TMC Crisis: संदीपन और ऋतब्रत की जोड़ी ने किया ‘महा-खेला’! हाथ से निकली दीदी की पार्टी

TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस ;टीएमसीद्ध के भीतर उठे असंतोष और संभावित बगावत की चर्चा जोरों पर है।

Shishumanjali kharwar
Published on: 3 Jun 2026 1:06 PM IST
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TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस के भीतर उठे असंतोष और संभावित बगावत की चर्चा जोरों पर है। इस बड़े राजनीतिक हलचल के केंद्र में दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा। दोनों नेता हाल ही में टीएमसी के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने थे, लेकिन चुनाव के बाद पार्टी नेतृत्व, विशेषकर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलने के कारण उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया गया।

हालांकि, अब यह फैसला टीएमसी नेतृत्व के लिए नई चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि टीएमसी के बड़ी संख्या में विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के संपर्क में हैं। दावा यह भी किया जा रहा है कि पार्टी के कई विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र देकर ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने की मांग की है। इन घटनाक्रमों ने टीएमसी के भीतर बढ़ती गुटबाजी और संभावित राजनीतिक संकट को लेकर अटकलों को तेज कर दिया है।

कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी?

ऋतब्रत बनर्जी का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। कोलकाता के आशुतोष कॉलेज और कलकत्ता विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले ऋतब्रत ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वामपंथी छात्र संगठन एसएफआई से की थी। वे कई वर्षों तक संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर रहे और युवा वामपंथी नेता के रूप में पहचान बनाई। 2014 में उन्हें राज्यसभा भेजा गया, लेकिन बाद में पार्टी नेतृत्व से मतभेद और विवादों के चलते उनका वामपंथी दल से संबंध समाप्त हो गया।

इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा और पार्टी में तेजी से अपनी जगह बनाई। उन्हें पार्टी के ट्रेड यूनियन विंग में अहम जिम्मेदारियां मिलीं और बाद में राज्यसभा सदस्य भी बनाया गया। हालिया विधानसभा चुनाव में वे विधायक चुने गए, लेकिन चुनाव के तुरंत बाद पार्टी नेतृत्व से उनके संबंध बिगड़ गए। इसके बाद उन्हें टीएमसी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

कौन हैं संदीपन साहा?

संदीपन साहा का राजनीतिक सफर अपेक्षाकृत शांत लेकिन प्रभावशाली रहा है। वे एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से आते हैं और पूर्व विधायक स्वर्ण कमल साहा के पुत्र हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने व्यवसाय और कॉरपोरेट क्षेत्र में भी काम किया। बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और कोलकाता नगर निगम से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की।

विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद संदीपन साहा ने भी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ असहमति जताई और ऋतब्रत बनर्जी के साथ खड़े नजर आए। इसके बाद टीएमसी ने उन्हें भी निष्कासित कर दिया। अब दोनों नेताओं की गतिविधियों पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं। यदि पार्टी के भीतर असंतोष और बढ़ता है, टीएमसी के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

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Shishumanjali kharwar

मीडिया क्षेत्र में 12 साल से ज्यादा कार्य करने का अनुभव। इस दौरान विभिन्न अखबारों में उप संपादक और एक न्यूज पोर्टल में कंटेंट राइटर के पद पर कार्य किया। वर्तमान में प्रतिष्ठित न्यूज पोर्टल ‘न्यूजट्रैक’ में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं।

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