क्या बिखर जाएगी TMC, 50 विधायक छोड़ेंगे साथ? इस बड़े नेता के दावे से बढ़ी हलचल

Trinamool Congress Split: पश्चिम बंगाल में TMC से निलंबित राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजू दत्ता ने दावा किया कि करीब 50 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग होने और पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा ठोकने की तैयारी कर रहे हैं।

Aditya Kumar Verma
Published on: 2 Jun 2026 8:26 PM IST
Trinamool Congress Split
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Trinamool Congress Split: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस को लेकर बड़ी चर्चाएं चल रही हैं। पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी, विधायकों की कथित गुप्त बैठकों और बगावत की खबरों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। सवाल यह उठने लगा है कि क्या ममता बनर्जी अपनी ही बनाई पार्टी पर नियंत्रण बनाए रख पाएंगी या फिर तृणमूल कांग्रेस किसी बड़े आंतरिक संकट की ओर बढ़ रही है।

इन चर्चाओं को और हवा तब मिली जब पार्टी से निलंबित राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजू दत्ता ने दावा किया कि करीब 50 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग होने और पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा ठोकने की तैयारी कर रहे हैं।

50 विधायकों के दावे से बढ़ी सियासी चर्चा

रिजू दत्ता ने कहा है कि, तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक ऐसा समूह तैयार हो रहा है जो खुद को असली तृणमूल कांग्रेस मानता है। उनके अनुसार पार्टी के कई विधायक निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में देखना चाहते थे और उसी को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता गया।

उन्होंने दावा किया है कि, लगभग 50 विधायक पार्टी को तोड़ने की कोशिश में हैं। हालांकि अभी तक किसी विधायक ने सार्वजनिक रूप से इस दावे का समर्थन नहीं किया है और न ही चुनाव आयोग के सामने चुनाव चिह्न को लेकर कोई औपचारिक दावा पेश किया गया है।

विरोध प्रदर्शन में कम दिखे विधायक और सांसद

यहां मंगलवार को कोलकाता के रानी रासमणि एवेन्यू में ममता बनर्जी के विरोध प्रदर्शन के दौरान भी पार्टी के सीमित विधायक और सांसद ही नजर आए। वहां विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय, नैना बंद्योपाध्याय, मदन मित्रा, अशोक देब और असीमा पात्रा के साथ सांसद डोला सेन और कल्याण बनर्जी मौजूद थे।

वहीं इस दौरान कई बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी ने बगावत की चर्चाओं को और तेज कर दिया। राजनीतिक गलियारों में इसे पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी के संकेत के रूप में देखा जाने लगा।

नेता विपक्ष विवाद से बढ़ा संकट

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी के भीतर मौजूदा विवाद की शुरुआत पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष की नियुक्ति को लेकर हुए विवाद से जुड़ी बताई जा रही है। इस मामले में कथित जाली हस्ताक्षरों का मुद्दा सामने आया, जिसके बाद ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।

यहां रिजू दत्ता का कहना है कि पार्टी के कई विधायक चाहते थे कि ऋतब्रत बनर्जी को नेता विपक्ष बनाया जाए, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय के नाम को आगे बढ़ाया। इसके बाद असंतोष और गहरा गया।

ममता बनर्जी ने लगाया दबाव बनाने का आरोप

वहीं इस इस पूरे विवाद के बीच ममता बनर्जी और उनके करीबी सहयोगी कुणाल घोष ने भी पार्टी के भीतर मतभेदों की बात स्वीकार की है।

वहीं ममता बनर्जी ने फेसबुक लाइव के दौरान आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के विधायकों को पुलिस के दबाव के जरिए धमकाया जा रहा है और उन्हें कुछ खास लोगों से संपर्क करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

वहीं कुणाल घोष ने बागी विधायकों से अपील करते हुए कहा कि वे किसी के बहकावे में न आएं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व को बताए बिना गुप्त बैठक आयोजित कर पार्टी में फूट डालने की कोशिश की है।

सीक्रेट मीटिंग को लेकर आमने-सामने आए नेता

वहीं कुणाल घोष ने दावा किया कि ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा ने दक्षिण कोलकाता के एक होटल में कई विधायकों के साथ गुप्त बैठक की थी। हालांकि ऋतब्रत बनर्जी ने इस आरोप को पूरी तरह खारिज कर दिया और कुणाल घोष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।

सूत्रों के अनुसार पश्चिम मिदनापुर की एक महिला विधायक भी इस बैठक में शामिल लोगों में थीं। इसी कथित बैठक के बाद पार्टी में फूट की चर्चाएं और तेज हो गईं।

50 से अधिक विधायकों का आंकड़ा क्यों अहम?

बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के पास 80 विधायक हैं। दलबदल विरोधी कानून के तहत किसी भी अलग होने वाले गुट को अयोग्यता से बचने के लिए लगभग दो-तिहाई विधायकों का समर्थन चाहिए होगा।

यह संख्या करीब 53 विधायकों की बनती है। यही वजह है कि 50 से अधिक विधायकों का आंकड़ा राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि कोई गुट इस संख्या के करीब पहुंचता है तो वह विधायक दल में अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर सकता है।

विशेषज्ञों ने भी जताई चिंता

दरअसल कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज में मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म के प्रोफेसर सयंतन घोष ने कहा कि ऋतब्रत बनर्जी और संदीप साहा को पार्टी से निकाले जाने के बाद कई विधायक कोलकाता के विवान्ता होटल में मिले हैं।

उन्होंने कहा कि एक संभावित स्थिति यह हो सकती है कि 30 से अधिक विधायक पार्टी से अलग होकर खुद को असली तृणमूल कांग्रेस घोषित करने की कोशिश करें। इससे वे विधानसभा में विपक्ष की स्थिति पर दावा करने की स्थिति में आ सकते हैं।

सयंतन घोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यदि मौजूदा घटनाक्रम इसी तरह जारी रहा तो पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र तक तृणमूल कांग्रेस का मौजूदा स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है।

कुणाल घोष की भावुक अपील

बांग्ला समाचार माध्यम संगबाद प्रतिदिन द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में कुणाल घोष काफी भावुक नजर आए। उन्होंने विधायकों से हाथ जोड़कर अपील करते हुए कहा कि कोई भी नेता अपने दम पर चुनाव जीतकर नहीं आया है। सभी को तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के नाम पर जनता का समर्थन मिला है।

उन्होंने कहा कि लोगों में जमीर होना चाहिए और लालच में नहीं आना चाहिए। उनकी यह अपील पार्टी नेतृत्व की बढ़ती चिंता को भी दर्शाती है।

आपात बैठक से दूरी ने बढ़ाई अटकलें

तृणमूल कांग्रेस के लिए चिंता की एक और वजह तब सामने आई जब 31 मई को ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के 80 विधायकों में से करीब 60 विधायक शामिल नहीं हुए।

हालांकि पार्टी ने इस गैरहाजिरी को सामान्य बताने की कोशिश की, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे गंभीर संकेत माना गया। इसके बाद पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं होने की चर्चा और तेज हो गई।

क्या बोलीं ऋतब्रत बनर्जी?

ऋतब्रत बनर्जी ने किसी भी सुनियोजित बगावत या नई पार्टी बनाने की योजना से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें 20 से 25 विधायकों द्वारा नई पार्टी बनाने की किसी ठोस कोशिश की जानकारी नहीं है।

हालांकि उन्होंने यह जरूर स्वीकार किया कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर भारी असंतोष मौजूद है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस में बोलने की कोई गुंजाइश नहीं है और पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही है।

उन्होंने दावा किया कि केवल वही नहीं बल्कि कई वरिष्ठ सांसद और नेता भी मानते हैं कि पार्टी के सामने गंभीर संकट खड़ा है और उसका भविष्य चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रहा है।

बंगाल की राजनीति पर टिकी निगाहें

तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल बगावत, गुप्त बैठकों और विधायकों की नाराजगी के दावे राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बने हुए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ममता बनर्जी पार्टी को एकजुट रखने में कितनी सफल होती हैं और आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर की स्थिति किस दिशा में जाती है।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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