Rajasthan News: सरकारी योजनाओं और तकनीकी नवाचार से बदल रही राजस्थान की खेती

Rajasthan News: मुख्य सचिव ने श्रीगंगानगर में स्थापित गाजर मंडी को किसानों की आय बढ़ाने का एक सफल मॉडल बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयोग प्रदेशभर में अपनाए जाने चाहिए।

Admin 2
Published on: 31 Dec 2025 7:09 PM IST
Rajasthan Agriculture Modern Farming Boosts Farmers Income
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Rajasthan Agriculture Modern Farming Boosts Farmers Income 

Rajasthan News: राजस्थान में खेती और पशुपालन दोनों ही क्षेत्रों में बड़े बदलाव की तस्वीर उभरकर सामने आ रही है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, आधुनिक तकनीक, शोध आधारित कृषि और सशक्त पशु-स्वास्थ्य कार्यक्रमों के चलते किसानों और पशुपालकों की आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यह संकेत न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ होने का प्रमाण हैं, बल्कि आत्मनिर्भर राजस्थान की दिशा में बढ़ते ठोस कदम भी हैं।

राज्य के मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने जयपुर स्थित राज्य कृषि अनुसंधान संस्थान (आरएआरआई), दुर्गापुरा के भ्रमण के दौरान कहा कि प्रदेश के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नवाचार, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान को तेजी से अपना रहे हैं। इससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है और कृषि नीतियां जमीन पर सफल होती दिखाई दे रही हैं। उन्होंने रारी परिसर, कृषि फील्ड और श्याम दुर्गापुरा क्षेत्र का दौरा कर कृषि क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक परिवर्तनों की सराहना की।

मुख्य सचिव ने श्रीगंगानगर में स्थापित गाजर मंडी को किसानों की आय बढ़ाने का एक सफल मॉडल बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयोग प्रदेशभर में अपनाए जाने चाहिए। श्याम ऑडिटोरियम में आयोजित संवाद कार्यक्रम में उन्होंने विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों और कृषि अधिकारियों से सीधा संवाद किया, उनकी सफलता की कहानियां सुनीं और जमीनी चुनौतियों के समाधान का भरोसा दिलाया।

उन्होंने किसानों से आगामी ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट-2026 में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। तीन दिवसीय इस आयोजन में 50 हजार से अधिक किसानों के शामिल होने की संभावना है। इसका उद्देश्य स्मार्ट फार्मिंग, आधुनिक तकनीकों, निवेश और कृषि निर्यात को बढ़ावा देना है, जिससे राजस्थान देश के अग्रणी कृषि निर्यातक राज्यों में शामिल हो सके।

किसानों की क्षमता बढ़ाने के लिए विदेश भ्रमण को भी अहम बताते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार के नॉलेज एन्हांसमेंट प्रोग्राम के तहत एक दल पहले ही विदेश जाकर उन्नत कृषि तकनीकों का अध्ययन कर चुका है और शीघ्र ही दूसरा दल भी भेजा जाएगा। उन्होंने सरसों, जैविक खेती, जीरा, पानमेथी, ईसबगोल, अनार, सीताफल, आंवला, लहसुन, गाजर, शिमला मिर्च, गुलाब, औषधीय पौधों और मधुमक्खी पालन जैसे विषयों पर किसानों से विस्तार से चर्चा की।

आरएआरआई के निरीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने खरीफ और रबी फसलों से जुड़े अनुसंधान, जलवायु परिवर्तन के अनुरूप विकसित किस्मों, उन्नत फसल प्रबंधन, समेकित कीट प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य और जल उपयोग दक्षता से जुड़ी तकनीकों की जानकारी दी। मुख्य सचिव ने कृषि अनुसंधान को अधिक व्यवहारिक और किसान-केंद्रित बनाने, अनुसंधान परिणामों को शीघ्र किसानों तक पहुंचाने और गुणवत्तापूर्ण बीजों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इसी क्रम में पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में भी राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पशुपालन विभाग द्वारा शूकरों में होने वाले घातक संक्रामक रोग क्लासिकल स्वाइन फीवर (सीएसएफ) की रोकथाम के लिए राज्यव्यापी निःशुल्क टीकाकरण अभियान का तीसरे राउंड का दूसरा चरण एक जनवरी से एक फरवरी तक चलाया जाएगा। यह अभियान राज्य के सभी जिलों में संचालित किया जाएगा।

निदेशक पशुपालन डॉ. सुरेशचंद मीना ने बताया कि क्लासिकल स्वाइन फीवर एक अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है, जिससे शूकरों में मृत्यु दर बहुत अधिक होती है और पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। समय पर टीकाकरण ही इस रोग से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने सभी सुअर पालकों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय सहभागिता करें और अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण कराएं।

इस अभियान के तहत सभी जिलों में शूकरों का निःशुल्क टीकाकरण किया जाएगा। इसका उद्देश्य पशुधन की सुरक्षा, रोग प्रसार की रोकथाम और आर्थिक क्षति को कम करना है। क्लासिकल स्वाइन फीवर के लक्षणों में तेज बुखार, कमजोरी, भूख न लगना, रक्तस्राव के कारण कान, गर्दन और पेट पर नीले या चाकलेटी धब्बे, दस्त और अंततः मृत्यु तक शामिल है।

कुल मिलाकर, राजस्थान में खेती और पशुपालन दोनों क्षेत्रों में सरकार की नीतियां, वैज्ञानिक शोध, तकनीकी नवाचार और स्वास्थ्य अभियानों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। यह बदलाव केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि किसानों और पशुपालकों को सुरक्षित, टिकाऊ और सम्मानजनक जीवन की ओर ले जाने वाला संकेत भी है।

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