Adhik Maas 2026: अधिकमास में इस एक धाम के दर्शन से चमक उठती है किस्मत, सालभर नहीं रहती धन की कमी

Adhik Maas 2026: पुरुषोत्तम मास में जगन्नाथ पुरी के दर्शन को अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस पावन समय में की गई यात्रा से आर्थिक स्थिरता, मानसिक शांति और जीवन में शुभता बनी रहती है।

Jyotsana Singh
Published on: 16 Dec 2025 4:21 PM IST
Adhik Maas 2026: अधिकमास में इस एक धाम के दर्शन से चमक उठती है किस्मत, सालभर नहीं रहती धन की कमी
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Adhik Maas 2026: सांस्कृतिक और धार्मिक त्योहारों से पूरे वर्ष रौनकों से सजी रहने वाली भारतीय संस्कृति में अनेक ऐसे पर्व और विशेष तिथियां हैं, जिनका हमारे दैनिक जीवन, आस्था और संस्कारों से गहरा संबंध है। ये पर्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होते, बल्कि व्यक्ति के विचार, व्यवहार और जीवन दिशा को भी प्रभावित करते हैं। इन्हीं विशेष तिथियों में एक है अधिकमास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है और शास्त्रों के अनुसार इस दौरान किया गया जप, तप, दान और तीर्थ दर्शन कई गुना पुण्य प्रदान करता है। ऐसे पावन समय में भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण से जुड़े तीर्थों के दर्शन का विशेष महत्व बताया गया है। जिनमें ओडिशा स्थित जगन्नाथ पुरी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि अधिकमास में यहां दर्शन करने से जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

क्यों खास है अधिकमास?


अधिकमास की सबसे बड़ी खूबी है कि यह हर वर्ष नहीं आता। जब सूर्य और चंद्र वर्ष में संतुलन बनाने के लिए एक अतिरिक्त मास जुड़ता है, तब अधिकमास होता है। पुराणों में वर्णन है कि इस मास को किसी देवता ने पहले स्वीकार नहीं किया था, तब भगवान विष्णु ने इसे अपने नाम पुरुषोत्तम से जोड़ा। तभी से यह महीना विष्णु भक्ति का सर्वोत्तम काल माना गया।

धार्मिक मान्यता के अनुसार अधिकमास में व्रत, जप, दान और तीर्थ दर्शन करने से व्यक्ति के पूर्व जन्मों के पाप भी क्षीण हो जाते हैं और अंत में मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

अधिकमास में जगन्नाथ पुरी का महत्व


जगन्नाथ पुरी भारत के चार धामों में से एक है। ब्रह्म पुराण और स्कंद पुराण में उल्लेख मिलता है कि इसी पावन भूमि पर भगवान विष्णु नीलमाधव के रूप में प्रकट हुए थे। बाद में वही श्रीकृष्ण जगत के नाथ यानी जगन्नाथ के रूप में यहां विराजमान हुए।

अधिकमास में पुरी दर्शन को इसलिए भी श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि यह महीना स्वयं विष्णु को प्रिय है और पुरी उनकी साक्षात लीला स्थली मानी जाती है। मान्यता है कि इस समय यहां आने वाले श्रद्धालुओं के जीवन में धन, वैभव और पारिवारिक सुख की कभी कमी नहीं रहती।

जगन्नाथ भगवान के नेत्र दर्शन की मान्यता


शास्त्रों और लोक मान्यताओं में भगवान जगन्नाथ के विशाल नेत्रों का विशेष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि इन नेत्रों में सूर्य और चंद्र दोनों की शक्ति समाहित है। मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ के नेत्रों में सूर्य और चंद्र दोनों की दिव्य शक्ति समाहित मानी जाती है। इनके दर्शन से सूर्य दोष और चंद्र दोष शांत होते हैं, जिससे जीवन में संतुलन आता है। भक्तों का विश्वास है कि नेत्र दर्शन से मन को गहरी शांति और एकाग्रता प्राप्त होती है तथा मानसिक तनाव, भय और नकारात्मक विचार धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं। अधिकमास में इन दर्शनों का फल कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए इसे अनेक यज्ञों और धार्मिक अनुष्ठानों के समान फलदायी बताया गया है। यही कारण है कि इसे अनेक यज्ञों और अनुष्ठानों के समान फलदायी बताया गया है।

अधिकमास में पुरी से प्रसाद चावल लाने की मान्यता

जगन्नाथ पुरी का महाप्रसाद पूरे भारत में प्रसिद्ध है। अधिकमास में यहां से प्रसाद का चावल घर लाने की एक विशेष परंपरा है।

मान्यता है कि अधिकमास में जगन्नाथ पुरी से लाया गया प्रसाद का चावल सामान्य भोजन के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धा के प्रतीक के रूप में रखा जाता है। इसे सुखाकर लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि इससे धन की स्थिरता बनी रहती है और घर में आर्थिक अभाव नहीं आता। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी भक्तों के बीच गहरी आस्था का विषय बनी हुई है।

जगन्नाथ भगवान की छड़ी (बेंत) से जुड़ी कथा और मान्यता

जगन्नाथ पुरी से बेंत या छड़ी लाने की भी विशेष धार्मिक मान्यता है। लोक कथाओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ स्वयं अपने भक्तों की रक्षा के लिए इस छड़ी का प्रतीकात्मक रूप से प्रयोग करते हैं। लोक मान्यताओं के अनुसार जगन्नाथ भगवान की छड़ी उनकी रक्षा शक्ति का प्रतीक मानी जाती है। पुरी से लाई गई इस बेंत को पूजा घर में रखने से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और घर में सुख-शांति का वास होता है। भक्तों का विश्वास है कि इस छड़ी की उपस्थिति से दुख, दरिद्रता और अशांति घर में प्रवेश नहीं कर पाती। एक प्रचलित कथा के अनुसार जब पुरी क्षेत्र में अकाल और कष्ट बढ़े थे, तब भगवान के संकेत पर उनकी छड़ी को नगर परिक्रमा के लिए ले जाया गया, जिसके बाद परिस्थितियां धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं। तभी से इसे संकट नाशक माना जाता है।

अधिकमास में जगन्नाथ पुरी दर्शन से मिलने वाला पुण्य


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास में जगन्नाथ पुरी के दर्शन करने से जीवन में स्थायी सुख-समृद्धि आती है। इस दौरान किए गए दर्शन से पितृ दोष और ग्रह बाधाएं शांत होती हैं तथा भक्ति मार्ग और अधिक मजबूत होता है। माना जाता है कि इससे व्यक्ति को आत्मिक शांति मिलती है, कर्मों में शुद्धता आती है और भाग्य का द्वार खुलने लगता है।

अधिकमास को यूं ही पुरुषोत्तम मास नहीं कहा गया है। यह भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने का दुर्लभ अवसर होता है। ऐसे पावन समय में जगन्नाथ पुरी के दर्शन करना केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाला आध्यात्मिक अनुभव माना जाता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य धार्मिक, सांस्कृतिक मान्यताओं और उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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