TMC Crisis: 'अभिषेक बनर्जी के लिए मुंह बंद रखो और तालियां बजाओ'... TMC के बागी विधायक ने खोली अंदरूनी कलह की पोल

TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मची बड़ी बगावत पर निष्कासित विधायक संदीपन साहा ने बड़ा खुलासा किया है। जानें कैसे अभिषेक बनर्जी के फैसलों और तानाशाही रवैये के कारण 60 विधायकों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया।

Shivam Shrivastava
Published on: 4 Jun 2026 9:15 PM IST (Updated on: 4 Jun 2026 9:16 PM IST)
TMC Crisis: अभिषेक बनर्जी के लिए मुंह बंद रखो और तालियां बजाओ... TMC के बागी विधायक ने खोली अंदरूनी कलह की पोल
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TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस इस समय अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है, जहां पार्टी के भीतर एक बड़ी टूट देखने को मिल रही है। कुल 80 विधायकों में से 60 ने बगावत का बिगुल फूंकते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया है। संकट के इस दौर में अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश कर रही टीएमसी इस पूरे घटनाक्रम के लिए सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी को जिम्मेदार ठहरा रही है। हालांकि, इस स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि जो पार्टी और उसकी सर्वोच्च नेता पिछले 15 सालों से पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज थीं, वहां अचानक ऐसे हालात कैसे बन गए कि विधायकों ने अपनी ही पार्टी से मुंह मोड़ लिया।

इस असंतोष और बगावत की असली वजहों को समझने के लिए बंगाल चुनाव में पार्टी को मिली हार और उसके बाद के घटनाक्रम को देखना होगा। पार्टी से हाल ही में निष्कासित किए गए विधायक संदीपन साहा ने इस पूरे मामले से पर्दा उठाया है। साहा को कुछ समय पहले ही ऋतब्रत बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस से बाहर का रास्ता दिखाया गया था।

पार्टी के भीतर इस बड़ी बगावत की शुरुआत चुनावी नतीजे आने के ठीक बाद 6 मई को हुई एक आधिकारिक बैठक के दौरान हुई थी। संदीपन साहा के अनुसार, इसी बैठक में उन्होंने टीएमसी की अंदरूनी कार्यप्रणाली और शीर्ष नेतृत्व की शैली पर खुलकर सवाल उठाए थे, जो बाद में इस पूरी बगावत का मुख्य कारण बना। उन्होंने बताया कि चुनावी हार के बाद बुलाई गई इस बैठक में सभी विधायकों को कड़े निर्देश दिए गए थे कि कोई भी व्यक्ति अभिषेक बनर्जी के फैसलों या उनके काम की आलोचना नहीं करेगा।

साहा ने नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि आत्ममंथन करने के बजाय विधायकों पर यह दबाव बनाया गया कि वे अभिषेक बनर्जी के चुनावी प्रदर्शन को असाधारण बताएं और उनके सम्मान में खड़े होकर तालियां बजाएं। इस निर्देश ने उन वरिष्ठ और अनुभवी विधायकों को सबसे ज्यादा आहत किया जो उस समय से राजनीति और विधानसभा में सक्रिय हैं, जब अभिषेक बनर्जी स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे। ऐसे कद्दावर नेताओं को भी जबरन खड़े होकर तालियां बजाने के लिए मजबूर किया गया, जिससे पार्टी के भीतर गहरा असंतोष पनपने लगा।

यही वजह है कि जब विधायकों को इस तानाशाही रवैये के खिलाफ आवाज उठाने का मौका मिला, तो उन्होंने विद्रोह का रास्ता चुन लिया। बागी विधायकों की संख्या को लेकर साहा ने एक और गंभीर खुलासा किया कि नेता प्रतिपक्ष के चुनाव के दौरान कई विधायक बैठक में मौजूद ही नहीं थे, लेकिन कागजों पर उनके नाम बड़े अक्षरों में दर्ज कर दिए गए।

इस फर्जीवाड़े ने विधायकों के मन में लीडरशिप को लेकर गहरा संदेह पैदा कर दिया कि जब पार्टी के पास पर्याप्त संख्या बल था, तब भी ऐसी अनैतिक प्रक्रिया क्यों अपनाई गई। इसके बाद जब इस मामले की शिकायत विधानसभा अध्यक्ष से की गई और जांच शुरू हुई, तो फर्जीवाड़े के पुख्ता सबूत सामने आने लगे। इन सबूतों के उजागर होते ही अन्य विधायक भी एकजुट होने लगे। आखिरकार, आपसी विचार-विमर्श के बाद सभी बागी विधायकों ने यह तय किया कि यदि उन्हें अपने क्षेत्र की जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभाना है, तो उन्हें इस घुटन भरे माहौल से निकलकर विधानसभा के भीतर एक अलग गुट बनाना ही होगा।

Shivam Shrivastava
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Shivam Shrivastava

शिवम उत्तर प्रदेश के एक युवा और उभरते पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 4 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। वे राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और हाइपरलोकल खबरों की गहरी समझ रखते हैं और समसामयिक मुद्दों पर सटीक व प्रभावशाली रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी विशेष रुचि डाटा-ड्रिवन पत्रकारिता और विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग में है, जिससे उनकी खबरें अधिक तथ्यात्मक और विश्वसनीय बनती हैं। वे जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप को भी समझते हैं। लेखन और रिसर्च में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक सक्षम और जिम्मेदार पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।

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