Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि नवीं देवी -माता सिद्धिदात्री

Chaitra Navratri Maa Siddhidatri: चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि पर माँ सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व है। जानिए माता का स्वरूप, पूजन विधि, भोग, मंत्र और सिद्धियों का महत्व, जिससे जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

Dr. A K Pandey Astrologer
Published on: 26 March 2026 1:45 PM IST
Chaitra Navratri Maa Siddhidatri
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Chaitra Navratri Maa Siddhidatri (Image Credit-Social Media)

सिद्धगंधर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि ।

सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ।।

देवी आराधना के पर्व नवरात्रि की नवमी तिथि में नवदुर्गाओं में माता सिद्धिदात्री अंतिम हैं । नवरात्रि में अन्य आठ दुर्गाओं की पूजा , आराधना , शास्त्रीय विधि-विधान के आधार पर करते हुए , साधक गण नवमी के दिन माता सिद्धिदात्री की आराधना करते हैं । माता की उपासना भली प्रकार कर लेने के बाद , आराधक को लौकिक तथा पारलौकिक सभी प्रकार के कामनाओं की प्राप्ति हो जाती है ।

वास्तविकता तो यह है , कि सिद्धिदात्री माता के कृपा- पात्र भक्तों के मन में ऐसी कोई इच्छा ही नहीं बचती है , जिसे वह प्राप्त करना चाहता हो । यानि वह समस्त प्रकार की सांसारिकता से ऊपर उठकर , माता के चरणों में ध्यान करता हुआ अन्य दुःखों से दूर हो जाता है ।

माता का स्वरूप -

पुराणों के अनुसार भगवान शंकर को माता सिद्धिदात्री की कृपा से, आधा देवी का शरीर प्राप्त हुआ था ।इसीलिए भगवान शिव को अर्धनारीश्वर भी कहते हैं ।

माता चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह है , तथा कमल के पुष्प पर इनका आसन है । दाहिनी ओर के नीचे वाले हाथ में चक्र , कमल पुष्प है।

पूजन विधि -

आज के दिन माता की आराधना विधि विधान से करनी चाहिए । पूर्व में बताए गए दिनों के अनुसार समस्त शास्त्रीय विधि से , और पूर्ण मनोयोग से माता की साधना करनी चाहिए। इससे साधक को सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त हो जाती हैं । लकड़ी की चौकी पर माता की प्रतिमा को स्थापित कर इनकी विधिवत पूजा करनी चाहिए । माता सिद्धिदात्री अपने नाम के अनुसार ही समस्त प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं।

मार्कंडेय पुराण के अनुसार यह सिद्धियां आठ प्रकार की होती हैं । ब्रह्म वैवर्त पुराण में इन सिद्धियों की संख्या 18 बताई गई है।

माता का भोग -

नवम्यां लाजमम्बायै चार्पयित्वा द्विजाय च ।

दत्वा सुखाधिको भूयादिह लोके परत्र च ।।

अर्थात् नवमी के दिन माता भगवती को लावा अर्पण करने के पश्चात् , ब्राह्मण को भी लावा का दान करने से , आराधक समस्त लोकों में सुखी रहता है ।

इस प्रकार से बताए गए भगवती के स्वरूप का पूजन , और विधिपूर्वक अनुष्ठान करने से साधक का उद्धार हो जाता है।

भगवती की साधना करने वाला मनुष्य प्रतिष्ठा को प्राप्त करता है , और समाज में सम्माननीय हो जाता है । उसे योग्य संतान का पर्याप्त सुख भी मिलता है ।

शुभम् भवतु

डॉ. ए. के. पाण्डेय

Dr. A.K. Pandey (Astro & Vastu), a highly rated Vedic astrologer and Vastu consultant from Pune, has over 36 years of experience in the field of astrology and Vastu Shastra. He is known for his in-depth astrological insights, accurate predictions, and practical Vastu guidance. In addition to his consultancy work, Dr. Pandey also writes astrology-related articles and weekly horoscope columns for Newstrack.com, sharing his expertise with a wide audience across India.

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