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आशा दीदी...ओ माई डार्लिंग..., जब आशा भोसले जी से राह चलते मुलाक़ात हो गई ! वो यादगार किस्सा
1998 में लखनऊ के होटल ताज में आशा भोसले से हुई अचानक मुलाकात ने पत्रकार को दिया एक्सक्लूसिव इंटरव्यू और यादगार अनुभव
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Asha Bhosle Story: बात 1998 की है, उस ज़माने में पीआर सिस्टम बहुत सीमित था। जो बहुत बड़े स्टार नहीं थे वो बड़े पत्रकारों से संपर्क सूत्र ढूंढ कर उनसे ख़ुद सम्पर्क करते थे। सुबह की मीटिंग के बाद रिसेप्शन पर किसी लड़की का फोन आया। फोन होटल ताज से था। किसी सहयोगी ने मुझसे मज़ाक में कहा कि कोई मोहतरमा आपसे बात करना चाहती हैं। लैंडलाइन फोन रिसीव किया तो सुचित्रा नाम की किसी लड़की का फोन था। उसने कहा कि वो मॉडल, एक्ट्रेस और एंकर है। दो दिन बाद लखनऊ में आशा भोसले जी का कार्यक्रम है, उसमें एंकरिंग करने वो आई है। सुचित्रा चाहती थी कि उनका इंटरव्यू करूं। लेकिन उसने बात को थोड़ा घुमाया, बोली मैं पत्रकार भी हूं। इन्डियन एक्सप्रेस में अक्सर उनके लेख छपते हैं इसलिए उसे पत्रकारों से मिलना अच्छा लगता है।
खैर होटल ताज में मुलाकात का टाइम तय हुआ। सुचित्रा से बात कर ही रहा था कि एक लड़का आसपास मंडरा रहा था। वो भी चाहता था कि शहर के बड़े अखबारों में उसका इंटरव्यू छपे। उसने बताया कि वो भी आशा भोसले जी के शो के लिए आया है। उसका सिर्फ इतना काम था कि जब आशा जी के एक गीत- पिया तू अब तो आ जा जा..... मोनिका ओ माई डार्लिंग.... के स्थान पर आशा दीदी माई डार्लिंग गाना था।
ये लड़का उस जमाने में फिल्मी दुनिया में स्ट्रगलर था और इस बात के लिए बेहद खुश था कि उसे आशा दीदी के शो में मौका मिला।
इस लड़के का नाम था - बाबुल सुप्रियो।
खैर इन दोनों से मुलाकात के दौरान पता चला था कि आशा जी अगले दिन लखनऊ आएंगी। दरअसल ये झूठ आयोजकों ने बोला था ताकि पहले से आशा भोसले जी के इंटरव्यू छप गए तो वो शो से पहले प्रेस कांफ्रेंस की कवरेज छोटी हो जाएगी।
होटल ताज से निकलने ही वाला था कि सामने आशा जी ही हस्ती लॉबी से अपने कमरे की तरफ बढ़ती दिखी। करीब जाकर देखा तो बार्डर वाली बंगाली साड़ी में आशा भोसले जी ही थी। उनसे बात करनी चाही पर वो रुकी नहीं। उनके साथ सिक्योरिटी या ब्लैक कमांडो वगैरह नहीं थे। (जबकि मुझे याद है जब उस जमाने में अमिताभ बच्चन जैसे सुपर स्टार जब लखनऊ आते थे तो उनके साथ ब्लैक कमांडो रहते थे)।
जब तक आशा जी लॉबी से अपने कमरे तक पहुंची रास्ते में अच्छी खासी बातचीत हो गई। ये इंटरव्यू एक्सक्लूसिव था। क्योंकी अगले दिन आशा भोसले जी की प्रेस कांफ्रेंस थी और प्रेस कांफ्रेंस से पहले उन्होंने किसी भी पत्रकार से बात नहीं की। किसी को पता भी नहीं था कि वो दो दिन पहले ही लखनऊ आ गई थीं।
ये छोटी सी मुलाकात पहली और आखिरी थी।
खिराजे अकीदत/श्रद्धांजलि


