Rajasthan News: सौर शक्ति से सशक्त होता राजस्थान, नववर्ष में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई उड़ान

Rajasthan News: राज्य में सौर ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह आमजन के जीवन, किसानों की खेती और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है।

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Published on: 31 Dec 2025 6:47 PM IST
Rajasthan solar energy 2025
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 Rajasthan solar energy 2025

Rajasthan News: जयपुर। नववर्ष 2025 राजस्थान के लिए उम्मीदों और संभावनाओं का नया सूरज लेकर आया है। भौगोलिक विषमताओं और मौसम की चुनौतियों के बीच अब राजस्थान सूर्य की शक्ति को विकास का आधार बनाकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के त्वरित, दूरदर्शी और निर्णायक नेतृत्व में प्रदेश आज सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन चुका है और वैश्विक स्तर पर भी एक सोलर हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

राज्य में सौर ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह आमजन के जीवन, किसानों की खेती और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है। घर-घर सोलर पैनल लग रहे हैं, खेतों में सौर ऊर्जा से सिंचाई हो रही है और कोयले पर निर्भरता घटने से पर्यावरणीय संतुलन भी सुदृढ़ हो रहा है।

ऊर्जा संकट से ऊर्जा सरप्लस की ओर

कुछ वर्ष पहले तक राजस्थान को कोयले की कमी और बिजली संकट का सामना करना पड़ता था। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश को वर्ष में लगभग 320 दिन मिलने वाली सूर्य की प्रचुर रोशनी को अवसर में बदलते हुए नवीकरणीय ऊर्जा को प्राथमिकता दी। सौर ऊर्जा से जुड़े नीतिगत फैसलों को तेज़ी से लागू किया गया, निवेश की बाधाओं को दूर किया गया और भूमि आवंटन व स्वीकृतियों की प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया। इसका परिणाम यह रहा कि परियोजनाएं समय पर पूरी होने लगीं और महज़ दो वर्षों में प्रदेश की सौर ऊर्जा क्षमता दोगुनी हो गई।

दो वर्षों में 18 हजार मेगावाट की ऐतिहासिक बढ़ोतरी

राजस्थान की भौगोलिक स्थिति उसे सौर ऊर्जा के लिए सबसे अनुकूल बनाती है। वर्तमान में प्रदेश की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 35,910 मेगावाट से अधिक हो चुकी है, जो देश की कुल सौर क्षमता का लगभग 27 प्रतिशत है। बीते दो वर्षों में ही 18 हजार मेगावाट से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। देश में भूमि आधारित सौर ऊर्जा की कुल 1 लाख मेगावाट क्षमता में से लगभग 31 हजार मेगावाट अकेले राजस्थान से है। यह उपलब्धि प्रदेश को भारत के सोलर हब के रूप में स्थापित करती है।

पीएम कुसुम और पीएम सूर्यघर योजनाओं में राजस्थान की मजबूत उपस्थिति

विकेन्द्रीकृत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी राजस्थान ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत प्रदेश की स्थापित क्षमता दो वर्षों में 122 मेगावाट से बढ़कर 2,629 मेगावाट हो गई है। कुसुम योजना के कम्पोनेंट-ए और कम्पोनेंट-सी के तहत गांव-ढाणियों में 1,201 से अधिक लघु सौर परियोजनाएं स्थापित हो चुकी हैं। इनमें कम्पोनेंट-ए में राजस्थान देश में प्रथम और कम्पोनेंट-सी में तृतीय स्थान पर है।

किसानों को दिन में बिजली, खेती को नई ताकत

मुख्यमंत्री के वर्ष 2027 तक किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने के संकल्प की दिशा में ठोस प्रगति हुई है। वर्तमान में प्रदेश के 22 जिलों में किसानों को दिन में बिजली मिल रही है। पीएम कुसुम योजना के सभी घटकों से 2 लाख 83 हजार से अधिक किसानों को लाभ पहुंच रहा है। बीते दो वर्षों में कम्पोनेंट-बी के अंतर्गत 58 हजार से अधिक सोलर पंप सेट लगाए गए हैं, जिससे डीजल पंपों पर निर्भरता घटी है और खेती की लागत में कमी आई है।

घर की छत से बिजली, जेब में बचत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पीएम सूर्यघर योजना के तहत राजस्थान देश में पांचवें स्थान पर है। अब तक 1 लाख 20 हजार से अधिक घरों में 481 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाए जा चुके हैं। विभिन्न योजनाओं के तहत प्रदेश में कुल 1,948 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। पीएम सूर्यघर योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं को 824 करोड़ रुपये से अधिक की केंद्रीय सब्सिडी वितरित की जा चुकी है।

150 यूनिट निःशुल्क बिजली योजना से बढ़ेगा लाभ

घरेलू उपभोक्ताओं की बचत को और बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने 150 यूनिट निःशुल्क बिजली योजना शुरू की है। अक्टूबर से अब तक 2 लाख 69 हजार से अधिक उपभोक्ता इस योजना से जुड़ चुके हैं। योजना के तहत पात्र उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर लगाने पर 17 हजार रुपये की राज्य सब्सिडी दी जा रही है, जो पीएम सूर्यघर योजना की केंद्रीय सहायता के अतिरिक्त है।

पीक ऑवर्स की मांग पूरी करने की तैयारी

प्रदेश में पीक ऑवर्स के दौरान बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में अधिकतम मांग 19,165 मेगावाट रही है, जो 2030 तक 25,048 मेगावाट होने का अनुमान है। इसे देखते हुए राज्य में बैटरी एनर्जी स्टोरेज क्षमता का विस्तार किया जा रहा है। बीकानेर के पूगल में 6,400 मेगावाट ऑवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजना और 2,450 मेगावाट क्षमता का देश का सबसे बड़ा सोलर पार्क विकसित किया जा रहा है। ये परियोजनाएं नवंबर 2027 तक पूरी होने की संभावना है।

नेट जीरो की दिशा में मजबूत कदम

स्वच्छ ऊर्जा नीति-2024 के तहत राजस्थान ने वर्ष 2030 तक 115 गीगावाट अक्षय ऊर्जा और 10 गीगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य तय किया है। सौर ऊर्जा के व्यापक उपयोग से न केवल महंगी बिजली खरीद से राहत मिलेगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा।

नववर्ष के साथ राजस्थान एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां सूर्य केवल प्रकाश का स्रोत नहीं, बल्कि समृद्धि, आत्मनिर्भरता और सतत विकास का प्रतीक बन चुका है।

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