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CBSE का अहम फैसला, री-इवैल्यूएशन कॉपियों की जांच फिर करेगी Coempt Eduteck
CBSE OSM System: सीबीएसई ने OSM री-इवैल्यूएशन सिस्टम को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। अब डेटा सुरक्षा बढ़ाई गई है और पूरा रिकॉर्ड बोर्ड के सर्वर पर ट्रांसफर कर दिया गया है।
CBSE OSM System
CBSE OSM System: सीबीएसई (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक बड़ा अपडेट सामने आया है। जानकारी के अनुसार, हैदराबाद स्थित कंपनी Coempt Eduteck कक्षा 12वीं की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में आंसर-शीट की स्कैनिंग और डिजिटल मूल्यांकन से जुड़ी भूमिका निभाती रहेगी। हालांकि, छात्रों के डेटा की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए CBSE ने इस बार कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए हैं।
री-इवैल्यूएशन में जारी रहेगा डिजिटल स्कैनिंग सिस्टम
सूत्रों के मुताबिक, 12वीं कक्षा के री-इवैल्यूएशन के लिए जमा होने वाली उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग का काम पहले की तरह Coempt Eduteck ही करेगी। इसके लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही बोर्ड ने यह सुनिश्चित किया है कि सिस्टम को साइबर हमलों, तकनीकी खामियों और डेटा लीक जैसी समस्याओं से सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा परतें जोड़ी गई हैं। इस बदलाव का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना बताया जा रहा है।
CBSE ने डेटा अपने सर्वर पर किया ट्रांसफर
सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि छात्रों की आंसर-शीट और संबंधित रिकॉर्ड अब कंपनी के सर्वर पर नहीं रखे जाएंगे। CBSE ने पूरा डेटा अपने स्वयं के सुरक्षित सर्वर पर ट्रांसफर कर लिया है। इस कदम के बाद डेटा पर बोर्ड का सीधा नियंत्रण बढ़ जाएगा, जिससे सुरक्षा और निगरानी दोनों मजबूत होंगी। इससे किसी भी प्रकार के डेटा लीक या छेड़छाड़ की संभावना को कम करने का प्रयास किया गया है।
क्यों विवादों में आई Coempt Eduteck
Coempt Eduteck एक हैदराबाद आधारित एजुकेशन टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली का संचालन करती है। हाल ही में 12वीं के परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों ने स्कैन की गई आंसर-शीट को लेकर गंभीर शिकायतें की थीं। छात्रों का आरोप था कि कुछ आंसर शीट में पेज गायब थे, कुछ पेज धुंधले थे और कुछ उत्तरों का मूल्यांकन ठीक से नहीं हुआ था। इसके अलावा कुछ मामलों में हैंडराइटिंग से जुड़ी गड़बड़ियों के भी आरोप सामने आए। इन शिकायतों के बाद सोशल मीडिया पर OSM प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे और कंपनी की भूमिका पर भी चर्चा तेज हो गई।
टेंडर प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि Coempt Eduteck को टेंडर प्रक्रिया में अनुचित लाभ दिया गया। आरोप लगाए गए कि टेंडर की शर्तों में बदलाव करके कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिलाने का रास्ता आसान बनाया गया। हालांकि इन आरोपों ने पूरे चयन प्रक्रिया को विवादों के घेरे में ला दिया है।
कंपनी का पुराना रिकॉर्ड भी चर्चा में
Coempt Eduteck पहले Globarena Technologies के नाम से जानी जाती थी। कंपनी का नाम पहले भी कुछ राज्य स्तरीय परीक्षाओं और परिणामों से जुड़े विवादों में आ चुका है। इसी वजह से CBSE OSM विवाद में कंपनी की भूमिका को लेकर अभिभावकों और छात्रों की चिंता बढ़ गई है।
CBSE ने सभी आरोपों को बताया गलत
CBSE ने सोशल मीडिया पर फैल रही सभी अटकलों और आरोपों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। बोर्ड का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया भारत सरकार के जनरल फाइनेंशियल रूल्स (GFR) के तहत पूरी पारदर्शिता के साथ की गई थी। CBSE के अनुसार, कंपनी को सभी तकनीकी और कानूनी मानकों की जांच के बाद ई-प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया के तहत चयनित किया गया था।
छात्रों के लिए क्या है स्थिति
री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पहले की तरह डिजिटल प्रणाली के माध्यम से ही किया जाएगा। हालांकि, बोर्ड ने यह स्पष्ट किया है कि अब डेटा सुरक्षा और निगरानी पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।


