Govt U-Turn: अब PNG होने पर भी नहीं छिनेगा LPG सिलेंडर, मिली बड़ी राहत

Govt U-Turn: अनिवार्य एलपीजी सरेंडर का नियम ठंडे बस्ते में। किराएदारों और मकान मालिकों को मिली बड़ी चॉइस, अब बैकअप के लिए रख सकेंगे सिलेंडर।

Ramkrishna Vajpei
Published on: 25 May 2026 7:20 PM IST
PNG and LPG
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PNG and LPG: कहते हैं कि लोकतंत्र में नीतियां जनता की सहूलियत के लिए बनती हैं, न कि उनके लिए सिरदर्द पैदा करने के लिए। केंद्र सरकार ने एक बड़ा और व्यावहारिक फैसला लेते हुए अपने उस सख्त आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया है, जिसने पिछले कुछ समय से देश के शहरी मध्यम वर्ग और मध्यमवर्गीय परिवारों की रातों की नींद उड़ा रखी थी।

अगर आपके घर में पीएनजी (PNG - पाइप वाली प्राकृतिक गैस) का कनेक्शन लग चुका है, तब भी आपको अपना पुराना एलपीजी (LPG) सिलेंडर सरेंडर करने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार ने 'वन साइज फिट्स ऑल' की अपनी जबरदस्ती वाली नीति को वापस लेते हुए उपभोक्ताओं को विकल्प चुनने की पूरी आजादी दे दी है।

छोटी-छोटी मगर मोटी बात: क्यों वापस लेने पड़े पैर?

दरअसल, मार्च 2026 में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आए एक आदेश के बाद देश भर की गैस सोसायटियों और रिहायशी इलाकों में हड़कंप मच गया था। नियम था कि जहां पीएनजी पहुंच गई, वहां 3 महीने में एलपीजी सरेंडर करना होगा। लेकिन जब यह नियम जमीन पर उतरा, तो कई व्यावहारिक विसंगतियां सामने आईं।

सबसे बड़ा संकट था किराएदार बनाम मकान मालिक का सिरदर्द। देश के महानगरों और बड़े शहरों में एक बड़ी आबादी किराए पर रहती है। मकान मालिक के नाम पर पीएनजी कनेक्शन होने की स्थिति में किराएदारों के बदलने पर बिलिंग और अकाउंट ट्रांसफर का बड़ा लोचा खड़ा हो रहा था।

दूसरे अचानक मेंटेनेंस का डर भी था। पीएनजी उपभोक्ताओं का सबसे बड़ा डर यह था कि अगर कभी मरम्मत या तकनीकी खराबी के कारण पाइपलाइन की सप्लाई रुकी, तो क्या घरों में चूल्हा जलना बंद हो जाएगा? जनता एक अदद 'बैकअप सिलेंडर' अपने पास रखना चाहती थी।

और ट्रांसफर का झंझट उनके लिए था जिन कर्मचारियों की नौकरियां ट्रांसफरेबल हैं, उनके लिए एलपीजी सिलेंडर को एक शहर से दूसरे शहर ले जाना बेहद आसान है, जबकि पीएनजी एक ही पते पर फिक्स रहती है।

प्रशासन ने समय रहते जनता की इस नब्ज को पहचाना और समझदारी दिखाते हुए कदम पीछे खींच लिए।

अब उपभोक्ताओं को क्या मिली आजादी?

इस यू-टर्न के बाद अब जमीन पर स्थिति पूरी तरह साफ और उपभोक्ताओं के पक्ष में है। सरकार की नो प्रेशर पॉलिसी के तहत कोई भी गैस एजेंसी या स्थानीय प्रशासन अब आप पर एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने का दबाव नहीं बना सकता। इसके अलावा बैकअप की छूट भी मिली। यानी आप कानूनी रूप से अपनी रसोई में पीएनजी के साथ-साथ एक एलपीजी सिलेंडर बैकअप के तौर पर रख सकते हैं। उपभोक्ता मनमर्जी का मालिक बना। आप जब चाहें, अपनी मर्जी और जेब के हिसाब से दोनों में से किसी भी ईंधन का इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र हैं।

इस फैसले से एक बात साफ है कि सरकार ने अपनी 'फर्निश्ड' फाइलों से बाहर निकलकर जमीन पर रेंगती हुई हकीकत को स्वीकार किया है। डिजिटल और ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ना देश की जरूरत है, लेकिन यह बदलाव जनता पर थोपकर नहीं, बल्कि उनका भरोसा जीतकर ही किया जा सकता है। फिलहाल, देश के करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए यह खबर किसी बड़ी राहत से कम नहीं है कि उनकी रसोई की कमान अब भी उनके अपने हाथ में है।

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Ramkrishna Vajpei

Ram Krishna Vajpei is a veteran cross-media journalist, political analyst, and data journalism expert whose distinguished career began in 1982. Spanning over four decades across print, broadcast (TV/Radio), and digital platforms, he specializes in rigorous research and deep analytical reporting on socio-political affairs. An authority on modern data journalism and the technical application of AI/LLMs in media, Vajpei also trains next-generation journalists and is currently pursuing a PhD in media studies. His work is defined by an absolute commitment to objectivity and a comprehensive editorial vision.

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