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Digital Arrest : ठगी का नया तरीका, साइबर क्रिमिनल कर रहे डिजिटल अरेस्ट!

Digital Arrest : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साइबर अपराधियों द्वारा खुद को पुलिस अधिकारी या केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय एजेंसियों का प्रतिनिधि बताकर "ब्लैकमेल" और "डिजिटल गिरफ्तारी" के खिलाफ अलर्ट जारी किया है।

Neel Mani Lal
Published on: 15 May 2024 10:28 AM GMT
Digital Arrest : ठगी का नया तरीका, साइबर क्रिमिनल कर रहे डिजिटल अरेस्ट!
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Digital Arrest : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साइबर अपराधियों द्वारा खुद को पुलिस अधिकारी या केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय एजेंसियों का प्रतिनिधि बताकर "ब्लैकमेल" और "डिजिटल गिरफ्तारी" के खिलाफ अलर्ट जारी किया है।

भारत में बीते कुछ समय में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां साइबर अपराधी खुद को पुलिस, केंद्रीय जांच ब्यूरो, ईडी, रिजर्व बैंक, कस्टम और नारकोटिक्स ब्यूरो जैसी जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर अपने शिकार को धमकी देते हैं और ब्लैकमेल करते हैं। यहां तक कि शिकार को "डिजिटली गिरफ्तार" भी कर लिया जाता है।

एक अलर्ट में गृह मंत्रालय का कहना है कि ऐसा माना जाता है कि इस तरह की गतिविधियाँ सीमा पार आपराधिक सिंडिकेट द्वारा ऑपरेट की जाती हैं। साइबर अपराधी पुलिस स्टेशनों और सरकारी कार्यालयों की तर्ज पर बनाए गए स्टूडियो का इस्तेमाल करने में माहिर होते हैं और असली दिखने के लिए वर्दी और कैप भी पहनते हैं।

डिजिटल अरेस्ट है क्या?

गृह मंत्रालय के मुताबिक, साइबर अपराधी आमतौर पर संभावित शिकार को कॉल करते हैं और कहते हैं कि उन्होंने कोई पार्सल भेजा है या रिसीव किया है, जिसमें अवैध सामान, ड्रग्स, नकली पासपोर्ट या कोई अन्य प्रतिबंधित चीज है। इस तरह की बातें करके शिकार को भ्रमित किया जता है और उसे ऐसे कथित केस में समझौता करने के लिए पैसे की मांग की जाती है। कुछ मामलों में पीड़ितों को "डिजिटल अरेस्ट" का सामना करना पड़ता है। जिसमें मांग पूरी न होने तक पीड़ित को स्काइप या अन्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म पर साइबर अपराधियों के लिए ऑनलाइन मौजूद रहने पर मजबूर किया जाता है।

कई मामलों में पीड़ितों से कहा जाता है कि उनका कोई करीबी या रिश्तेदार किसी अपराध या दुर्घटना में शामिल पाया गया है और उनकी हिरासत में है। इसके बाद साइबर अपराधी मामले में समझौता करने के लिए पैसे की मांग करते हैं।

गृह मंत्रालय का कहना है कि देश भर में कई पीड़ितों ने ऐसे अपराधियों के कारण बड़ी मात्रा में धन गंवा दिया है। मंत्रालय ने कहा है कि यह एक संगठित ऑनलाइन आर्थिक अपराध है और पता चला है कि इसे सीमा पार अपराध सिंडिकेट द्वारा संचालित किया जाता है।

क्या की जा रही कार्रवाई

अब ऐसे साइबर अपराधियों पर कार्रवाई के लिए गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र बनाया गया है, जो देश में साइबर अपराध से निपटने से संबंधित गतिविधियों का समन्वय करता है। समन्वय केंद्र ऐसे मामलों की पहचान और जांच के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस अधिकारियों को इनपुट और तकनीकी मदद भी देता है. ताजा मामले में समन्वय केंद्र ने माइक्रोसॉफ्ट की मदद से ऐसी गतिविधियों में शामिल 1,000 से अधिक स्काइप आईडी को भी ब्लॉक कर दिया है।

बढती जा रही शिकायतें

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर साइबर अपराधियों द्वारा सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर कर धमकी, ब्लैकमेल, जबरन वसूली और डिजिटल अरेस्ट जैसी वारदातों को अंजाम देने के संबंध में पीड़ितों की ओर से बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की साल 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में देशभर में साइबर अपराध के कुल 52,974 दर्ज किए गए थे जबकि साल 2022 में ये बढ़कर 65,893 मामले हो गए. इस तरह से साइबर अपराध के मामलों में एक साल के दौरान करीब 24 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

Rajnish Verma

Rajnish Verma

Content Writer

वर्तमान में न्यूज ट्रैक के साथ सफर जारी है। बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। मैने अपने पत्रकारिता सफर की शुरुआत इंडिया एलाइव मैगजीन के साथ की। इसके बाद अमृत प्रभात, कैनविज टाइम्स, श्री टाइम्स अखबार में कई साल अपनी सेवाएं दी। इसके बाद न्यूज टाइम्स वेब पोर्टल, पाक्षिक मैगजीन के साथ सफर जारी रहा। विद्या भारती प्रचार विभाग के लिए मीडिया कोआर्डीनेटर के रूप में लगभग तीन साल सेवाएं दीं। पत्रकारिता में लगभग 12 साल का अनुभव है। राजनीति, क्राइम, हेल्थ और समाज से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है।

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