गाड़ी चलाते समय तेज म्यूजिक सुनना कितना खतरनाक? रिसर्च में चौंकाने वाले खुलासे

Driving and Loud Music: ड्राइविंग के दौरान तेज म्यूजिक सुनना आपकी और दूसरों की जान के लिए खतरा बन सकता है। एक्सपर्ट्स और रिसर्च क्या कहती हैं, जानिए पूरी रिपोर्ट।

Jyotsana Singh
Published on: 3 Jan 2026 5:04 PM IST
गाड़ी चलाते समय तेज म्यूजिक सुनना कितना खतरनाक? रिसर्च में चौंकाने वाले खुलासे
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How High Volume Music Increases Accident Risk, Experts Warn

Driving and Loud Music: आज के समय में बढ़ती ट्रैफिक समस्या के बीच गाड़ी चलाना सिर्फ रोजमर्रा की गतिविधि नहीं बल्कि एक चुनौती भी बन गया है। सड़क पर ट्रैफिक, नियम और आसपास के वाहन इन सब पर ध्यान रखना जरूरी होता है। ऐसे में कई लोग ड्राइविंग के दौरान अपनी पसंद के गाने सुनते हैं। कभी-कभी यह आदत इतनी बढ़ जाती है कि लोग तेज आवाज में म्यूजिक सुनने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपके लिए और सड़क पर मौजूद दूसरों के लिए खतरनाक हो सकती है? एक्सपर्ट्स और वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि तेज संगीत सुनना आपकी ड्राइविंग क्षमता को प्रभावित कर सकता है और सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकता है। आइए इस बारे में जानते हैं विस्तार से -

तेज संगीत सुनने से मानसिक और शारीरिक असर

जब आप ड्राइविंग करते समय तेज आवाज में गाना सुनते हैं, तो सिर्फ कानों में संगीत नहीं पहुंचता, बल्कि आपका दिमाग और शरीर भी प्रभावित होता है। तेज संगीत हार्ट बीट बढ़ा देता है और तनाव पैदा करता है। तनाव के कारण आपकी निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे अचानक ब्रेक लगाने या पैदल यात्री से बचने जैसी परिस्थितियों में प्रतिक्रिया धीमी हो सकती है। ऐसे में दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है और ड्राइवर की सुरक्षा के साथ-साथ सड़क पर मौजूद अन्य लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है।

सर्वे और लोगों की आदतें

एक हालिया सर्वे के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत लोग ड्राइविंग करते समय तेज आवाज में गाने सुनने की आदत रखते हैं। ज्यादातर लोग ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह थकान कम करता है या लंबी ड्राइव को मजेदार बनाता है। हालांकि, यह आदत केवल व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित नहीं रहती। तेज संगीत सुनते समय ध्यान भटकता है और सड़क नियमों की अनदेखी होने लगती है। इससे दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है और यह सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

वैज्ञानिक शोध और ड्राइविंग क्षमता

शोध बताते हैं कि तेज आवाज में गाने सुनने से ड्राइवर का ध्यान गाड़ी पर कम रहता है। ऐसे समय में उसका नियंत्रण कमजोर हो जाता है और वह सड़क पर अचानक आने वाले खतरों को सही से नहीं पहचान पाता। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि अगर ड्राइवर अपनी पसंद के गाने सुनता है, तो उसकी ड्राइविंग स्किल बेहतर हो सकती है। पसंद के गाने थकान कम करते हैं और ध्यान केंद्रित रखने में मदद करते हैं। वहीं, अगर कोई ऐसा संगीत सुनता है जिसे वह पसंद नहीं करता या जिसे मजबूरी में सुनना पड़ता है, तो उसकी प्रतिक्रिया धीमी हो जाती है और गलती करने की संभावना बढ़ जाती है।

संगीत के साथ ड्राइव क्यों है नए ड्राइवर्स के लिए ज्यादा खतरा

20 से 28 साल के नए ड्राइवर्स पर किए गए शोध में पाया गया कि ये लोग तेज संगीत सुनते समय ज्यादा ध्यान भटकाने वाले होते हैं। उन्होंने खुद माना कि तेज आवाज में गाने सुनने से उनकी गाड़ी की स्पीड अक्सर बढ़ जाती है और वे स्पीड लिमिट का उल्लंघन कर सकते हैं। लंबे रूट पर ड्राइविंग करते समय थकान दूर करने के लिए गाने सुनना केवल 20 से 25 मिनट तक ही असर करता है। इसके बाद गानों का प्रभाव धीरे-धीरे खत्म हो जाता है और जोखिम फिर बढ़ने लगता है।

सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार ड्राइविंग

सड़क पर सुरक्षित रहने के लिए हमारी आदतें बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। तेज संगीत सुनना मनोरंजन का तरीका हो सकता है, लेकिन इसे सावधानी से ही अपनाना चाहिए। सही वॉल्यूम में गाने सुनना चाहिए ताकि आसपास की आवाजें भी सुनाई दें। अपने पसंद के गाने चुनें क्योंकि यह ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। लंबे रूट पर समय-समय पर ब्रेक लेना जरूरी है, क्योंकि लंबे समय तक गाने सुनने से थकान कम नहीं होती। नए ड्राइवर्स को तेज संगीत से बचना चाहिए और पूरी तरह ड्राइविंग पर ध्यान देना चाहिए।

ड्राइविंग करते समय तेज संगीत सुनना केवल एक आदत नहीं बल्कि सड़क पर सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। शोध और सर्वे बताते हैं कि तेज संगीत ड्राइवर का ध्यान भटका सकता है, प्रतिक्रिया धीमी कर सकता है और दुर्घटना की संभावना बढ़ा सकता है। सही वॉल्यूम में पसंदीदा संगीत सुनना मानसिक तनाव कम करने और ड्राइविंग अनुभव बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। सड़क पर सुरक्षित रहने की जिम्मेदारी हम सभी की है। हमारी छोटी-छोटी आदतें ही सड़क सुरक्षा तय करती हैं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी वैज्ञानिक शोध और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई गतिविधि या अभ्यास को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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