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भारत पर टिकी 11 देशों की नजर! BRICS सम्मेलन की 'कूटनीति'... युद्ध में मौजूद दुश्मन देश भी आएंगे साथ
BRICS Meeting India Middle East Conflict: भारत की अध्यक्षता में होने वाली BRICS बैठक पर दुनिया की नजरें टिकी हैं। इस बैठक में शामिल कई देश आपसी संघर्ष में हैं।
BRICS Meeting India Middle East Conflict: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब उम्मीदों की एक नई किरण नजर आने लगी है। दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच चल रहे इस संघर्ष के बीच BRICS देशों की होने वाली अहम बैठक पर सबकी नजरें टिक गई हैं। खास बात यह है कि इस बार इस बैठक की कमान भारत के हाथ में है और इसमें ऐसे देश भी शामिल होंगे, जो इस समय एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह बैठक जंग को थामने का रास्ता बन सकती है?
भारत की अध्यक्षता में होगी अहम बैठक
14 और 15 मई को होने वाली BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ नए सदस्य देश जैसे ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और इथियोपिया भी शामिल होंगे। 2025 में इंडोनेशिया के जुड़ने के बाद यह समूह और मजबूत हो गया है।
करीब 3.9 अरब आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाला यह समूह दुनिया की लगभग आधी जनसंख्या की आवाज बन चुका है। ऐसे में इस मंच से लिया गया कोई भी फैसला वैश्विक राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।
एक ही मंच पर आमने-सामने देश
इस बैठक की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसमें ऐसे देश शामिल होंगे, जो इस समय सीधे रूप से संघर्ष में जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि इस बैठक को सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि अगर यहां कोई साझा सहमति बनती है, तो पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठ सकता है।
ईरान की भारत से खास अपील
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने भारत से अपील की है कि अध्यक्ष देश होने के नाते वह एक आधिकारिक बयान जारी करे, जिसमें उस पर हुए हमलों की निंदा की जाए। लेकिन यह मामला इतना आसान नहीं है, क्योंकि भारत के अमेरिका और इजरायल के साथ भी मजबूत संबंध हैं। यही वजह है कि भारत को संतुलन बनाकर चलना होगा, ताकि किसी भी पक्ष को नाराज किए बिना समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।
सहमति बनाना सबसे बड़ी चुनौती
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अलग-अलग विचारों वाले देशों को एक मंच पर लाकर साझा रुख तैयार किया जाए। विदेश मंत्रालय ने भी माना है कि BRICS के कुछ सदस्य देश इस संघर्ष में सीधे शामिल हैं, जिससे एकमत होना आसान नहीं है। फिर भी भारत लगातार कोशिश कर रहा है कि सभी देशों के बीच संवाद बना रहे और कोई सकारात्मक रास्ता निकल सके।


