TMC Political Crisis: TMC के 59 विधायक बागी? विधानसभा पहुंचे ऋतब्रत बनर्जी ने उड़ाई दीदी की नींद, छिन सकता है विपक्षी दल का दर्जा

West Bengal Political Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने 59 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती दी है। बागी गुट का आरोप है कि पार्टी के प्रस्तावों पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए।

Harsh Srivastava
Published on: 3 Jun 2026 12:25 PM IST (Updated on: 3 Jun 2026 12:25 PM IST)
TMC Political Crisis: TMC के 59 विधायक बागी? विधानसभा पहुंचे ऋतब्रत बनर्जी ने उड़ाई दीदी की नींद, छिन सकता है विपक्षी दल का दर्जा
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West Bengal Political Crisis: पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से हाल ही में बाहर किए गए बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा अचानक बंगाल विधानसभा पहुंच गए हैं। विधानसभा पहुंचते ही इन दोनों बागी नेताओं ने एक ऐसा दावा कर दिया है, जिसने पूरी बंगाल सरकार और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी की रातों की नींद उड़ा दी है। ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि उनके पास टीएमसी के 50 से भी ज्यादा विधायकों का सीधा समर्थन है। सूत्रों की मानें तो इस बागी गुट ने ममता बनर्जी को बड़ा झटका देने के लिए ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नया नेता प्रतिपक्ष बनाने की पूरी तैयारी भी कर ली है।

फर्जी हस्ताक्षर के गंभीर आरोप

इस पूरे सियासी ड्रामे की शुरुआत तब हुई जब बीते सोमवार को टीएमसी ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में बाहर का रास्ता दिखा दिया था। पार्टी से निकाले जाने के बाद दोनों नेताओं ने शीर्ष नेतृत्व पर पलटवार करते हुए बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 6 मई को सदन के नेता प्रतिपक्ष, उपनेता प्रतिपक्ष और चीफ व्हिप के नामों को मंजूरी देने वाले टीएमसी के प्रस्ताव पत्र पर कई विधायकों के नकली दस्तखत किए गए थे। बागी विधायकों का दावा है कि उस सूची में उनके खुद के हस्ताक्षर भी जाली बनाए गए थे। इसके बाद दोनों नेताओं ने कोलकाता के विधायक हॉस्टल में कई टीएमसी विधायकों से गुप्त मुलाकातें कीं, जिससे पार्टी के भीतर एक नए गुट के बनने की अटकलें सच साबित होने लगीं।

अभिषेक बनर्जी पर निशाना

ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों के लिए सीधे तौर पर शीर्ष नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बिना नाम लिए अभिषेक बनर्जी की तरफ इशारा करते हुए कहा कि आज की तारीख में पूरी पार्टी को ममता बनर्जी के हाथों से हाईजैक कर लिया गया है। पश्चिम बंगाल की यह स्थिति ठीक वैसी ही नजर आ रही है, जैसी साल 2022 में महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ हुई थी। हाल ही में संपन्न हुए बंगाल विधानसभा चुनावों में टीएमसी को करारी शिकस्त मिली थी और वह 294 सीटों में से केवल 80 सीटें ही जीत पाई थी। अब 59 विधायकों के समर्थन का यह नया दावा ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

छिन सकता है विपक्षी दल का दर्जा

दल-बदल कानून के नियमों के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल में कानूनी रूप से विभाजन को सही ठहराने और अपनी विधायकी बचाने के लिए कम से कम दो-तिहाई विधायकों का एक साथ टूटना जरूरी होता है। टीएमसी के कुल 80 विधायकों के हिसाब से दो-तिहाई का यह जादुई आंकड़ा 54 विधायकों का बैठता है। ऐसे में यदि ऋतब्रत बनर्जी का 59 विधायकों वाला दावा सच साबित होता है, तो यह बागी गुट बिना अपनी सदस्यता खोए खुद को असली टीएमसी घोषित कर सकता है। यही नहीं, इससे ममता बनर्जी की पार्टी से मुख्य विपक्षी दल का तमगा भी छिन सकता है, क्योंकि सदन में इस दर्जे को बनाए रखने के लिए कम से कम 29 विधायकों का होना अनिवार्य है। यदि यह फूट सच साबित हुई, तो बंगाल की राजनीति पूरी तरह बदल जाएगी।

Harsh Srivastava
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Harsh Srivastava

Hi! I am Harsh Srivastava, currently working as a Content Writer and News Coordinator at Newstrack. I oversee content planning, coordination, and contribute with in-depth articles and news features, especially focusing on politics and crime. I started my journey in journalism in 2023 and have worked with leading publications such as Hindustan, Times of India, and India News, gaining experience across cities including Varanasi, Delhi and Lucknow. My work revolves around curating timely news, in- depth research, and delivering engaging content to keep readers informed and connected.

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