World Environment Day 2026: अब मिट्टी में खुद घुल जाएगी दूध की थैली... मदर डेयरी ने शुरू की भारत की पहली अनोखी पहल

World Environment Day 2026: विश्व पर्यावरण दिवस 2026 से दिल्ली-NCR में शुरू हो रही इस नई पैकेजिंग से प्लास्टिक कचरे को कम करने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

Jyotsana Singh
Published on: 3 Jun 2026 11:13 AM IST (Updated on: 4 Jun 2026 12:39 AM IST)
World Environment Day 2026: अब मिट्टी में खुद घुल जाएगी दूध की थैली... मदर डेयरी ने शुरू की भारत की पहली अनोखी पहल
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World Environment Day 2026: लंबे समय से हम दूध के पैकेट इस्तेमाल के बाद उन्हें कचरे के डब्बे में फेंकते चले आ रहे हैं। इस तरह से हमारे देश में हर दिन करोड़ों लोग दूध की प्लास्टिक थैलियां इस्तेमाल होती हैं। यही प्लास्टिक वर्षों तक कचरे के रूप पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती रहती है। अब इस समस्या का समाधान निकालने की दिशा में मदर डेयरी ने एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने भारत की पहली ऐसी दूध की पैकेजिंग लॉन्च की है, जो इस्तेमाल के बाद धीरे-धीरे प्राकृतिक रूप से मिट्टी में मिल जाएगी। खास बात यह है कि इस बदलाव का असर दूध की कीमतों पर भी नहीं पड़ेगा। विश्व पर्यावरण दिवस से शुरू हो रही यह पहल देश में टिकाऊ पैकेजिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव मानी जा रही है।

अब दूध की थैली खुद-ब-खुद मिट्टी में हो जाएगी खत्म, प्लास्टिक प्रदूषण पर लगेगी लगाम

पर्यावरण संरक्षण को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच देश की प्रमुख डेयरी कंपनी मदर डेयरी ने एक नई पहल की शुरुआत की है। कंपनी ने भारत की पहली ऐसी दूध की थैली पेश की है, जो समय के साथ प्राकृतिक रूप से नष्ट होकर मिट्टी में मिल जाएगी। इस कदम को सिंगल-यूज प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

5 जून से दिल्ली-एनसीआर में शुरू होगी नई पैकेजिंग

मदर डेयरी 5 जून, यानी विश्व पर्यावरण दिवस से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बिकने वाले अपने काउ मिल्क पैक में इस नई डिग्रेडेबल थैली का उपयोग शुरू करेगी। कंपनी का लक्ष्य धीरे-धीरे पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग को बढ़ावा देना और प्लास्टिक कचरे के बोझ को कम करना है। हमारे देश में रोजाना लाखों दूध की थैलियां उपयोग के बाद फेंक दी जाती हैं। इनमें से बड़ी मात्रा रिसाइक्लिंग सिस्टम तक नहीं पहुंच पाती और लैंडफिल या खुले वातावरण में जमा होकर प्रदूषण बढ़ाती है। ऐसे में यह नई तकनीक डेयरी उद्योग के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।

क्या है इस थैली की खास तकनीक?

मदर डेयरी के अनुसार, नई पैकेजिंग में एक विशेष डिग्रेडेबल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह पैकेजिंग समय के साथ बायो-अवेलेबल वैक्स में बदल जाती है। इसके बाद मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव यानी माइक्रोब्स इसे प्राकृतिक तत्वों में परिवर्तित कर देते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रक्रिया के बाद पर्यावरण में प्लास्टिक का कोई स्थायी अवशेष नहीं बचता। पारंपरिक प्लास्टिक जहां सैकड़ों वर्षों तक जमीन और जल स्रोतों को प्रभावित कर सकती है, वहीं यह नई थैली कुछ वर्षों में ही प्राकृतिक रूप से समाप्त हो जाएगी।

चार साल की रिसर्च के बाद मिली सफलता

मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक जयतीर्था चारी के मुताबिक इस तकनीक को विकसित करने में चार साल से अधिक समय लगा है। इस दौरान पैकेजिंग की मजबूती, सुरक्षा, दूध की गुणवत्ता पर प्रभाव और पर्यावरणीय मानकों को लेकर लगातार परीक्षण किए गए। कंपनी का कहना है कि नई थैलियां पूरी तरह रिसाइकिल योग्य भी रहेंगी। यानी उपभोक्ता चाहें तो इन्हें सामान्य प्लास्टिक की तरह रिसाइक्लिंग चैन में भेज सकते हैं और यदि ऐसा नहीं होता है तो भी यह समय के साथ प्राकृतिक रूप से नष्ट हो जाएंगी।

क्या दूध महंगा होगा?

नई तकनीक आने के बाद उपभोक्ताओं के मन में यह चिंता भी उठ सकती है कि क्या दूध की कीमत बढ़ेगी? इस पर राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के अध्यक्ष मीनेश शाह ने स्पष्ट किया है कि नई पैकेजिंग अपनाने के बावजूद दूध की कीमतों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा।

यानी ग्राहकों को पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग का लाभ मिलेगा, लेकिन इसके लिए उन्हें अतिरिक्त पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे। कंपनी का यह कदम इसलिए भी बेहतरीन माना जा रहा है क्योंकि अक्सर टिकाऊ और पर्यावरण हितैषी पैकेजिंग उत्पादों की लागत बढ़ा देती है।

भारत में प्लास्टिक कचरे की चुनौती

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार भारत में हर साल लाखों टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है। इसमें खाद्य और डेयरी उत्पादों की पैकेजिंग का भी बड़ा योगदान है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े पैमाने पर उपभोक्ता उत्पाद कंपनियां ऐसी डिग्रेडेबल पैकेजिंग अपनाती हैं तो प्लास्टिक प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मदर डेयरी की पहल इस दिशा में एक उदाहरण बन सकती है, जिसे भविष्य में अन्य कंपनियां भी अपनाएं।

रोजाना 55 लाख लीटर दूध बेचती है कंपनी

वर्ष 1974 में स्थापित मदर डेयरी आज देश की सबसे बड़ी डेयरी कंपनियों में शामिल है। कंपनी प्रतिदिन लगभग 55 लाख लीटर दूध की बिक्री करती है। यह राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।

दूध और डेयरी उत्पादों के अलावा कंपनी ‘धारा’ ब्रांड के तहत खाद्य तेल तथा ‘सफल’ ब्रांड के माध्यम से फल, सब्जियां और फ्रोजन फूड उत्पाद भी बेचती है।

पर्यावरण के लिए क्यों अहम है यह पहल?

विशेषज्ञों का मानना है कि प्लास्टिक प्रदूषण आने वाले वर्षों में दुनिया की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक रहेगा। ऐसे में अगर रोजमर्रा के उत्पादों की पैकेजिंग को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जाए तो इसका सकारात्मक असर लंबे समय तक दिखाई देगा।

मदर डेयरी की नई डिग्रेडेबल दूध थैली सिर्फ एक पैकेजिंग बदलाव नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि भारतीय उद्योग अब पर्यावरण और व्यवसाय के बीच संतुलन बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो आने वाले समय में देश के डेयरी और अन्य क्षेत्र में पैकेजिंग का नया दौर शुरू हो सकता है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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