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आग बुझाएं या कवरेज करें : पत्रकारिता की संवेदनशीलता पर दो सच्चे प्रसंग
Journalism Ethics India: दो वास्तविक घटनाएँ, जो पत्रकारिता में नैतिक दुविधाओं और सनसनीखेज़पन के ऊपर मानवता के महत्व को उजागर करती हैं।
Journalism Ethics India: हाल ही में चर्चित पत्रकार अजित अंजुम द्वारा अपने अपार्टमेंट में आग लगने की घटना के दौरान ‘लाइव कवरेज (सीधा प्रसारण)’ करने को लेकर बहस छिड़ी हुई है। इस संदर्भ में पत्रकारिता की भूमिका और संवेदनशीलता पर विचार करना जरूरी हो जाता है।
इसी विषय से जुड़े दो अनुभव पत्रकारिता के मूल स्वरूप को समझने में मदद करते हैं—
पहला प्रसंग : इंसानियत बनाम खबर
लखनऊ के एक बड़े अखबार के वरिष्ठ ‘छायाकार (फोटोग्राफर)’ ने अपने संपादक को एक ‘विशेष (एक्सक्लूसिव)’ तस्वीर दिखाई। यह तस्वीर एक व्यक्ति के ‘आत्मदाह (सेल्फ इमॉलेशन)’ की थी।
चारबाग निवासी मंजीत नामक व्यक्ति ने पुलिस उत्पीड़न से परेशान होकर विधानसभा के सामने स्वयं को आग लगा ली थी। छायाकार ने इस घटना की तस्वीर ली और उसे अपनी उपलब्धि मानकर संपादक को दिखाया।
लेकिन संपादक की प्रतिक्रिया अप्रत्याशित थी। उन्होंने छायाकार को फटकार लगाते हुए कहा—
“तुम्हारा पहला कर्तव्य एक इंसान की जान बचाना था, न कि तस्वीर लेना।”
उन्होंने अपने ‘संपादकीय (एडिटोरियल)’ में भी यह स्पष्ट लिखा कि ऐसी परिस्थितियों में पत्रकारिता से पहले इंसानियत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
दूसरा प्रसंग : संवेदना बनाम सनसनी
एक ‘टेलीविजन चैनल (टीवी चैनल)’ में ‘समाचार आधारित कार्यक्रम (न्यूज बेस्ड प्रोग्राम)’ के लिए ‘चिकित्सीय लापरवाही (मेडिकल नेग्लिजेंस)’ पर काम किया जा रहा था।
रिपोर्ट में बताया गया कि ‘केजीएमयू (किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी)’ में इलाज में लापरवाही के कारण एक आठ वर्षीय बच्चे का हाथ काटना पड़ा। यह घटना पुरानी थी।
जब रिपोर्टिंग टीम बच्चे के घर पहुंची, तो उन्होंने ‘भावनात्मक प्रभाव (इमोशनल एंगल)’ बढ़ाने के लिए ऐसे सवाल पूछे, जिससे बच्चे के माता-पिता रो पड़े। रिपोर्टर को लगा कि ये आंसू उनकी ‘विशेषता (यूएसपी)’ बनेंगे।
लेकिन जब यह फुटेज वरिष्ठ अधिकारी को दिखाया गया, तो वे नाराज हो गए। उन्होंने कहा—
“किसी के घावों को कुरेदकर खबर को प्रभावी बनाना पत्रकारिता नहीं, बल्कि अमानवीयता है।”
पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रति जिम्मेदारी भी है।
‘कवरेज (रिपोर्टिंग)’ से पहले ‘संवेदनशीलता (सेंसिटिविटी)’ और ‘मानवता (ह्यूमैनिटी)’ का ध्यान रखना आवश्यक है।
( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। ये इनके निजी विचार हैं।)


