TRENDING TAGS :
आसमान में होगी राजनीति और क्रिकेट की जंग..जयपुर में छाया सेलिब्रिटी फेस वाली पतंगों का क्रेज
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति से पहले जयपुर का पतंग बाजार सोशल मीडिया पर वायरल, सेलिब्रिटी चेहरों वाली पतंगें बनीं आकर्षण का केंद्र
Celebrity Kites Take Over Jaipur Before Makar Sankranti 2026
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति से ठीक पहले देशभर में पतंगबाजी का उत्साह चरम पर है। बाजारों में रंग-बिरंगी पतंगों की रौनक लौट आई है और दो दिनों के लिए आसमान मानो उत्सव का कैनवास बनने जा रहा है। इसी बीच राजस्थान की राजधानी जयपुर का एक पतंग बाजार सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गया है। वजह है, सेलिब्रिटी चेहरों वाली पतंगें। विराट कोहली, डोनाल्ड ट्रंप, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर ममता बनर्जी और अशोक गहलोत तक, इस बार जयपुर के आसमान में नामी चेहरों की ‘उड़ान’ देखने को मिलेगी। इन अनोखी पतंगों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है और लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं।
जयपुर के बाजार में क्यों खास हैं इस बार की पतंगें?
हर साल मकर संक्रांति से पहले जयपुर के पतंग बाजारों में खास चहल-पहल रहती है, लेकिन इस बार कुछ अलग है। पारंपरिक डिजाइन, देवी-देवताओं, फूल-पत्तियों और ज्योमेट्रिक पैटर्न के साथ-साथ दुकानों में सेलिब्रिटी फेस वाली पतंगें भी सजी हैं। इन पतंगों पर छपे चेहरे इतने साफ और आकर्षक हैं कि लोग सिर्फ पतंग उड़ाने के लिए नहीं, बल्कि कलेक्शन के तौर पर भी खरीद रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों के मुताबिक, युवाओं और बच्चों में इन पतंगों की खास डिमांड है। क्रिकेट प्रेमियों के लिए विराट कोहली, राजनीति में रुचि रखने वालों के लिए नरेंद्र मोदी, ममता बनर्जी या अशोक गहलोत और अंतरराष्ट्रीय चेहरों में डोनाल्ड ट्रंप हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ मौजूद है। यही वजह है कि जयपुर का यह बाजार सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई उत्सुकता
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में जयपुर के एक पतंग बाजार की झलक दिखाई देती है, जहां अलग-अलग सेलिब्रिटी चेहरों वाली पतंगें टंगी नजर आ रही हैं। वीडियो देखते ही देखते हजारों-लाखों लोगों तक पहुंच गया। यूजर्स मजेदार कमेंट्स कर रहे हैं। कोई पूछ रहा है 'किसकी पतंग सबसे पहले कटेगी?', तो कोई कह रहा है इस बार आसमान भी 'सेलिब्रिटीमय होगा।' इस वायरल ट्रेंड ने न सिर्फ दुकानदारों की बिक्री बढ़ाई है, बल्कि जयपुर को एक बार फिर पतंगबाजी के केंद्र के रूप में चर्चा में ला दिया है।
मकर संक्रांति और पतंगबाजी का खास रिश्ता
भारत में मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन और सूर्य उपासना का प्रतीक है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है। माना जाता है कि इस समय सूर्य की किरणें स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं। खुले आसमान में पतंग उड़ाना न सिर्फ मनोरंजन है, बल्कि शरीर को धूप से विटामिन-डी भी मिलता है। यही वजह है कि मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा खास तौर पर गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बहुत लोकप्रिय है। जयपुर, अहमदाबाद, सूरत और लखनऊ जैसे शहर इस दौरान रंगीन पतंगों से भर जाते हैं।
भारत में पतंगबाजी की परंपरा की शुरुआत कैसे हुई?
पतंगबाजी का इतिहास भारत में काफी पुराना है। माना जाता है कि पतंगें सबसे पहले चीन में बनाई गईं और वहां से यह कला एशिया के अन्य हिस्सों में फैली। भारत में पतंगबाजी का प्रवेश लगभग 2,000 साल पहले हुआ माना जाता है। शुरुआती दौर में पतंगों का उपयोग वैज्ञानिक प्रयोगों और सैन्य संकेतों के लिए किया जाता था। मध्यकाल में, खासकर मुगल काल के दौरान, पतंगबाजी को शाही संरक्षण मिला। मुगल बादशाह और राजघराने पतंग उड़ाने को शौक और कला के रूप में देखते थे। अकबर और जहांगीर के दौर में पतंगबाजी प्रतियोगिताएं आयोजित होती थीं, जिनमें खास डिजाइन और मजबूत मांझे वाली पतंगें इस्तेमाल की जाती थीं। धीरे-धीरे यह शाही शौक आम जनता तक पहुंचा और त्योहारों से जुड़ गया। मकर संक्रांति, बसंत पंचमी और स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसरों पर पतंग उड़ाना परंपरा बन गई।
राजस्थान और गुजरात में पतंगबाजी की अलग पहचान
राजस्थान में जयपुर, जोधपुर और बीकानेर जैसे शहर पतंगबाजी के लिए मशहूर हैं। यहां की पतंगों में पारंपरिक राजस्थानी रंग, लोककला और अब आधुनिक सेलिब्रिटी डिजाइन भी देखने को मिलते हैं। वहीं गुजरात में मकर संक्रांति पर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव आयोजित होता है, जहां देश-विदेश से लोग शामिल होते हैं। वहां पतंगबाजी सिर्फ खेल नहीं, बल्कि एक बड़े सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले चुकी है।
बदलते वक्त के साथ बदलती पतंगें
पहले पतंगें साधारण कागज और बांस की खपच्चियों से बनती थीं। डिजाइन सीमित होते थे, लेकिन आज तकनीक और क्रिएटिविटी ने पतंगों का रूप बदल दिया है। अब डिजिटल प्रिंटिंग से सेलिब्रिटी चेहरे, कार्टून कैरेक्टर, देशभक्ति से जुड़े चित्र और सामाजिक संदेश तक पतंगों पर छप रहे हैं।
जयपुर में आई सेलिब्रिटी फेस वाली पतंगें इसी बदलते ट्रेंड का उदाहरण हैं। दुकानदारों का कहना है कि हर साल कुछ नया लाना जरूरी हो गया है, ताकि ग्राहक आकर्षित हों और बाजार में अलग पहचान बने।
सोशल मीडिया और पतंगबाजी का नया कनेक्शन
आज के दौर में सोशल मीडिया किसी भी ट्रेंड को तेजी से फैलाने का काम करता है। जयपुर की इन पतंगों का वीडियो वायरल होते ही लोगों में उत्सुकता बढ़ गई। कई लोग सिर्फ वीडियो देखकर ही बाजार पहुंचने की योजना बना रहे हैं। यानी परंपराएं अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए नए रूप में सामने आ रही हैं। पतंगबाजी जैसी पुरानी परंपरा भी अब सोशल मीडिया ट्रेंड का हिस्सा बन चुकी है।
सुरक्षा और जिम्मेदारी भी जरूरी
जहां पतंगबाजी आनंद और उत्साह का पर्व है, वहीं सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। सिंथेटिक या धारदार मांझे से बचना, पक्षियों और लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। कई राज्यों में सुरक्षित मांझे के इस्तेमाल की अपील की जा रही है, ताकि यह त्योहार खुशियों के साथ मनाया जा सके।
डिस्क्लेमर: यह लेख सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, सार्वजनिक सूचनाओं और स्थानीय बाजारों में उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। इसमें उल्लिखित व्यक्तियों या चेहरों का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक व सामाजिक ट्रेंड को दर्शाना है, न कि किसी प्रकार का राजनीतिक समर्थन, विरोध या प्रचार।


