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आम खाने के शौकीन हो जाएं सतर्क! जल्दी पकाने वाले रसायन बिगाड़ सकते हैं आपका नर्वस सिस्टम
Artificially Ripened Mangoes: रसायनों की मदद से जल्दी पकाए गए आम स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक हो सकते हैं। व्यापारी फलों को तेजी से पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे रसायनों का इस्तेमाल करते हैं, जो कि सुरक्षित नहीं माने जाते।
Artificially Ripened Mangoes: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए केमिकल से पकाए जा रहे आमों का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई के बाद शहर में फलों की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ व्यापारी कृत्रिम तरीके से आमों को पकाकर बाजार में बेच रहे हैं। इसके बाद पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने शहर के एक गोदाम पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में ऐसे आम बरामद किए गए, जिन्हें कैल्शियम कार्बाइड जैसे खतरनाक रसायनों की मदद से जल्दी पकाया जा रहा था।
जांच में सामने आया कि इन आमों को प्राकृतिक तरीके से पकने देने के बजाय रसायनों का उपयोग कर तेजी से तैयार किया जा रहा था, ताकि उन्हें जल्द बाजार में उतारकर अधिक मुनाफा कमाया जा सके। छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने कई बोरे आम और रसायन जब्त किए हैं। साथ ही, इस अवैध गतिविधि में शामिल कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में संबंधित कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक
रसायनों की मदद से जल्दी पकाए गए आम स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक हो सकते हैं। आमतौर पर कुछ व्यापारी फलों को तेजी से पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे रसायनों का इस्तेमाल करते हैं, जो कि सुरक्षित नहीं माने जाते। यह रसायन नमी के संपर्क में आकर ऐसी गैसें छोड़ता है, जो फल को तो जल्दी पका देती हैं, लेकिन उसमें प्राकृतिक गुणों को नुकसान पहुंचाती हैं।
ऐसे आम खाने से तुरंत स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी, पेट दर्द और गले में जलन। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों पर इसका असर ज्यादा खतरनाक हो सकता है। लंबे समय तक ऐसे फलों का सेवन करने से नर्वस सिस्टम पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
आम खरीदते समय सावधानी बरतें
उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे आम खरीदते समय सावधानी बरतें। बहुत ज्यादा चमकीले, एक जैसे रंग वाले या जल्दी खराब होने वाले आमों से बचें। आम को खाने से पहले अच्छी तरह धोना भी जरूरी है, ताकि सतह पर मौजूद रसायनों का असर कम किया जा सके।
प्राकृतिक रूप से पके आमों में पोषक
प्राकृतिक रूप से पके आमों में पोषक तत्व जैसे विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं, लेकिन रसायनों से पके आमों में इनकी गुणवत्ता कम हो जाती है। इससे शरीर को मिलने वाले पोषण में भी कमी आ जाती है।
पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव डालते हैं
रसायनों की मदद से जल्दी पकाए गए आम केवल मानव स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। आमतौर पर इसके लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे रसायनों का उपयोग किया जाता है, जिससे जहरीली गैसें निकलती हैं। ये गैसें हवा में मिलकर वायु प्रदूषण को बढ़ाती हैं और आसपास के वातावरण की गुणवत्ता को खराब करती हैं।
इन रसायनों के उपयोग के बाद बचा हुआ अपशिष्ट अक्सर सही तरीके से नष्ट नहीं किया जाता, जिससे यह मिट्टी और जल स्रोतों में मिल सकता है। इससे मिट्टी की उर्वरता कम हो सकती है और पानी दूषित हो सकता है, जो कृषि और जीव-जंतुओं दोनों के लिए हानिकारक है।
किन-किन राज्यों में है यह समस्या?
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना: यहाँ बैंगनपल्ली में बेनिशान आम का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। सीजन की शुरुआत में यहाँ के कुछ बाजारों में आमों को जल्दी पकाने के लिए रसायनों का इस्तेमाल अक्सर खबरों में रहता है।
महाराष्ट्र: विश्व प्रसिद्ध हापुस में अलफांसो के लिए मशहूर रत्नागिरी और देवगढ़ क्षेत्रों में मांग इतनी अधिक होती है कि कुछ व्यापारी सीजन से पहले ऊंचे दामों पर बेचने के लिए रसायनों का सहारा लेते हैं।
उत्तर प्रदेश: लखनऊ (मलिहाबाद) का 'दशहरी' आम जून में आता है। लेकिन मई के अंत में ही बाजार में पीला आम दिखने लगता है, जो अक्सर रसायनों की मदद से पकाया गया होता है।
गुजरात: केसर आम के पकने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए यहाँ के जूनागढ़ और गिर क्षेत्रों के कुछ थोक केंद्रों में ऐसी शिकायतें आती हैं।
कर्नाटक और तमिलनाडु: यहाँ 'तोतापुरी' और 'नीलम' आमों के मामले में रसायनों का उपयोग देखा गया है।
क्या यहीं आम विदेशों में भी भेजें जाते हैं?
रसायनों की मदद से जल्दी पकाए गए आमों का निर्यात विदेशों में करना कानूनी और स्वास्थ्य दोनों दृष्टियों से एक गंभीर मुद्दा है। सामान्यतः विदेशों में फलों के निर्यात के लिए सख्त गुणवत्ता मानक और खाद्य सुरक्षा नियम होते हैं। इसलिए प्राकृतिक रूप से पके और प्रमाणित आम ही अधिकतर देशों को भेजे जाते हैं।
हालांकि, कुछ मामलों में यह आशंका रहती है कि कुछ व्यापारी जल्दी मुनाफा कमाने के लिए रसायनों से पकाए गए आमों को बाजार में उतारने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे फल यदि जांच में पकड़े जाते हैं, तो उन्हें निर्यात से रोक दिया जाता है और संबंधित खेप को वापस भी किया जा सकता है।
भारत जैसे देशों से आमों का बड़ा हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और यूरोप के कई देशों में भेजा जाता है। इन देशों में खाद्य सुरक्षा एजेंसियां बहुत सख्त जांच करती हैं, जिसमें रासायनिक अवशेषों की जांच भी शामिल होती है।


