TRENDING TAGS :
Indian Politics 2026: 2026 का स्वागत - राजनीति में किसका रंग खिलेगा
Indian Politics 2026: 2026 में असम, बंगाल, तमिलनाडु और केरल चुनावों से पहले बदला राजनीतिक समीकरण। भाजपा बनाम विपक्ष की असली परीक्षा का विश्लेषण।
Indian Politics 2026 (Image Credit-Social Media)
Indian Politics 2026: विगत कुछ वर्षो के अन्तराल में यदि हम भारत देश की राजनीति के परिदृश्य का आंकलन करें तो यह स्पष्ट होता है कि भाजपा ने प्रतिवर्ष नये-नये कीर्तिमान स्थापित करके भगवा ध्वज को ऊँचाईयों तक पहुँचाया है। बिहार विधानसभा चुनाव, भाजपा के लिए अत्यधिक कठिन परीक्षा की घड़ी थी, जिसमें कांग्रेस के द्वारा वोट चोरी के मुद्दे को प्रमुखता देने पर भी जनता ने कांग्रेस के इस अभियान को पूर्णतया नकार दिया। आज विपक्षी दल भी यह सोचने के लिए विवश हो रहे हैं कि इंडिया गठबंधन का भारतीय राजनीति में कोई महत्व है अथवा नहीं। इंडिया गठबंधन के घटक दल यह सोचने के लिए विवश हो रहे हैं कि इसके लिए कांग्रेस का नेतृत्व स्वीकार किया जाये अथवा नहीं।
वर्ष 2026 मे असम, बंगाल, तमिलनाडु और केरल के चुनाव होने प्रस्तावित हैं, इनमें से असम राज्य में भाजपा की सरकार है और वहाँ के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा हिन्दुओं और अपनी जाति के लोगो में, अत्यधिक सामंजस्य स्थापित कर चुके हैं। इसीलिए भाजपा ने वहाँ स्वयं ही अर्थात् बिना किसी गठबंधन के चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है, जोकि एक श्रेष्ठ पहल है। यद्यपि विपक्ष पूर्णतया असंगठित होने के कारण असम में पुनः भाजपा का भगवा ध्वज लहराने से रोकने में असमर्थ है। इसलिए भाजपा को वहाँ अपनी सरकार बनाने में किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
बंगाल राज्य में ममता बैनर्जी अर्थात् दीदी का प्रभाव विगत वर्षो के अन्तराल में निरन्तर क्षीर्ण होता जा रहा है। वहाँ भी भाजपा को अपने वोट बैंक में मात्र 4-5 प्रतिशत की ही वृद्धि करने की आवश्यकता है, ऐसा होने पर भाजपा को अपनी सरकार बनाने में किसी विशेष समस्या का सामना नहीं करना होगा। इस सम्भावित जीत के लिए भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अत्यधिक विवेकपूर्ण ढंग से कार्य करना होगा। जिससे निश्चिततः आगामी चुनावों में भगवा ध्वज बंगाल में भी अपना परचम लहरायेगा।
यद्यपि तमिलनाडु और केरल राज्य में भाजपा की डगर अत्यधिक कठिन होगी। यदि दोनो ही प्रदेशों में भाजपा सत्तासीन नहीं हो सकी तोभी एक सम्मानपूर्ण स्थिति को अवश्य ही प्राप्त कर लेगी।
एक दीर्घ अवधि के अन्तराल में, भाजपा में कोई स्थायी अध्यक्ष का चयन न होने के कारण उसे, विपक्षी दलो के कटाक्ष को सहन करना पड़ता था, परन्तु वर्तमान में भाजपा ने नितिन नबीन, जोकि बिहार में विधायक के पद पर पाँच बार विजयी हुए और छत्तीसगढ़ में भाजपा को विजयश्री दिलाने में अहम भूमिका निभायी थी, ऐसे व्यक्तित्व को भाजपा का अध्यक्ष घोषित किया गया हैं। भाजपा को नवनिर्वाचित अध्यक्ष से अत्यधिक अपेक्षा है कि वे अपने दीर्घ अनुभव का लाभ लेते हुए भाजपा के कार्यकर्ताओं में एक नई आशा की किरण जगायेंगे।
भाजपा की वास्तविक परीक्षा वर्ष 2027 में प्रस्तावित, उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में होगी। उत्तर प्रदेश का वह चुनाव, भाजपा के लिए अस्तित्व का प्रश्न चिह्न होगा। वह चुनाव यह भी निश्चित करेगा कि वर्ष 2029 में किसकी सरकार केन्द्र में अस्तित्व में आयेगी। आगामी 1 वर्ष के अन्तराल में प्रदेश अथवा केन्द्रीय अध्यक्ष को, संगठन के कमजोर पक्षों को सशक्त करने का भरपूर अवसर प्राप्त होगा। जिससे निःसन्देह वर्ष 2027 में भाजपा को एक श्रेष्ठ विजयश्री की ओर अग्रसर होने से कोई भी नहीं रोक पायेगा।


