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Election 2024: नालंदा में नीतीश कुमार की प्रतिष्ठा दांव पर, गृह जिले में जदयू प्रत्याशी कौशलेंद्र को भाकपा माले की कड़ी चुनौती

Lok Sabha Election 2024: विपक्षी महागठबंधन में यह सीट भाकपा माले को मिली है और पार्टी ने 36 वर्षीय युवा संदीप सौरव पर दांव लगाया है।

Anshuman Tiwari
Written By Anshuman Tiwari
Published on: 28 May 2024 9:19 AM GMT
CM Nitish Kumar AND Kaushalendra Kumar
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CM Nitish Kumar AND Kaushalendra Kumar (photo: social media )

Lok Sabha Election 2024: बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार का गृह जिला होने के कारण नालंदा लोकसभा सीट पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं। 1996 से 2019 तक इस लोकसभा सीट से उसी उम्मीदवार को जीत हासिल हुई जिसके सिर पर नीतीश कुमार का हाथ रहा है। नीतीश खुद भी एक बार इस लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं। यही कारण है कि नालंदा लोकसभा सीट के चुनाव को नीतीश कुमार के लिए प्रतिष्ठा की जंग माना जा रहा है।

नीतीश कुमार ने एक बार फिर इस लोकसभा क्षेत्र में कौशलेंद्र कुमार पर दांव लगाया है। वे पिछले तीन चुनावों में जीत हासिल करने के बाद चौथी जीत की तलाश में इस बार इस लोकसभा सीट पर किस्मत आजमा रहे हैं। विपक्षी महागठबंधन में यह सीट भाकपा माले को मिली है और पार्टी ने 36 वर्षीय युवा संदीप सौरव पर दांव लगाया है। देश के प्रतिष्ठित जेएनयू से पीएचडी करने वाले संदीप इस बार कौशलेंद्र को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। नालंदा लोकसभा सीट पर आखिरी चरण में एक जून को मतदान होना है और प्रचार के आखिरी दिनों में दोनों प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक रखी है।

1996 से बना हुआ है जदयू का कब्जा

नालंदा लोकसभा सीट पर नीतीश कुमार के प्रभुत्व को इसी बात से समझा जा सकता है कि 1996 से उनकी पार्टी लगातार इस सीट पर जीत हासिल करती रही है। पार्टी के दिग्गज नेता जार्ज फर्नांडिस ने इस सीट पर 1996, 1998 और 1999 में जीत हासिल की थी। 2004 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर नीतीश कुमार ने खुद जीत हासिल की थी। हालांकि उस वर्ष बाढ़ संसदीय सीट पर नीतीश को हार का सामना करना पड़ा था। नीतीश की जीत में कौशलेंद्र कुमार ने काफी मेहनत की थी और इसी का नतीजा था कि 2009 के चुनाव में नीतीश ने कौशलेंद्र कुमार को यहां से चुनावी अखाड़े में उतारा था।

इस सीट पर चुनाव मैदान में उतरने के बाद से कौशलेंद्र कुमार ने कभी भी नीतीश कुमार को निराश नहीं किया। वे 2009, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करते हुए इस सीट पर हैट्रिक लगा चुके हैं। एनडीए में हुए सीट बंटवारे में नालंदा लोकसभा सीट जदयू के खाते में गई है और पार्टी ने एक बार फिर कौशलेंद्र कुमार पर ही भरोसा जताया है। नालंदा लोकसभा क्षेत्र में लगातार चौथी जीत हासिल करने के लिए कौशलेंद्र कुमार ने पूरी ताकत लगा रखी है। नीतीश कुमार ने भी उनके लिए खूब प्रचार किया है।


भाकपा माले ने युवा संदीप पर जताया भरोसा

दूसरी ओर विपक्षी महागठबंधन में हुए सीट बंटवारे में यह सीट भाकपा माले के खाते में गई है। भाकपा माले को इस बार बिहार में तीन लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिला है और नालंदा लोकसभा सीट भी उनमें से एक है। भाकपा माले ने इस बार युवा उम्मीदवार संदीप सौरव को चुनाव मैदान में उतार कर नीतीश कुमार और कौशलेंद्र कुमार के सियासी प्रभुत्व को तोड़ने का ताना-बना बुना है।

संदीप सौरव छात्र राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वे छात्रसंघ के महासचिव रह चुके हैं। जेएनयू से पीएचडी करने वाले संदीप सौरव ने नौकरी छोड़कर 2017 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। भाकपा माले में शामिल होने के बाद उन्होंने 2020 में पालीगंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। अब वे नालंदा के लोकसभा चुनाव में जदयू को चुनौती देने की कोशिश में जुटे हुए हैं। नालंदा लोकसभा क्षेत्र में यूं तो 29 प्रत्याशी मैदान में है मगर मुख्य मुकाबला जदयू और भाकपा माले के बीच ही माना जा रहा है।


जातीय समीकरण साधकर जदयू को मिलती रही जीत

नालंदा लोकसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दबदबे का पुख्ता आधार है। दरअसल बिहार में कुर्मी मतदाताओं पर नीतीश कुमार की मजबूत पकड़ मानी जाती रही है और नालंदा लोकसभा क्षेत्र में 24 फ़ीसदी कुर्मी मतदाता नीतीश कुमार की पार्टी की जीत सुनिश्चित कर देते हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में यादव मतदाताओं की संख्या करीब 15 फीसदी है। ओबीसी मतदाता करीब 40 फ़ीसदी और मुस्लिम मतदाता करीब 10 फीसदी हैं।

पिछले चुनावों में ओबीसी और कुर्मी मतदाताओं का समर्थन जदयू को हासिल होता रहा है और इसी कारण पार्टी ने लंबे समय से नालंदा लोकसभा सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। इस बार भी जदयू प्रत्याशी जातीय समीकरण साधते हुए जीत हासिल करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

जातीय समीकरण के लिहाज से इस बार के चुनाव में भी उनकी स्थिति मजबूत मानी जा रही है। वैसे इलाके के लोगों का कहना है कि इस बार जंग इतनी आसान नहीं है और जदयू और भाकपा माले के बीच दिलचस्प मुकाबला होने की उम्मीद जताई जा रही है।


इस बार जदयू को मिल रही कड़ी चुनौती

प्राचीन काल से ही ज्ञान का बड़ा केंद्र माने जाने वाले नालंदा के चुनाव पर बिहार में सबकी निगाहें लगी हुई हैं क्योंकि यह चुनाव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए नाक का सवाल बन गया है। जदयू प्रत्याशी कौशलेंद्र कुमार का कहना है कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार में विकास के कामों में तेजी आई है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में कामयाबी मिली है। उनका कहना है कि क्षेत्र में कराए गए कामों के दम पर मुझे इस बार भी जीत हासिल होने की उम्मीद है।

दूसरी ओर भाकपा माले के प्रत्याशी संदीप सौरव का कहना है कि नालंदा में नीतीश कुमार की मजबूती अब खत्म हो चुकी है। उनका दावा है कि उनका चुनाव वे खुद नहीं बल्कि नालंदा की जनता लड़ रही है। वे इस बार नालंदा में बड़ा सियासी उलटफेर करने का दावा करते हैं। भाकपा इस सीट पर कई बार जीत हासिल कर चुकी है और उसका भी इसी इलाके में मजबूत वोट बैंक रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि नीतीश कुमार की ओर से पूरी ताकत लगाए जाने के बावजूद उनके प्रत्याशी कौशलेंद्र कुमार को भाकपा माले की ओर से इस बार कड़ी चुनौती मिलेगी।



Monika

Monika

Content Writer

पत्रकारिता के क्षेत्र में मुझे 4 सालों का अनुभव हैं. जिसमें मैंने मनोरंजन, लाइफस्टाइल से लेकर नेशनल और इंटरनेशनल ख़बरें लिखी. साथ ही साथ वायस ओवर का भी काम किया. मैंने बीए जर्नलिज्म के बाद MJMC किया है

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