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बेहद शर्मसार! हरियाणा में मात्र 9 साल की बच्ची अपने ही भाई से हुई 8 महीने की प्रेग्नेंट... मां ने छुपाया सच, प्रशासन सन्न!
Haryana child abuse case: मात्र 9 साल की मासूम बच्ची, 8 महीने की गर्भवती और आरोपी घर में ही छिपा हुआ है आरोपी।
Haryana child abuse case
Haryana child abuse case: ज़रा एक बार सोचिये… जिस उम्र में बच्चे गुड़ियों से खेलते हैं, उस उम्र में यदि कोई बच्ची मां बनने के कगार पर हो, तो यह केवल एक खबर नहीं बल्कि समाज के मुंह पर एक ज़ोरदार तमाचा है। हरियाणा के कैथल से सामने आया एक ऐसा मामला जो आपको शर्मसार होने पर मजबूर कर देगा। मात्र 9 साल की मासूम बच्ची, 8 महीने की गर्भवती और आरोपी घर में ही छिपा हुआ है आरोपी।
इन सब के बीच अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या सबसे खतरनाक जगह अब 'घर' बनता जा रहा है? क्या रिश्ते इतने अंधे हो चुके हैं कि मासूमियत चीखती रह जाए और सब खामोश रहें? यह खबर सामने आते ही न सिर्फ प्रशासन बल्कि समाज की संवेदनाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जाँच में क्या सामने आया?
प्रारंभिक जांच में आरोप सामने आए हैं कि इस अमानवीय कृत्य में बच्ची का 11 साल का सगा भाई शामिल है। मामले की गंभीरता यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि आरोप है कि बच्ची की मां ने बेटे को बचाने का पूरा प्रयास कर रही है और लंबे वक़्त तक बेटी की हालत को छिपा कर रखा। परिणाम यह हुआ कि मासूम बच्ची वक़्त पर इलाज और न्याय से वंचित रह गई।
जानकारी के मुताबिक, बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर जब उसे अस्पताल ले जाया गया, तब डॉक्टरों ने जांच के बाद गर्भावस्था की पुष्टि की। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) और पुलिस को जानकारी दी। मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया और मामले की जांच शुरू की गई।
मामले पर पुलिस ने क्या कहा ?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला बेहद संवेदनशील है और इसमें बाल संरक्षण कानूनों के अंतर्गत कार्रवाई की जा रही है। POCSO एक्ट के प्रावधानों के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है और पूरे घटनाक्रम की गहन जांच की जा रही है। साथ ही, बच्ची को सुरक्षित स्थान पर रखकर मेडिकल और मानसिक परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है।
परिवार उठे गंभीर सवाल
इस मामले ने परिवार की भूमिका पर भी गंभीर और बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वक़्त रहते बच्ची की स्थिति पर ध्यान दिया जाता और सही जानकारी प्रशासन तक पहुंचाई जाती, तो हालात इतने भयावह नहीं होते। मां द्वारा बेटे को बचाने का कथित प्रयास ने इंसाफ़ की प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है।
घटना पर गहरी चिंता
सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला-बाल अधिकार संगठनों ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक विफलता को भी दर्शाता है। बच्चों के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी और ऐसे मामलों में परिवार की चुप्पी बेहद खतरनाक संकेत है।
फिलहाल, प्रशासन का दावा है कि बच्ची की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह है कि इस मामले में पीड़िता को कब और कितना इंसाफ़ मिल पाता है।


