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AIIMS का महा-चमत्कार! महिला के पेट से निकला 20 किलो का राक्षस, चौथी स्टेज के कैंसर को दी पटखनी!
Delhi AIIMS: दुर्गापुर की 43 वर्षीय मुनमुन के लिए पिछले कुछ महीने किसी नरक से कम नहीं थे। उनके पेट में लगातार सूजन बढ़ रही थी और भारीपन इतना था कि चलना-फिरना दूभर हो गया था। जब वह दिल्ली एम्स पहुंचीं, तो जांच में जो सामने आया उसने सबके होश उड़ा दिए।
Delhi AIIMS: कल्पना कीजिए कि किसी इंसान के पेट में एक-दो नहीं बल्कि पूरे 20 किलो का भारी-भरकम ट्यूमर पल रहा हो। यह सुनने में किसी डरावनी फिल्म की कहानी लग सकता है, लेकिन दिल्ली के एम्स अस्पताल में डॉक्टरों ने हकीकत में एक ऐसी जंग जीती है जिसने पूरी दुनिया के मेडिकल साइंस को हैरान कर दिया है। पश्चिम बंगाल की रहने वाली महिला कैंसर की आखिरी और सबसे खतरनाक चौथी स्टेज पर थी, उसे डॉक्टरों ने नई जिंदगी दी है। यह सिर्फ एक सर्जरी नहीं, बल्कि मौत के जबड़े से एक जिंदगी को छीन लाने जैसा कारनामा है।
पेट में महसूस हुआ असामान्य भारीपन
दुर्गापुर की 43 वर्षीय मुनमुन के लिए पिछले कुछ महीने किसी नरक से कम नहीं थे। उनके पेट में लगातार सूजन बढ़ रही थी और भारीपन इतना था कि चलना-फिरना दूभर हो गया था। जब वह दिल्ली एम्स पहुंचीं, तो जांच में जो सामने आया उसने सबके होश उड़ा दिए। मुनमुन को 'कोलन कैंसर' (बड़ी आंत का कैंसर) था, जो पेट के निचले हिस्से यानी पेल्विक एरिया तक फैल चुका था। सबसे डरावनी बात यह थी कि कैंसर चौथी स्टेज पर पहुंच गया था, जहां अक्सर डॉक्टर उम्मीद छोड़ देते हैं। मरीज का शरीर कमजोर हो चुका था कि सर्जरी करना जान जोखिम में डालने जैसा था।
चुनौतियों से भरी वो दो स्टेज की सर्जरी
एम्स के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. एमडी रे और उनकी टीम के सामने हिमालय जैसी चुनौती थी। ट्यूमर बड़ा था कि उसने शरीर के अन्य अंगों को दबाना और नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया था। डॉक्टरों ने हार नहीं मानी। पहले मुनमुन को कीमोथेरेपी के 6 कड़े सेशन दिए गए ताकि ट्यूमर को थोड़ा काबू में किया जा सके। जब PET-CT स्कैन में सुधार की किरण दिखी, तो डॉक्टरों ने ऑपरेशन का फैसला लिया। यह कोई साधारण ऑपरेशन नहीं था, इसमें भारी खून बहने और इन्फेक्शन का खतरा था, लेकिन विशेषज्ञों की टीम ने दो चरणों में नामुमकिन काम को अंजाम दिया।
ट्यूमर और आधुनिक तकनीक का जादू
ऑपरेशन थिएटर में घंटों चली मशक्कत के बाद डॉक्टरों ने मुनमुन के पेट से कुल 19.9 किलो का मांस का लोथड़ा यानी ट्यूमर बाहर निकाला। यह वजन एक छोटे बच्चे के वजन से भी कहीं ज्यादा है। लेकिन चुनौती खत्म नहीं हुई। चौथी स्टेज का कैंसर होने के कारण डर था कि कहीं कुछ बारीक सेल्स पेट में न रह जाएं। इसके लिए डॉक्टरों ने 'HIPEC' (हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी) तकनीक का इस्तेमाल किया। इसमें गर्म कीमोथेरेपी दवा सीधे पेट के अंदर डाली गई ताकि कैंसर का नामो-निशान मिट जाएं।
मेडिकल जगत में जीत का नया परचम
आमतौर पर चौथी स्टेज के कैंसर में मरीज के बचने की संभावना कम मानी जाती है, क्योंकि बीमारी पूरे शरीर में फैल चुकी होती है। लेकिन एम्स के डॉक्टरों के जज्बे और मुनमुन की हिम्मत ने धारणा को गलत साबित कर दिया। आज मुनमुन की हालत स्थिर है, वह तेजी से रिकवरी कर रही हैं। यह मामला साबित करता कि अगर सही समय पर सही तकनीक और काबिल डॉक्टर मिल जाएं, तो कैंसर जैसी लाइलाज मानी जाने वाली बीमारी को भी मात दी जा सकती है। दिल्ली एम्स की यह कामयाबी हर उस मरीज के लिए उम्मीद की किरण है जो कैंसर की आखिरी स्टेज से जूझ रहा है।


