Ancient Human DNA: नेकलेस के पेंडेंट ने खोले पाषाण काल के राज

Ancient Human DNA: जर्मनी के वैज्ञानिकों ने पाषाण काल के हिरण के दांत से बने नेकलेस पेंडेंट से प्राचीन मानव डीएनए निकालकर 20,000 वर्ष पुराने मानव जीवन...

Newstrack Network
Published on: 7 Jun 2026 5:31 PM IST
Stone Age Discovery
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Stone Age Discovery (Image Credit-Social Media)

Ancient Human DNA: आदिम मानव कैसे अपना जीवन निर्वाह करते थे और उनकी संस्कृति कैसी थी, यह पता लगाना बहुत मुश्किल रहा है। लेकिन वैज्ञानिक पत्थरों, हड्डियों या दांतों से बनी वस्तुओं से प्रारंभिक मनुष्यों के जीवन के बारे में बहुत कुछ पता कर सकते हैं। अभी तक इन वस्तुओं को विशिष्ट व्यक्तियों के साथ जोड़ना मुश्किल था। लेकिन जर्मनी में लाइपजिग स्थित मैक्स प्लैक इंस्टिट्‌यूट फॉर इवोल्यूशनरी एंथ्रोपॉलजी के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय रिसर्च टीम ने इन प्राचीन सांस्कृतिक वस्तुओं के जरिए खास व्यक्तियों के बारे में सूचनाएं निकालने की कोशिश की है।

कंकाल के तत्वों पर जोर : शोधकर्ताओं ने हड्डियों और दांतों से डीएनए को अलग करने की एक नई विधि विकसित की है। उन्होंने कंकाल के तत्वों से बनी वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित किया क्योंकि ये छिद्र युक्त होती और इनमें पसीने और शरीर के अन्य तरल पदार्थों में मौजूद डीएनए को बनाए रखने की अधिक संभावना होती है। पुरापाषाण काल की हड्डी और दांत की कलाकृतियों को सतह-संरचना उनके उत्पादन और उपयोग के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती है।

रिसर्च टीम ने पुरातात्विक हड्डी और दांत के टुकड़ों की सतह संरचना पर विभिन्न रसायनों के प्रभाव का परीक्षण किया और उनसे डीएनए अलग करने के लिए फॉस्फेट-आधारित विधि विकसित की। यह विधि एलेना इजल ने विकसित की है, जो इस अध्ययन की प्रमुख लेखक हैं। उन्होंने कहा, हमने एक तरह से अपनी स्वच्छ प्रयोगशाला के भीतर प्राचीन कलाकृतियों के लिए एक वॉशिंग मशीन बनाई है। 90 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान पर कलाकृतियों को धोकर हम उनसे डीएनए निकाल सकते हैं। इससे इन वस्तुओं को कोई नुकसान नहीं होता।

दस्ताने और मास्क; टीम ने पहली बार इस विधि का प्रयोग फ्रांस की ला ग्रांदी रोश गुफा से मिली कलाकृतियों पर किया जो 1970 से 1990 के दशकों में की गई खुदाई में मिली थीं। लेकिन डीएनए का बड़ा हिस्सा उन लोगों का था जिन्होंने खुदाई के दौरान या बाद में कलाकृतियों को संभाला था। इससे प्राचीन मानव डीएनए की पहचान करना मुश्किल हो गया। इसके बाद रिसर्चरों ने उस सामग्री पर ध्यान केंद्रित किया जिसे दस्तानों और चेहरे के मास्क का उपयोग करके ताजा खुदाई से प्राप्त किया गया था। रूस में प्रसिद्ध डेनिसोवा गुफा की खुदाई करने वाले पुरातत्वविदों मैक्सिम कोजलिकिन और माइकल शुनकोव ने आखिरकार प्राचीन डीएनए को निकालने का रास्ता साफ किया। उन्होंने 2019 में सफाई भी से खुदाई की और एक पुरापाषाणकालीन हिरण के दांत से बने पेंडेंट को अलग रख दिया। नेकलेस के इस पेंडेंट से लाइपजिग में वैज्ञानिकों ने न केवल हिरण के डीएनए को अलग किया, बल्कि बड़ी मात्रा में प्राचीन मानव डीएनए को भी अलग किया।

एक ही इंसान से उत्पत्ति; रिसर्चरों ने माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए के विश्लेषण के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि अधिकांश डीएनए की उत्पत्ति एक ही मानव से हुई है। माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए मानव के जीनोम या डीएनए समूह का छोटा हिस्सा है जो बच्चों को विशेष रूप से मां से विरासत में मिलता है। हिरण के जीनोम और मानव माइटोकॉन्ड्रियल जीनोम का उपयोग करके उन्होंने पेंडेंट की उम्र 19,000 से 25,000 वर्ष तक होने का अनुमान लगाया। माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए के अलावा रिसर्चरों ने इसके मानव मालिक के न्यूक्लियर जीनोम का पर्याप्त अंश भी प्राप्त किया। एक्स क्रोमोसोम की संख्या के आधार पर उन्होंने यह निर्धारित किया कि यह पेडेट एक महिला द्वारा बनाया गया, इस्तेमाल किया गया या पहना गया था। उन्होंने यह भी पाया के आदिम व्यक्तियों से संबंधित थी।

आश्चर्यजनक है कि 20,000 वर्षों के बाद प्राचीन वस्तुओं से मानव डीएनए अलग करना संभव है। वैज्ञानिक अब पाषाण युग मे हड्डियों और दांतों से बनी कई अन्य वस्तुओं पर इस विधि को लागू करना चाहते है, ताकि उन व्यक्तियों के बारे में अधिक जानकारी मिल सके जिन्होंने इन वस्तुओं को बनाया, इस्तेमाल किया या पहना था।

-मुकुल व्यास

( साभार ‘ नभाटा’। लेखक प्रतिनिधि शोधार्थी हैं।)

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