NEET Exam Mafia Inside Story: कैसे काम करता है 'एग्जाम माफिया'? स्ट्रॉन्ग रूम से सेफ हाउस तक...पूरी इनसाइड स्टोरी

NEET Exam Mafia Inside Story: कैसे काम करता है देश का ‘एग्जाम माफिया’? स्ट्रॉन्ग रूम से पेपर लीक, सेफ हाउस में रातभर रटाई और करोड़ों के सौदे तक... जानिए NEET 2026 पेपर लीक कांड की पूरी इनसाइड स्टोरी और सॉल्वर गैंग का खतरनाक नेटवर्क।

Snigdha Singh
Published on: 14 May 2026 12:20 PM IST
NEET Exam Mafia Inside Story: कैसे काम करता है एग्जाम माफिया? स्ट्रॉन्ग रूम से सेफ हाउस तक...पूरी इनसाइड स्टोरी
X

NEET Exam Mafia Inside Story: देश के लाखों मेडिकल छात्र जब अपनी आंखों में डॉक्टर बनने का सपना लिए रात-दिन एक कर रहे होते हैं, ठीक उसी वक्त अंधेरे कमरों में बैठकर कुछ 'सॉल्वर गैंग' उनके भविष्य का सौदा कर रहे होते हैं। हाल ही में NEET-UG 2026 परीक्षा के रद्द होने और नालंदा के पावापुरी से लेकर राजस्थान के सीकर तक फैले पेपर लीक के तार ने एक बार फिर पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये 'सॉल्वर गैंग' आखिर काम कैसे करते हैं? कैसे ये अभेद्य सुरक्षा चक्र को तोड़कर प्रश्नपत्र बाहर ले आते हैं? आइए, इस 'एग्जाम माफिया' के काले साम्राज्य की परतों को विस्तार से समझते हैं।

1. नेटवर्क का बिछाना: मास्टरमाइंड और दलाल

सॉल्वर गैंग का ढांचा किसी कॉर्पोरेट कंपनी की तरह होता है। सबसे ऊपर होता है 'मास्टरमाइंड', जैसे हाल के मामलों में संजीव मुखिया, रवि अत्री या उज्ज्वल उर्फ राजा बाबू का नाम सामने आया है। ये मास्टरमाइंड खुद अक्सर पढ़े-लिखे (MBBS ड्रॉपआउट या कोचिंग संचालक) होते हैं, जिन्हें सिस्टम की खामियों का पता होता है। इनके नीचे 'दलालों' (Middlemen) की एक पूरी फौज होती है, जो बड़े कोचिंग सेंटरों या पीजी हॉस्टलों के बाहर सक्रिय रहती है। इनका काम उन संपन्न परिवारों के बच्चों को ढूंढना होता है, जो डॉक्टर बनने के लिए 30 से 50 लाख रुपये तक देने को तैयार हों।

2. प्रश्नपत्र हासिल करने के तीन 'खतरनाक' तरीके

गैंग प्रश्नपत्र हासिल करने के लिए तीन मुख्य रास्तों का इस्तेमाल करता है:

स्ट्रांग रूम में सेंध: 2024 के हजारीबाग कांड में सामने आया था कि गिरोह के सदस्य स्कूलों या बैंकों के 'स्ट्रांग रूम' में पहुंच जाते हैं। वहां रखे बॉक्स के सील के साथ छेड़छाड़ कर पेपर की फोटो खींची जाती है और उसे दोबारा बड़ी सफाई से बंद कर दिया जाता है।

डिजिटल सर्कुलेशन (गैस पेपर): 2026 के मामले में 'गैस पेपर' की थ्योरी सामने आई है। गिरोह टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर 400-500 सवालों का एक सेट वायरल करता है, जिसमें से 100 से अधिक सवाल असली पेपर से हूबहू मिल जाते हैं।

प्रिंटिंग प्रेस कनेक्शन: कुछ बड़े गिरोह सीधे उन प्रेस तक अपनी पहुंच बना लेते हैं जहां पेपर छपता है, हालांकि यह बेहद मुश्किल और दुर्लभ होता है।

3. 'मुन्ना भाई' और 'सॉल्वर' की भूमिका

जब पेपर हाथ लग जाता है, तो असली खेल शुरू होता है। गैंग के पास दो विकल्प होते हैं:

प्रॉक्सी कैंडिडेट (Munna Bhai): इसमें छात्र की जगह कोई दूसरा 'मेधावी' छात्र (अक्सर मेडिकल कॉलेज के सीनियर छात्र) परीक्षा देने बैठता है। इसके लिए फोटो एडिटिंग और फर्जी आईडी कार्ड का सहारा लिया जाता है। हाल ही में नालंदा पुलिस ने ऐसे ही एक एमबीबीएस छात्र अवधेश को गिरफ्तार किया है।

रात भर की रटाई (Safe House): अभ्यर्थियों को परीक्षा से एक दिन पहले किसी गुप्त स्थान (Safe House) पर ले जाया जाता है। वहां उन्हें मोबाइल फोन जमा करने होते हैं और रात भर लीक हुए पेपर के उत्तर रटवाए जाते हैं। परीक्षा के तुरंत बाद इन छात्रों को वहां से हटा दिया जाता है।

4. तकनीक का हाई-टेक इस्तेमाल

आज के दौर में ये गिरोह बेहद आधुनिक हो गए हैं। बायोमेट्रिक पहचान को चकमा देने के लिए वे 'स्किन फिल्म' (दूसरे की उंगलियों के निशान) का इस्तेमाल करते हैं। कानों में इतने छोटे ब्लूटूथ डिवाइस लगाए जाते हैं जो बाहर से दिखाई नहीं देते। इसके अलावा, डार्क वेब का इस्तेमाल कर पेमेंट क्रिप्टो करेंसी या नकद में ली जाती है ताकि पुलिस 'मनी ट्रेल' (पैसों का पीछा) न कर सके।

5. करोड़ों का 'काला' मुनाफा और सिंडिकेट

NEET जैसे बड़े इम्तिहान में एक सीट का सौदा 30 से 60 लाख रुपये के बीच होता है। अगर एक गिरोह 100 छात्रों को भी टारगेट करता है, तो उनका टर्नओवर 50 करोड़ रुपये के पार चला जाता है। इसी पैसे का इस्तेमाल सिस्टम के भ्रष्ट अधिकारियों और छोटे कर्मचारियों को खरीदने में किया जाता है।

जांच एजेंसियां जैसे CBI और राजस्थान SOG की रिपोर्ट बताती है कि जब तक सजा सख्त नहीं होगी और तकनीक और भी अभेद्य नहीं बनाई जाएगी, ये 'सॉल्वर गैंग' इसी तरह सक्रिय रहेंगे।

(स्त्रोत: राजस्थान पुलिस SOG जांच रिपोर्ट 2026, बिहार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) प्रेस रिलीज)

Snigdha Singh
ABOUT THE AUTHOR

Snigdha Singh

Hi! I am Snigdha Singh, Leadership role in Newstrack. Leading the editorial desk team with ideation and news selection and also contributes with special articles and features as well. I started my journey in journalism in 2017 and has worked with leading publications such as Jagran, Hindustan and Rajasthan Patrika and served in Kanpur, Lucknow, Noida and Delhi during my journalistic pursuits.

Next Story