Shri Ram Katha Hindi: संतकृपा से मिलता है राम प्रेम!

Prabhu Shri Ram Katha in Hindi: जानिए गोस्वामी तुलसीदास जी के अनुसार संतों की कृपा से कैसे प्राप्त होती है श्रीरामचरणों में सच्ची प्रीति। पढ़ें संतों की महिमा, रामभक्ति और निष्कपट प्रेम का आध्यात्मिक भाव।

Newstrack Network
Published on: 6 Jun 2026 6:08 PM IST
Ramcharitmanas Ram Ki Kahani
X

Ramcharitmanas Ram Ki Kahani 

संत सरल चित जगत हित जानि सुभाउ सनेहु।

बालबिनय सुनि करि कृपा राम चरन रति देहु॥ १/३ (ख)

सरल चित्त और जगत के हितकारी संतजन मेरे शुभ भाव और स्नेह को जानकर तथा इस बालक की विनय सुनकर कृपा करके श्रीरामजी के चरणों में प्रीति प्रदान करें।

संतों का चित्त अत्यन्त सरल होता है। उनके मन में जो होता है, वही वे बोलते हैं और वही आचरण में भी लाते हैं। जगत का कल्याण करना उनका स्वाभाविक धर्म है। इसलिए वे कभी ऐसी वस्तु नहीं देते, जिससे लोक का अनिष्ट हो। यदि कोई अनुचित वस्तु माँगे भी, तो संत उसे स्वीकार नहीं करते।

गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि मेरी भावना शुभ है, निष्कपट है और जगत के हित के अनुकूल है। अतः संतजन उस भाव को पहचानकर मुझ पर कृपा करें।

अपने को बालक कहकर तुलसीदास जी ने यह संकेत किया है कि संत ही वास्तव में जीव के माता-पिता हैं। बालक स्वाभाविक रूप से अपने माता-पिता से ही माँगता है। इसलिए वे विनयपूर्वक प्रार्थना करते हैं— “हे संतों! मुझ पर कृपा कीजिए और श्रीरामचरणों में प्रेम प्रदान कीजिए।”

एक और भाव यह है कि तुलसीदास जी स्वयं को अयोग्य और अल्पज्ञ मानते हैं। वे मानो कह रहे हैं— “मैं तो एक बालक हूँ, मुझसे आपकी यथोचित स्तुति भी नहीं बनती। यदि मेरी वाणी में त्रुटि हो, तो भी कृपा कर मुझे श्रीरामभक्ति प्रदान करें।”

अन्ततः भाव यही है कि संतजन भक्ति के भण्डार हैं। श्रीरामचरणों की सच्ची प्रीति उन्हीं की कृपा से प्राप्त होती है।

Newstrack Network
ABOUT THE AUTHOR

Newstrack Network

Newstrack is one of the most Trusted and Popular news portal of India. Remain updated and aware, only on Newstrack

Next Story