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Bengal सियासत में आज आएगा ‘भूचाल’! 60 विधायक बनाएंगे ‘असली TMC’, टूट जाएगी ममता बनर्जी की पार्टी!
West Bengal Politics: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के भीतर गुटबाजी और संभावित टूट की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
Mamata Banerjee
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों बड़ा सियासी भूचाल आने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के भीतर गुटबाजी और संभावित टूट की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी के भीतर एक नया शक्ति केंद्र उभरता दिखाई दे रहा है और करीब 60 विधायक पूर्व टीएमसी नेता ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में खड़े हो सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
दो हिस्सों में बंट सकती है टीएमसी
बताया जा रहा है कि कथित नए गुट ने 80 में से लगभग 60 विधायकों का समर्थन जुटाने का दावा किया है। सूत्रों के अनुसार, यह गुट पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर को समर्थन पत्र सौंपकर अपनी अलग पहचान स्थापित करने की तैयारी में है। यदि ऐसा होता है तो टीएमसी दो हिस्सों में बंट सकती है, जिससे राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी स्थिति में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की राजनीतिक स्थिति भी कमजोर हो सकती है।
महाराष्ट्र जैसी राजनीतिक टूट के संकेत
इस बीच, पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री तापस रॉय के एक बयान ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर महाराष्ट्र जैसी राजनीतिक टूट के संकेत दिखाई दे रहे हैं। तापस रॉय ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में टीएमसी में ऐसे कई लोगों को शामिल किया गया, जिनकी राजनीति में विशेष रुचि नहीं थी। इसके चलते पार्टी के अंदर मतभेद और अंतर्विरोध बढ़ते गए और अब वे सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे हैं।
दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी ने विधायक हॉस्टल में कुछ विधायकों से मुलाकात की बात स्वीकार की है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह कुछ विधायकों के साथ मिले थे और अनौपचारिक चर्चा के दौरान मुरमुरा भी खाया था। हालांकि, उन्होंने अपने साथ 50 से अधिक विधायकों के आने की अटकलों पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। साथ ही उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के नेता के चयन को लेकर कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था और जिस दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर लिए गए थे, वह केवल उपस्थिति दर्ज कराने के लिए था।
गौरतलब है कि टीएमसी पहले ही ऋतब्रत बनर्जी समेत दो नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर चुकी है। वहीं, हाल ही में आयोजित ममता बनर्जी के विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम में कई सांसदों और विधायकों की अनुपस्थिति ने भी पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित बगावत की चर्चाओं को और तेज कर दिया है। अब सभी की नजरें आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।


