TRENDING TAGS :
Office Chair History: ऑफिस चेयर की रोचक कहानी, पहियों वाली कुर्सी ने कैसे बदला कार्यस्थल
Office Chair History: जानिए दुनिया की पहली पहिए वाली ऑफिस चेयर की रोचक कहानी। कैसे थॉमस ई. वॉरन ने 19वीं सदी में ‘सेंट्रिपेटल चेयर’ का आविष्कार किया और आधुनिक ऑफिस चेयर की नींव रखी।
Office Chair History Success Story Thomas E Warren
Office Chair History: हर आविष्कार के पीछे एक रोचक कहानी होती है और उन कहानियों को जानने के लिए मन में उत्सुकता भी बनी रहती है, लेकिन इन कहानियों को जानने के लिए आपको अतीत में मुड़कर देखना होगा। इतिहास की ऐसी ही एक कहानी है, आज हर तरह के दफ्तरों में काम आने वाली कुर्सी की, जिसे आम तौर पर 'ऑफिस चेयर' कहते हैं। वैसे सबसे पहली कुर्सी के इस्तेमाल का प्रमाण मिस्र में मिलता है, जिसका इस्तेमाल उस समय के कारीगर काम करने के दौरान बैठने के लिए करते थे। लेकिन आज की आरामदायक ऑफिस चेयर के आविष्कारक थॉमस ई. वॉरन थे।
19वीं सदी के मध्य में रेल परिवहन की शुरुआत के साथ ही व्यवसायों का भी विस्तार होना शुरू हो गया, जिस वजह से कर्मचारियों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई। कर्मचारी हर दिन घंटों एक ही जगह पर बैठकर अपना काम किया करते थे, जिस वजह से उन्हें एक आरामदायक कुर्सी को जरूरत थी और इस जरूरत को पूरा करने में जुट गए वॉरैन। वॉरन ने एक आम सी दिखने वाली कुर्सी में पहिए लगाए, जिसे 1851 में लंदन की एक बड़ी प्रदर्शनी में अमेरिकन चेयर कंपनी द्वारा लॉन्च किया गया। यूरिन ने कुर्सी के पैरों की जगह पर पहिये लगाए, ताकि कार्यालय कर्मचारी अपनी जगह से बिना खड़े हुए अपने आसपास की लाइब्रेरी-शेल्फ या साइड-टेबल की ओर आसानी से मुड़ पाए। इसे 'सेंट्रिपेटल चेयर' के नाम से जाना गया।
वरिन ने इस ऑफिसचेयर को आरामदायक बनाने के लिए कई नवीन तकनीकों का उपयोग किया गया, ताकि कुर्सी आसानी से जिस दिशा भी दिशा में मोड़नी हो, मोड़ी जा सके। इसमें इस्तेमान किए गए शीट स्टील, स्प्रिंग्स और सजावटी रूप से डाले गए लोहे को छिपाने व सिटर को आराम महसूस कराने के लिए रूई, मखमली कपड़े और नीचे की स्प्रिंग्स को छिपाने के लिए 'झालर' का इस्तेमाल किया गया। कुर्सी मखमली और आरामदायक थी, लेकिन फिर भी संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर यह बहुत कम बिकी और इसका कारण था उस समय में प्रचलित धारणाएं। उस समय दुनियां में प्रचलित विक्टोरियन मानदंडों के अनुसार आरामदायक बैठना अनैतिक माना जाता था। 'थॉमस ई. परिन ने 1849 में इस कुर्सी का पेटेंट हासिल किया था।
( साभार ‘अमर उजाला ‘। लेखक साहित्यकार हैं।)
-महेंद्र कौशिक


