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UGC Guidelines 2026: पीएचडी रिसर्च में AI के इस्तेमाल को लेकर यूजीसी की नई नीति, जानें क्या बदला
UGC Guidelines 2026: यूजीसी ने पीएचडी थीसिस में प्लेजरिज्म और एआई के दुरुपयोग को रोकने के लिए नए नियम जारी किए हैं। उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई होगी।
UGC Guidelines 2026
UGC Guidelines 2026: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग और शोध कार्यों में साहित्यिक चोरी (Plagiarism) की बढ़ती चिंताओं के बीच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने पीएचडी शोध प्रबंधों (थीसिस) के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य शोध की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और मौलिकता को बनाए रखना है। यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को भी निर्देश दिए हैं कि वे शोधार्थियों को इन नियमों की जानकारी दें और शोध प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करें।
प्लेजरिज्म पाए जाने पर होगी सख्त कार्रवाई ( UGC Plagiarism Policy)
UGC के नए नियमों के अनुसार, यदि किसी पीएचडी थीसिस में 10 से 40 प्रतिशत तक साहित्यिक चोरी पाई जाती है, तो उस शोध प्रबंध को संशोधन के लिए वापस कर दिया जाएगा। ऐसे मामलों में शोधार्थी को छह महीने के भीतर आवश्यक सुधार कर दोबारा थीसिस जमा करने का अवसर मिलेगा। हालांकि, यदि किसी शोध कार्य में 40 से 60 प्रतिशत तक नकल पाई जाती है, तो संबंधित शोधार्थी को एक वर्ष तक थीसिस जमा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं, 60 प्रतिशत से अधिक प्लेजरिज्म मिलने पर शोधार्थी का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) तक रद्द किया जा सकता है। यूजीसी का मानना है कि इन कड़े प्रावधानों से शोध कार्यों में मौलिकता और गंभीरता को बढ़ावा मिलेगा।
सुपरवाइजर की जिम्मेदारी भी तय (UGC Latest News)
नए दिशानिर्देशों में केवल शोधार्थियों को ही नहीं, बल्कि उनके सुपरवाइजरों को भी जवाबदेह बनाया गया है। यदि किसी शोधार्थी के कार्य में गंभीर स्तर की साहित्यिक चोरी पाई जाती है या बार-बार ऐसे मामले सामने आते हैं, तो संबंधित सुपरवाइजर के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। यूजीसी के अनुसार, ऐसे सुपरवाइजरों को नए शोधार्थियों का मार्गदर्शन करने से रोका जा सकता है। गंभीर मामलों में उनकी मान्यता समाप्त करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। इससे शोध कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
AI के इस्तेमाल को लेकर भी जारी हुए स्पष्ट निर्देश (UGC AI Rules)
यूजीसी ने पीएचडी शोध कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने कहा है कि भाषा सुधार, व्याकरण जांच, संपादन और अन्य सामान्य तकनीकी कार्यों के लिए AI टूल्स का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इसका उल्लेख शोध प्रबंध में करना अनिवार्य होगा।
हालांकि, शोध के निष्कर्ष तैयार करने, सारांश लिखने, डेटा विश्लेषण करने या शोध के मुख्य बौद्धिक कार्यों के लिए AI से प्राप्त सामग्री का उपयोग स्वीकार नहीं किया जाएगा। यूजीसी का मानना है कि शोध कार्य में मानवीय सोच, विश्लेषण और मौलिक योगदान सबसे महत्वपूर्ण हैं और इन्हें किसी भी तकनीक से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता।Guidelines
शोध की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ाने पर जोर (UGC Guidelines)
यूजीसी (UGC AI Rules) के ये नए नियम ऐसे समय में आए हैं जब AI टूल्स का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शोध कार्यों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और अकादमिक ईमानदारी बनी रहे तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में मौलिक अनुसंधान को प्रोत्साहन मिले।


