World Environment Day: "पर्यावरण का दोहन अब मानव अस्तित्व पर संकट बन चुका है" - ज्ञानेन्द्र रावत

World Environment Day: पर्यावरणविद् ज्ञानेन्द्र रावत ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन, जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण ने मानव अस्तित्व के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।

Newstrack Network
Published on: 4 Jun 2026 5:37 PM IST
Environment exploitation has now become a crisis on human existence
X

"पर्यावरण का दोहन अब मानव अस्तित्व पर संकट बन चुका है" - ज्ञानेन्द्र रावत (Photo- Newstrack)

World Environment Day: विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरणविद् ज्ञानेन्द्र रावत ने कहा कि पर्यावरण का लगातार दोहन मानव अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बन चुका है और अब ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

प्रश्न: आज विश्व पर्यावरण दिवस पर आप पर्यावरण संकट को किस रूप में देखते हैं?

ज्ञानेन्द्र रावत: आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक हम पर्यावरण के दोहन की कीमत चुकाते रहेंगे। जिस तरह प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध इस्तेमाल हो रहा है, उसने मानव जीवन को गंभीर संकट में डाल दिया है। पर्यावरणीय असंतुलन अब केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि एक वास्तविक खतरा बन चुका है।

प्रश्न: आपने अपने विचारों में महात्मा गांधी का उल्लेख किया है। उनकी सोच आज कितनी प्रासंगिक है?

ज्ञानेन्द्र रावत: महात्मा गांधी ने बहुत पहले ही चेतावनी दे दी थी कि पश्चिमी मॉडल का अंधानुकरण पर्यावरणीय संकट को जन्म देगा। उनका मानना था कि भारत को अपने संसाधनों के उपयोग में अधिक जिम्मेदार होना चाहिए। दुर्भाग्य से आजादी के बाद विकास की नीतियों में इन मूल्यों को पर्याप्त महत्व नहीं मिला।

प्रश्न: आप वर्तमान विकास मॉडल को किस नजरिए से देखते हैं?

ज्ञानेन्द्र रावत: विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास जो प्रकृति को खत्म कर दे, वह विनाश का रास्ता है। आज संसाधनों पर बड़े कार्पोरेट समूहों का कब्जा बढ़ा है, जंगल खत्म हो रहे हैं, नदियां प्रदूषित हैं और ग्रामीण व आदिवासी समाज विस्थापन झेल रहा है।

प्रश्न: जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग को लेकर आपकी क्या चिंता है?

ज्ञानेन्द्र रावत: कार्बन उत्सर्जन लगातार बढ़ रहा है। तापमान बढ़ने से सूखा, बाढ़, जंगलों में आग, ग्लेशियरों का पिघलना और खाद्यान्न संकट जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य की पीढ़ियां भारी कीमत चुकाएंगी।

प्रश्न: भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

ज्ञानेन्द्र रावत: भारत को विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना होगा। केवल लक्ष्य घोषित करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर उत्सर्जन कम करने और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

प्रश्न: आम लोगों की भूमिका को आप कैसे देखते हैं?

ज्ञानेन्द्र रावत: पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों का काम नहीं है। हमें अपनी जीवनशैली बदलनी होगी। पानी बचाना, प्रदूषण कम करना, पेड़ लगाना और प्रकृति के साथ संतुलन बनाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

प्रश्न: अंत में आपका संदेश?

ज्ञानेन्द्र रावत: पृथ्वी हमारी जरूरतें पूरी कर सकती है, लेकिन हमारा लोभ नहीं। यदि हम अभी नहीं संभले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संकटग्रस्त दुनिया छोड़कर जाएंगे। पर्यावरण संरक्षण अब विकल्प नहीं, बल्कि मानवता के अस्तित्व का प्रश्न है।

Newstrack Network
ABOUT THE AUTHOR

Newstrack Network

Newstrack is one of the most Trusted and Popular news portal of India. Remain updated and aware, only on Newstrack

Next Story