Silver Import Rules 2026: चांदी मंगाना हुआ मुश्किल, सरकार ने अचानक सख्त किए नियम

Silver Import Rules 2026: रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ते चांदी आयात के बीच सरकार ने नए प्रतिबंध लगाए हैं। इसका असर कारोबारियों, निवेशकों और घरेलू कीमतों पर पड़ सकता है।

Jyotsana Singh
Published on: 3 Jun 2026 1:07 PM IST (Updated on: 4 Jun 2026 12:39 AM IST)
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Silver Import Rules 2026 India

Silver Import Rules 2026: चांदी के कारोबारियों और निवेशकों को एक बार फिर झटका लगने की तैयारी है। भारत में रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ते चांदी आयात को देखते हुए केंद्र सरकार ने नियमों को और कड़ा कर दिया है। अब 99.9% शुद्धता वाली सिल्वर ग्रेन, सिल्वर पाउडर और इसी श्रेणी के अन्य चांदी उत्पादों का आयात बिना पूर्व अनुमति के नहीं किया जा सकेगा। आयातकों को पहले डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) से मंजूरी लेनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे बढ़ते आयात पर लगाम लगेगी, विदेशी मुद्रा पर दबाव कम होगा और व्यापारिक निगरानी बेहतर हो सकेगी। भारत सरकार ने चांदी के आयात पर एक और बड़ा कदम उठाते हुए नियमों को पहले से अधिक सख्त कर दिया है। दुनिया के सबसे बड़े चांदी उपभोक्ता देशों में शामिल भारत में पिछले एक वर्ष के दौरान चांदी का आयात तेजी से बढ़ा है। इसी को देखते हुए सरकार ने 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली सिल्वर ग्रेन, सिल्वर पाउडर और कुछ अन्य उच्च शुद्धता वाले चांदी उत्पादों को आयात के लिए अधिक नियंत्रित श्रेणी में शामिल कर दिया है। नए नियमों के तहत अब इन उत्पादों का आयात करने से पहले आयातकों को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) से पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होगी। पहले इन उत्पादों के आयात में अपेक्षाकृत कम प्रतिबंध थे, लेकिन अब सरकार सीधे निगरानी रखेगी कि कितनी मात्रा में और किस उद्देश्य से चांदी देश में लाई जा रही है।

क्यों उठाना पड़ा यह कदम?

सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत का चांदी आयात ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य की चांदी का आयात किया, जबकि इससे एक वर्ष पहले यह आंकड़ा 4.8 अरब डॉलर था। यानी केवल एक साल में चांदी आयात का मूल्य ढाई गुना से भी अधिक बढ़ गया।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में ही चांदी का आयात सालाना आधार पर 157 प्रतिशत बढ़कर 41.1 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। इतनी तेज वृद्धि ने नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी थी, क्योंकि बड़े पैमाने पर आयात से विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाते पर दबाव बढ़ता है।

पहले भी बढ़ाई गई थी सख्ती

सरकार ने मई 2026 में भी चांदी आयात नियमों में बदलाव किया था। उस समय 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली सिल्वर बार और अन्य अर्ध-निर्मित चांदी उत्पादों को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया था। अब नए आदेश के जरिए उन उत्पादों को भी सख्त नियंत्रण के दायरे में लाया गया है जिनका उपयोग आगे प्रसंस्करण या निवेश उत्पादों के रूप में किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार चरणबद्ध तरीके से पूरे चांदी आयात तंत्र को अधिक नियंत्रित बनाना चाहती है ताकि आयात के जरिए होने वाले संभावित दुरुपयोग और अनावश्यक विदेशी मुद्रा खर्च को रोका जा सके।

पहले ही बढ़ाया जा चुका है आयात शुल्क

चांदी आयात को नियंत्रित करने के लिए सरकार केवल अनुमति व्यवस्था पर ही निर्भर नहीं है। हाल ही में सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया था। इसका उद्देश्य कीमती धातुओं की मांग को संतुलित करना और बढ़ते आयात बिल को नियंत्रित करना है। ऊर्जा आयात पर बढ़ते खर्च और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच सरकार विदेशी मुद्रा की बचत को प्राथमिकता दे रही है। ऐसे में कीमती धातुओं के आयात पर नियंत्रण आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

उद्योग और कारोबार पर क्या होगा असर?

बुलियन कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि नए नियमों के बाद चांदी आयात की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक जटिल हो सकती है। अब आयातकों को पहले मंजूरी का इंतजार करना होगा और यह स्पष्ट नहीं है कि अनुमति मिलने में कितना समय लगेगा। इसका असर विशेष रूप से उन कारोबारियों पर पड़ सकता है जो नियमित रूप से बड़ी मात्रा में चांदी आयात करते हैं। यदि मंजूरी प्रक्रिया लंबी होती है तो सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और घरेलू बाजार में उपलब्धता पर असर देखने को मिल सकता है।

निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ने बढ़ाई मांग

पिछले एक साल में भारत में चांदी की मांग केवल आभूषणों और बर्तनों तक सीमित नहीं रही। निवेशकों ने भी बड़ी मात्रा में चांदी खरीदना शुरू किया है। महंगाई, वैश्विक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश के कारण चांदी में निवेश तेजी से बढ़ा है। Silver ETFs में रिकॉर्ड निवेश दर्ज किया गया है। इसके अलावा चांदी के सिक्कों और बार की खरीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। यही वजह है कि घरेलू मांग को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भरता बढ़ी।

उद्योगों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है चांदी

चांदी केवल निवेश या आभूषण की धातु नहीं है। इसका उपयोग सौर ऊर्जा पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल उपकरण, बैटरी तकनीक और कई हाई-टेक उद्योगों में भी होता है। भारत में सोलर सेक्टर के तेजी से विस्तार के कारण औद्योगिक मांग लगातार बढ़ रही है। यही वजह कि सरकार को आयात नियंत्रण और उद्योगों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है ताकि उत्पादन गतिविधियों पर नकारात्मक असर न पड़े।

किन देशों से आती है सबसे ज्यादा चांदी?

भारत मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात (UAE), यूनाइटेड किंगडम (UK) और चीन से चांदी का आयात करता है। इन देशों से बड़ी मात्रा में शुद्ध चांदी और उससे जुड़े उत्पाद भारत पहुंचते हैं। अब नए प्रतिबंध लागू होने के बाद आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि चांदी आयात की गति कितनी प्रभावित होती है और इसका घरेलू कीमतों, निवेश बाजार तथा औद्योगिक मांग पर क्या असर पड़ता है।

ज्योत्सना सिंह

03.06.2026

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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