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सिरप से मौत या लापरवाही! मध्य प्रदेश से राजस्थान तक मासूमों की लाशों का जिम्मेदार कौन?
Cough Syrup Deaths: कई बच्चों की जानें जा चुकी हैं अब भी अगर सरकार जागी नहीं, तो अगली लाश किसी और के घर से उठेगी। क्या तब भी कहा जाएगा
Cough syrup deaths India: 22 दिन, 6 मासूम लाशें, 1 मौत राजस्थान में और सरकार रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। छिंदवाड़ा में जिन मासूम बच्चों की किडनी फेल होने से मौत हुई, उनके घरों से संदिग्ध कफ सिरप की बोतलें मिलीं। राजस्थान में भी एक बच्चे की मौत के बाद 19 बैच के कफ सिरप पर बैन लगा दिया गया। लेकिन मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल अब भी कहते हैं कि कफ सिरप की बात पूरी तरह निराधार है।
सवाल उठता है कि जब सिरप को जांच में भेजा गया है, तो मंत्री कैसे ‘निराधार’ कह सकते हैं? 4 सितंबर से 26 सितंबर के बीच 6 मासूमों की जान चली गई। सभी बच्चों को शुरुआती लक्षण सर्दी, खांसी और बुखार के थे। फिर अचानक किडनी फेल होने लगी। परासिया के सरकारी अस्पताल में बच्चों को भर्ती नहीं किया गया और उन्हें सीधे नागपुर शिफ्ट किया गया। अब सरकार कह रही है कि ये बीमारी नहीं है, लेकिन NCDC और IDSP जैसी राष्ट्रीय एजेंसियां जांच में जुटी हैं। क्या ये सिर्फ संयोग है?
जब तक रिपोर्ट आती है, तब तक कितनी और लाशें गिरेंगी?
जांच के नाम पर लीपा पोती और मंत्री की बयानबाजी कि स्थिति नियंत्रण में है, रिपोर्ट आने दीजिए, सिरप से मौत नहीं हुई। यह सब सुनते-सुनते 6 परिवार बर्बाद हो गए। राजस्थान सरकार ने एक बच्चे की मौत के बाद तुरंत सिरप के 19 बैच बैन किए। लेकिन मध्य प्रदेश में, जहां मौतें ज्यादा हुईं, अब तक सिरप बैन नहीं हुआ, सिर्फ ‘अस्थायी रोक’ की बात की जा रही है।
क्या बच्चों की जान इतनी सस्ती है?
डॉक्टरों ने कहा है कि संदिग्ध दवाओं के मिश्रण की आशंका है, सैंपल लिए गए हैं, जांच जारी है। लेकिन तब तक कड़ी कार्रवाई कहां है? क्यों नहीं इन सिरप ब्रांड्स के नाम सार्वजनिक किए गए? क्यों नहीं जिम्मेदार मेडिकल स्टोर और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर FIR दर्ज की गई?
लापरवाही या मिलीभगत?
मामला गंभीर है। बच्चों की मौत की वजह अगर दवा है तो ये सिर्फ मेडिकल गलती नहीं, हत्या के बराबर है। और अगर जांच के बावजूद सरकार सिरप ब्रांड्स का नाम छुपा रही है, तो सवाल सिर्फ डॉक्टरों पर नहीं, नीति-निर्माताओं और प्रशासनिक सिस्टम पर भी है।
मांग उठती है कि संदिग्ध सिरप ब्रांड्स के नाम सार्वजनिक किए जाएं, सभी कफ सिरप की तत्काल जांच हो और दोषी कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, मृत बच्चों के परिजनों को न्याय और मुआवजा दिया जाए और प्रदेश में OTC (ओवर-द-काउंटर) सिरप की बिक्री पर सख्ती लागू हो। साथ ही हेल्थ डिपार्टमेंट में बैठे अफसरों की जवाबदेही तय की जाए।
अब वक्त है कठोर कार्रवाई का, न कि खोखले बयानों का। बच्चों की जानें जा चुकी हैं अब भी अगर सरकार जागी नहीं, तो अगली लाश किसी और के घर से उठेगी। क्या तब भी कहा जाएगा ये निराधार है?
सिरप लेने से पहले बरतें सावधानी
सिरप पिलाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह ज़रूरी: कफ सिरप लेने से पहले डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है, खासकर जब कोई पुरानी बीमारी हो। आपकी सेहत और लक्षणों के आधार पर डॉक्टर आपको सही दवा और उसकी मात्रा बता सकते हैं।
दवा का लेबल ध्यान से पढ़ें: किसी भी कफ सिरप को लेने से पहले उसकी बोतल पर मौजूद जानकारी जरूर पढ़ें। इसमें दवा में मौजूद सक्रिय तत्व, कितनी मात्रा में लेना है (खुराक), और किन बातों से सावधान रहना है – ये सब लिखा होता है। अगर आपको किसी चीज से एलर्जी है या पहले से कोई दवा चल रही है, तो दुष्प्रभावों को नजरअंदाज न करें।
अल्कोहल युक्त सिरप से सावधानी: कुछ कफ सिरप में शराब (अल्कोहल) मिला होता है, जो कुछ लोगों के लिए नुकसानदेह हो सकता है – खासकर अगर आप पहले से कोई दूसरी दवा ले रहे हों या शराब से दूरी बनाए रखना चाहते हों। ऐसे मामलों में बिना अल्कोहल वाले विकल्प चुनना सुरक्षित होता है।
सही मात्रा में सिरप लें: हर वयस्क के लिए कफ सिरप की खुराक उम्र और कभी-कभी वजन के आधार पर तय होती है। ज़रूरत से ज़्यादा या कम दवा लेना सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा या बोतल पर दिए निर्देशों के अनुसार ही सिरप लें।
मापने वाले उपकरण का इस्तेमाल करें: कफ सिरप के साथ अक्सर एक मापने वाला कप या चम्मच दिया जाता है। दवा की सही मात्रा लेने के लिए इसी उपकरण का उपयोग करें। अंदाज़े से दवा लेना खतरनाक हो सकता है।
भूलने पर दोगुनी खुराक न लें: अगर आप किसी दिन सिरप लेना भूल जाएं, तो अगली बार दोगुनी मात्रा न लें। ऐसा करना आपके शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकता है। खुराक से जुड़ी सावधानियाँ हमेशा लेबल पर दी गई होती हैं, उनका पालन करें।


