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मुंबई की महारानी कौन? BMC मेयर पद पर महिला की ताजपोशी तय, सियासी समीकरणों में आया बड़ा भूचाल
BMC Mayor Election: भाजपा के पास 25 महिला पार्षद हैं, जो उसे सबसे मजबूत दावेदार बनाती हैं। वहीं, उद्धव गुट (UBT) के पास 18 और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पास 9 महिला पार्षद हैं। ओबीसी महिला वर्ग में भी भाजपा 13 पार्षदों के साथ आगे खड़ी है।
BMC Mayor Election: मुंबई की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब गुरुवार को शहरी विकास विभाग की एक चिट्ठी ने बड़े-बड़े सूरमाओं के गणित बिगाड़ दिए थे। अब यह साफ़ हो चुका है कि बीएमसी की कुर्सी पर कोई 'लेडी बॉस' ही बैठेगी। बीएमसी के अगले महापौर का पद महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इस खबर के बाहर आते ही भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के खेमे में हलचल तेज हो गई है, अब उन्हें अपनी महिला सेना को मोर्चे पर उतारना होगा।
लॉटरी के खेल ने सबको चौंकाया?
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये तय कैसे होता है? महाराष्ट्र सरकार खास 'लॉटरी सिस्टम' का पालन करती है। संविधान के 74वें संशोधन के मुताबिक मेयर की कुर्सी किसी वर्ग की जागीर न रहे, इसलिए रोटेशन प्रणाली अपनाई जाती है। जब तक लॉटरी नहीं निकलती, तब तक कोई भी पार्टी अपने उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं कर सकती। यह प्रक्रिया इसलिए की जाती है ताकि चुनाव निष्पक्ष रहें और हर वर्ग को नेतृत्व का मौका मिले। लेकिन इस बार की पर्ची ने कई दिग्गजों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है और कई नई महिला चेहरों के लिए किस्मत के दरवाजे खोल दिए हैं।
किसके पास है कितनी ताकत?
आंकड़ों में भाजपा के पास 25 महिला पार्षद हैं, जो उसे मजबूत दावेदार बनाती हैं। वहीं, उद्धव गुट (UBT) के पास 18 और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पास 9 महिला पार्षद हैं। ओबीसी महिला वर्ग में भी भाजपा 13 पार्षदों के साथ आगे खड़ी है। हालांकि, इस फैसले से हर कोई खुश नहीं है। शिवसेना यूबीटी की नेता किशोरी पेडनेकर ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे गलत बताया है। उनका कहना है कि पिछली बार सामान्य वर्ग के मेयर थे, तो इस बार मौका ओबीसी या एसटी वर्ग को मिलना चाहिए था। अब देखना यह है कि मुंबई की इस 'रानी' की कुर्सी पर कौन सी पार्टी बाजी मारती है।


