TMC Leaders Arrest: बंगाल में TMC दिग्गजों पर कानून का शिंकजा! 72 घंटों में कई कद्दावर नेता-पार्षद गिरफ्तार, दीदी की बड़ी फजीहत

TMC Leaders Arrest: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद टीएमसी नेताओं पर कानून का शिकंजा कस गया है। कोलकाता पुलिस और हावड़ा पुलिस ने पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता और युवा अध्यक्ष कैलाश मिश्रा समेत कई कद्दावर नेताओं को जबरन वसूली और कट मनी के आरोप में गिरफ्तार किया है।

Harsh Srivastava
Published on: 7 Jun 2026 12:07 PM IST (Updated on: 7 Jun 2026 12:08 PM IST)
TMC Leaders Arrest: बंगाल में TMC दिग्गजों पर कानून का शिंकजा! 72 घंटों में कई कद्दावर नेता-पार्षद गिरफ्तार, दीदी की बड़ी फजीहत
X

TMC Leaders Arrest: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत और राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। एक तरफ जहां पार्टी के भीतर दो-तिहाई से अधिक विधायकों और सांसदों के बागी रुख अख्तियार करने के कारण आंतरिक कलह मची हुई है, वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी के करीबी नेताओं, पार्षदों और पूर्व पदाधिकारियों पर कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। पिछले 48 से 72 घंटों के भीतर राज्य के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर कोलकाता और उसके आसपास के क्षेत्रों से तृणमूल कांग्रेस के कई कद्दावर चेहरों की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां हुई हैं। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की इस संयुक्त प्रशासनिक कार्रवाई के चलते पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में हड़कंप मचा हुआ है।

बीते 48 से 72 घंटों में किन पर गिरा कानून का डंडा?

पश्चिम बंगाल पुलिस प्रशासन और खुफिया विभागों द्वारा हाल ही में की गई गिरफ्तारियों में तृणमूल कांग्रेस के कुछ बेहद प्रभावशाली नाम शामिल हैं। इन नेताओं को अलग-अलग मामलों में नामजद कर हिरासत में लिया गया है। हालिया प्रमुख गिरफ्तारियां इस प्रकार हैं:

1. बप्पादित्य दासगुप्ता (पार्षद, कोलकाता नगर निगम - वार्ड नंबर 101)

कोलकाता नगर निगम (KMC) के वार्ड नंबर 101 के मौजूदा पार्षद और तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता बप्पादित्य दासगुप्ता को हाल ही में कोलकाता पुलिस की पटुली थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बप्पादित्य दासगुप्ता के खिलाफ व्यापारियों से अवैध रूप से जबरन वसूली (तोलाबाजी), आपराधिक साजिश और डराने-धमकाने की गंभीर शिकायतें दर्ज थीं।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पटुली और आसपास के इलाकों में दुकान आवंटित करने के नाम पर 1 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक की अवैध वसूली की गई थी। इसके अलावा, उन पर चुनाव के बाद हुई कुछ हिंसक वारदातों में शामिल होने का भी आरोप है। पुलिस ने उन्हें शनिवार रात लंबी पूछताछ के बाद हिरासत में लिया।

2. कैलाश मिश्रा (अध्यक्ष, हावड़ा सदर तृणमूल युवा कांग्रेस)

तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बेहद करीबी माने जाने वाले हावड़ा सदर तृणमूल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष कैलाश मिश्रा को हावड़ा सिटी पुलिस की खुफिया टीम ने बिहार के मधुबनी जिले से गिरफ्तार किया है। विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से ही कैलाश मिश्रा फरार चल थे।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, कैलाश मिश्रा ने इस साल बाली विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, जहां उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा। उनके खिलाफ रंगदारी मांगने, व्यापारियों से मारपीट करने, सरकारी काम में बाधा डालने और जान से मारने की धमकी देने के तहत कई गैर-जमानती धाराएं दर्ज थीं। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने बिहार में उनके एक रिश्तेदार के घर पर छापेमारी कर उन्हें दबोचा।

3. सौरव घोष (वार्ड अध्यक्ष, तृणमूल युवा कांग्रेस - वार्ड नंबर 101)

पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता की गिरफ्तारी से ठीक कुछ घंटे पहले शनिवार दोपहर को पुलिस ने उसी वार्ड के तृणमूल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष सौरव घोष को गिरफ्तार किया था। सौरव घोष पर भी इलाके के व्यापारियों और निर्माण कार्य (प्रमोटिंग) से जुड़े लोगों से अवैध रूप से 'कट मनी' और जबरन वसूली करने का आरोप है। पुलिस पूछताछ में सौरव घोष द्वारा दिए गए बयानों और साक्ष्यों के आधार पर ही देर रात बप्पादित्य दासगुप्ता की गिरफ्तारी की राह साफ हुई थी।

कोलकाता नगर निगम (KMC) पर बड़ा शिकंजा

कोलकाता नगर निगम यानी 'छोटे लालबाड़ी' में तृणमूल कांग्रेस के पार्षदों पर कानून की पकड़ लगातार मजबूत होती जा रही है। बप्पादित्य दासगुप्ता की गिरफ्तारी के बाद अब तक कोलकाता नगर निगम के कुल सात मौजूदा और पूर्व जनप्रतिनिधि विभिन्न आपराधिक और आर्थिक मामलों में जेल भेजे जा चुके हैं। सूत्रों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए इन पार्षदों और जनप्रतिनिधियों की सूची इस प्रकार है:

इन सभी जनप्रतिनिधियों के खिलाफ स्थानीय थानों में प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियों ने वित्तीय दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर कार्रवाई की है।

आखिर किस जुर्म और आरोपों के तहत हो रही हैं ये गिरफ्तारियां?

राज्य में प्रशासनिक और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनाव के बाद टीएमसी नेताओं के खिलाफ हो रही इन कानूनी कार्रवाइयों के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण और कानूनी जुर्म शामिल हैं:

1. 'कट मनी' और जबरन वसूली (Extortion)

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों से 'कट मनी' (सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने या निर्माण कार्य शुरू करने के बदले लिया जाने वाला अवैध कमीशन) एक बड़ा प्रशासनिक मुद्दा रहा है। सत्ता परिवर्तन के बाद पुलिस प्रशासन को स्वतंत्र रूप से काम करने की छूट मिलने के कारण, पीड़ित नागरिकों और व्यापारियों ने खुलकर शिकायतें दर्ज कराना शुरू कर दिया है। इसी के परिणामस्वरूप इन नेताओं के खिलाफ जबरन वसूली की धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज हो रहे हैं।

2. चुनावी और राजनीतिक हिंसा में संलिप्तता

गिरफ्तार किए गए कई स्थानीय नेताओं और पार्षदों पर आरोप है कि उन्होंने चुनाव के दौरान और चुनाव के तुरंत बाद विरोधी दलों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया था। पुलिस इन मामलों की पुरानी फाइलों को दोबारा खोलकर सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर गिरफ्तारियां कर रही है।

3. वित्तीय धोखाधड़ी और पद का दुरुपयोग

नगर निगमों और स्थानीय निकायों के भीतर विभिन्न नागरिक विकास योजनाओं, जैसे सड़कों का निर्माण, जलापूर्ति के ठेके और बाजारों में दुकानों के आवंटन में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी के आरोप सामने आए हैं। कई पार्षदों ने अपने पद का दुरुपयोग कर अपने करीबियों को फायदा पहुंचाया, जिसकी जांच अब राज्य के आर्थिक अपराध विंग द्वारा की जा रही है।

पार्टी के भीतर बगावत और जमीनी स्तर पर जनता का आक्रोश

कानूनी मोर्चे पर घिरने के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस को गंभीर राजनीतिक संकट का भी सामना करना पड़ रहा है। राज्य में सत्ता बदलने के बाद से ही टीएमसी के शीर्ष संगठन में बिखराव साफ देखा जा सकता है। पार्टी के दो-तिहाई से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधि इस समय नेतृत्व के संपर्क से बाहर हैं या स्वतंत्र रुख अपना चुके हैं।

इसके साथ ही, जमीनी स्तर पर भी स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है। कोलकाता के पटुली और हावड़ा जैसे इलाकों से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जहां गिरफ्तार नेताओं को जब पुलिस स्टेशन ले जाया जा रहा था, तब स्थानीय जनता ने उनके खिलाफ नारेबाजी की। कई कस्बों में स्थानीय टीएमसी नेताओं द्वारा डर के मारे खुद ही लोगों का पुराना लिया गया कमीशन (कट मनी) वापस करने के मामले भी सामने आ रहे हैं, ताकि वे जनता के गुस्से और संभावित कानूनी कार्रवाई से बच सकें।

प्रशासनिक रिपोर्ट और आधिकारिक स्रोत

इस पूरी कानूनी प्रक्रिया और गिरफ्तारियों के संबंध में जानकारी मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रशासनिक और पुलिस सूत्रों पर आधारित है:

कोलकाता पुलिस मुख्यालय (लालबाजार) और पटुली पुलिस स्टेशन दैनिक रिपोर्ट: बप्पादित्य दासगुप्ता और सौरव घोष की गिरफ्तारी से संबंधित प्राथमिकियां (FIR) और दर्ज धाराएं।

हावड़ा सिटी पुलिस खुफिया विभाग (DD) वक्तव्य: कैलाश मिश्रा की बिहार के मधुबनी से गिरफ्तारी और ट्रांजिट रिमांड से जुड़ी आधिकारिक सूचना।

कोलकाता नगर निगम (KMC) सचिवालय रिकॉर्ड: संबंधित वार्डों के पार्षदों की सूची और उनके प्रशासनिक विभागों की आधिकारिक स्थिति।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक द्वेष का हिस्सा नहीं है, बल्कि अदालतों के निर्देश और नागरिकों द्वारा दर्ज कराई गई वैध शिकायतों के आधार पर की जा रही है। आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों पर कानून का शिकंजा कसने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

Harsh Srivastava
ABOUT THE AUTHOR

Harsh Srivastava

Hi! I am Harsh Srivastava, currently working as a Content Writer and News Coordinator at Newstrack. I oversee content planning, coordination, and contribute with in-depth articles and news features, especially focusing on politics and crime. I started my journey in journalism in 2023 and have worked with leading publications such as Hindustan, Times of India, and India News, gaining experience across cities including Varanasi, Delhi and Lucknow. My work revolves around curating timely news, in- depth research, and delivering engaging content to keep readers informed and connected.

Next Story