में 200 करोड़ रुपए की डीड वैल्यू और 1,200 करोड़ रुपए से ज्यादा की कुल मार्केट वैल्यू वाली संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया गया है।

ईओडब्ल्यू/एसीबी, रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित ईडी की जांच से पता चला कि अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा (रिटायर्ड आईएएस) के नेतृत्व वाले एक शराब सिंडिकेट ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों, डिस्टिलरी मालिकों और निजी संस्थाओं के साथ मिलीभगत भगत कर 2019 और 2023 के बीच छत्तीसगढ़ की आबकारी व्यवस्था में सुनियोजित तरीके से हेरफेर किया।

इस हेरफेर के जरिए शराब खरीद की दरों को कृत्रिम रूप से बढ़ाकर, बिना हिसाब-किताब वाली शराब का गुपचुप तरीके से उत्पादन करके और पसंदीदा संस्थाओं को दिए गए एफएल-10ए लाइसेंसों के जरिए कमीशन वसूलकर 2,883 करोड़ से ज्यादा की अपराध से अर्जित संपत्ति जुटाई गई।

पहले ईडी द्वारा पीएओ के तहत विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से जुड़ी अचल संपत्तियों को जब्त किया गया है। विकास अग्रवाल ने सिंडिकेट के जमीनी स्तर के वित्तीय प्रबंधक के तौर पर काम किया। वह डिस्टिलरियों और एफएल-10ए लाइसेंसधारियों से कमीशन इकट्ठा करता था और सीधे अनवर ढेबर तक पैसा पहुंचाता था। विकास अग्रवाल के परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज संपत्तियों को उनकी 'अपराध से अर्जित संपत्ति' के बराबर मूल्य के तौर पर जब्त किया गया है।

इसके अलावा अनवर ढेबर की बेनामी संपत्तियों को भी जिनमें रायपुर के 'ढेबर सिटी होम्स' में कई प्लॉट (जो उसकी लाभकारी नियंत्रण वाली फर्म मेसर्स ए धेबर बिल्डकॉन के जरिए रखे गए थे) और रायपुर में जमीन के पांच टुकड़े (जो शेल संस्थाओं मेसर्स शाइनिंग स्टार बिल्डकॉन, मेसर्स मूनलाइट रियल एस्टेट, मेसर्स स्वर्ण इंफ्राबिल्ड और मेसर्स जय गुरुदेव इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए रखे गए थे) शामिल हैं।

शराब घोटाले के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग करके जुटाई गई सीधी 'अपराध से अर्जित संपत्ति' के तौर पर जब्त किया गया है। इस पीएओ के तहत जब्त की गई कुल संपत्ति का मूल्य लगभग 30 करोड़ रुपए है। दूसरे पीएओ के तहत 'होटल वेस्टिन गोवा' (गांव अंजुना, उत्तरी गोवा) को जब्त किया गया है। यह एक प्रीमियम होटल संपत्ति है, जो मेसर्स पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज है, जिसके निदेशकों में राहुल अग्रवाल और विजय कुमार अग्रवाल शामिल हैं।

जांच में यह साबित हुआ कि होटल को पूरी तरह से 'अपराध से अर्जित आय' से खरीदा गया था, जिसकी कुल कीमत लगभग 110 करोड़ रुपए थी। यह रकम बिना हिसाब-किताब वाली नकदी के रूप में चुकाई गई थी, जो शराब घोटाले से मिली थी और जिसे चैतन्य बघेल के कहने पर भौतिक रूप से (हाथों-हाथ) पहुंचाया गया था।

तीसरे पीएओ (अनंतिम कुर्की आदेश) के तहत तीन एफएल-10ए लाइसेंसधारी कंपनियों- मेसर्स ओम साई बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स दिशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड कुर्क किए गए हैं।

इन कंपनियों को अपने मुनाफे का 50-60 प्रतिशत हिस्सा सिंडिकेट को देने के लिए मजबूर किया गया था, जिसकी कुल राशि लगभग 51 करोड़ रुपए बनती है। ईडी ने रायपुर की विशेष अदालत (पीएमएलए) के समक्ष अपनी छठी पूरक अभियोजन शिकायत भी दायर की है, जिसमें चार नए आरोपियों को नामजद किया गया है।

विजय भाटिया (सिंडिकेट से करीबी संबंध रखने वाला एक व्यवसायी, जिसके पास मेसर्स ओम साई बेवरेजेस में 52.5 प्रतिशत 'बेनामी' हिस्सेदारी थी, जो उसे दबाव डालकर हस्तांतरित की गई थी), टी भुवनेश्वरी राव, प्रोबीर शर्मा (जिसने सिंडिकेट की ओर से करोड़ों रुपए की नगदी भौतिक रूप से पहुंचाई थी) और निखिल चंद्रकार के खिलाफ ये कार्रवाई की गई। पीएमएलए अभियोजन में आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर 85 हो गई है।आगे की जांच जारी है।

--आईएएनएस

/वीसी

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