Rajasthan News: गैर-कृषि श्रेणी में जयपुर डिस्कॉम बना प्रदेश का पहला डिफेक्टिव मीटर-मुक्त वितरण निगम

Rajasthan News: जयपुर डिस्कॉम ने इस वर्षों पुरानी समस्या को मिशन मोड में लेते हुए एक वर्ष के भीतर निर्णायक परिणाम हासिल किया।

Admin 2
Published on: 31 Dec 2025 6:52 PM IST
Rajasthan News Jaipur Discom Replaces All Defective Meters
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जयपुर, 31 दिसम्बर। जयपुर विद्युत वितरण निगम (जयपुर डिस्कॉम) ने बिजली वितरण व्यवस्था में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। योजनाबद्ध और समन्वित प्रयासों के जरिए जयपुर डिस्कॉम गैर-कृषि श्रेणी में प्रदेश का पहला ऐसा वितरण निगम बन गया है, जहां सभी घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के डिफेक्टिव मीटर पूरी तरह बदल दिए गए हैं। अब शत-प्रतिशत गैर-कृषि उपभोक्ताओं को वास्तविक उपभोग के आधार पर बिजली बिल जारी किए जा रहे हैं।

जयपुर डिस्कॉम के इतिहास में पहली बार निगम के सभी 18 सर्किलों में शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों के सिंगल फेज और थ्री फेज (गैर-कृषि) उपभोक्ताओं के खराब मीटर हटाकर कार्यशील मीटर लगाए गए हैं। बीते दो वर्षों में कुल 2 लाख 78 हजार 422 डिफेक्टिव मीटर बदले गए। अब केवल थ्री फेज कृषि श्रेणी में 13 हजार 493 मीटर शेष हैं, जिन्हें भी शीघ्र बदलने की प्रक्रिया जारी है।

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने इस उपलब्धि पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से जयपुर डिस्कॉम के अभियंताओं और कार्मिकों को बधाई देते हुए इसे उपभोक्ता-हित और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम बताया।

अब उपभोग के आधार पर मिलेगा बिजली बिल

डिफेक्टिव मीटरों के स्थान पर कार्यशील मीटर लगाए जाने से उपभोक्ताओं को अब वास्तविक खपत के अनुसार बिजली बिल मिलेंगे। इससे बिलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और त्रुटिपूर्ण बिलिंग से जुड़ी शिकायतों में उल्लेखनीय कमी आएगी। पहले मीटर खराब होने की स्थिति में औसत खपत के आधार पर बिल जारी किए जाते थे, जिससे उपभोक्ताओं में असंतोष और निगम को राजस्व हानि का सामना करना पड़ता था।

राजस्व हानि में बड़ी कमी

डिफेक्टिव मीटरों के कारण औसत बिलिंग पर निर्भरता बढ़ जाती थी। नियमानुसार दो माह से अधिक समय तक मीटर खराब रहने पर उपभोक्ताओं को विद्युत शुल्क में 5 प्रतिशत की छूट देनी पड़ती थी। इसके चलते जयपुर डिस्कॉम को वित्तीय वर्ष 2022-23 में 9 करोड़ 41 लाख रुपये और 2023-24 में 5 करोड़ 41 लाख रुपये का आर्थिक भार उठाना पड़ा। वर्ष 2024-25 में यह राशि घटकर 2 करोड़ 4 लाख रुपये रह गई, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में इसे मात्र 16 लाख रुपये तक सीमित कर दिया गया है। आगामी महीनों में इसे शून्य पर लाने का लक्ष्य रखा गया है।

वितरण हानि का सटीक आकलन होगा संभव

एवरेज बिलिंग के कारण सब-डिवीजन या फीडर स्तर पर वितरण हानि का सही आकलन करना कठिन होता था। अब सभी गैर-कृषि उपभोक्ताओं के पास कार्यशील मीटर होने से वितरण प्रणाली की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन संभव होगा। विद्युत नियामक आयोग भी लंबे समय से डिफेक्टिव मीटरों की समस्या को दूर करने पर जोर देता रहा है।

टीम जयपुर डिस्कॉम की मेहनत का नतीजा

जयपुर डिस्कॉम ने इस वर्षों पुरानी समस्या को मिशन मोड में लेते हुए एक वर्ष के भीतर निर्णायक परिणाम हासिल किया। अभियंताओं, तकनीकी और फील्ड स्टाफ ने कड़ी मेहनत, अनुशासन और प्रतिबद्धता के साथ इस लक्ष्य को पूरा किया। ओएंडएम से जुड़े अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता, सहायक राजस्व अधिकारी, फीडर इंचार्ज, मीटर रीडर और फील्ड स्टाफ की संयुक्त मेहनत से यह सफलता संभव हुई।

छह माह में सर्किल-दर-सर्किल मिली सफलता

जून 2025 में जयपुर जिला वृत्त उत्तर, दौसा और झालावाड़ सर्किल डिफेक्टिव मीटर-मुक्त हुए।

जुलाई 2025 में कोटा, बूंदी और बारां सर्किलों के साथ पूरा कोटा जोन तथा जयपुर नगर उत्तर और दक्षिण वृत्त इस समस्या से मुक्त हुए।

नवम्बर 2025 में भरतपुर, भिवाड़ी, सवाई माधोपुर, करौली और कोटपूतली सर्किल डिफेक्टिव मीटर-मुक्त घोषित हुए।

दिसम्बर 2025 में धौलपुर, जयपुर जिला वृत्त दक्षिण, अलवर, टोंक और डीग सर्किल भी इस श्रेणी में शामिल हो गए।

इस उपलब्धि के साथ जयपुर डिस्कॉम ने न केवल उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है, बल्कि बिजली वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता, भरोसे और वित्तीय अनुशासन की नई मिसाल भी कायम की है।

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