बलूचिस्तान में बढ़ता विद्रोह, पाकिस्तान पर संकट गहराया

बलूचिस्तान में हमले, संसाधन शोषण व सैन्य कार्रवाई से असंतोष चरम पर; पाकिस्तान के नियंत्रण व स्थिरता पर गंभीर प्रश्न खड़े।

Yogesh Mohan
Published on: 28 Feb 2026 4:12 PM IST
Rising Insurgency in Balochistan
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Rising Insurgency in Balochistan (Photo_ Social Media)

स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व भारत देश एक अखण्ड राष्ट्र के रूप में विद्यमान था। जहाँ चहुँ ओर किसी भी प्रकार का कोई जाति, धर्म अथवा क्षेत्रीय भेदभाव नहीं था। भारत देश की स्वतंत्रता प्राप्ति में सभी का सामूहिक सहयोग था। वर्ष 1947 में, स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात अखंड भारत को विभाजित किया गया और भारत से इतर पाकिस्तान की स्थापना की गई। ये बटवारा न केवल भारत देश का हुआ अपितु भारत की अन्तरात्मा, जनता की सोच, आपसी प्रेम तथा सौहार्द का भी हुआ।

पाकिस्तान का प्रार्दुभाव, वर्ष 1947 में किए गये कुकृत्यों का प्रतिफल था, जोकि उसके अन्त होने तक भी उसका पीछा नहीं छोड़गें। आज पाकिस्तान में खुशहाली के स्थान पर, हिंसक वातावरण, अपहरण, हत्या, डकैती, आगजनी आदि की घटनाये नित् प्रतिदिन हो रही हैं। भ्रष्टाचार और निम्न स्तर की राजनीति ही पाकिस्तान की पहचान बन चुकी है। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात से वहाँ, जो भी सरकार गठित हुई, उनमें से जिस भी सरकार ने, सेना को विश्वास में लेकर कार्य किया, वो ही अपना कार्यकाल निर्विघ्न रूप से पूर्ण कर पायी अन्यथा उनका कार्यकाल अल्प अवधि तक ही सीमित रहा।

आज पाकिस्तान में अत्यधिक घृणा का वातावरण व्याप्त है, जिसका प्रभाव उसके अपने ही प्रदेशों पर पड़ रहा है। उनमें से ब्लूचिस्तान एक ऐसा प्रदेश है, जिसकी भूमि को ईश्वर ने प्रचुर मात्रा में खनिज सम्पदा प्रदान की है। पाकिस्तान की 80 प्रतिशत आवश्यकताओं की पूर्ति, उस प्रदेश की खनिज सम्पदा से ही होती है। इसके प्रत्युत्तर में उसको कुछ नहीं मिलता। इसी कारण वह प्रदेश आज भी पिछड़े प्रदेशों की श्रेणी में है। वहाँ पर ब्लूच कबीलों का अपने-अपने क्षेत्रों में अत्यधिक प्रभुत्व रखने के कारण उनके लिए मरना तथा मारना बहुत ही सहज है। शनै-शनै शिक्षा का प्रसार होने से, वहाँ के लोगों को अब इस तथ्य का संज्ञान हो गया है कि उनका शोषण पंजाबी मुसलमानों के द्वारा ही किया जा रहा है। पाकिस्तानी फौज के द्वारा, वहाँ के हजारों युवक-युवतियों का अपहरण करने के कारण, ब्लूचिस्तान में, पाकिस्तान के विरुद्ध व्यापक असंतोष व्याप्त हो गया है।

31 जनवरी 2026 को ब्लौच विद्रोहियों ने, पाकिस्तान के 14 शहरों पर एक साथ हमला किया। इनमें से सबसे बड़ा हमला राजधानी क्वेटा में हुआ, जहाँ ब्लौच लड़ाकों ने, मुख्यमंत्री आवास तथा उच्च न्यायालय जैसे सुरक्षा युक्त क्षेत्र में अत्याधुनिक शस्त्रों के साथ पहुँचकर अपनी शक्ति का परिचय दिया। वहाँ की सेना, उनपर नियंत्रण करने में पूर्णतया अक्षम सिद्ध हुई, जबकि वहाँ की जनता ने उन्मुक्त हृदय से उनका स्वागत किया। अभी सुरक्षाकर्मी पूर्व में घटित हमलों के प्रभाव से, सम्भल भी नहीं पाए थे कि 6 जनवरी को पुनः एक और हमला किया गया, जिसमें 300 से अधिक लोग हताहत हुये।

अब ब्लूचिस्तान में, कहीं से भी, किसी भी प्रकार का, कोई भी आक्रमण अथवा घटना घटित होती है तो पाकिस्तान स्वयं को निर्दोष सिद्ध करने का प्रयास करता है तथा उन सब घटनाओं के लिए भारत तथा अफगानिस्तान को पूर्णतया उत्तरदायी ठहराता है। वास्तविकता यह है कि भारत को इन घटनाओं के लिए दोषी ठहराना निराधार है क्योंकि ब्लूचिस्तान, भारत की सीमा से अत्यधिक दूर है।

पाकिस्तान के चिंतन का प्रमुख विषय यह है कि ब्लूचिस्तान जैसे छोटे प्रदेश के पास अत्याधुनिक हथियारों की आपूर्ति किस देश के द्वारा की जा रही है। पाकिस्तान को उस अप्रत्यक्ष ताकत की खोज करनी चाहिए जो उसी के प्रदेश को, उसके विरुद्ध सशक्त कर रही है नाकि बिना किसी विवेकपूर्ण जानकारी के, भारत तथा अफगानिस्तान को दोषी सिद्ध करे। वरिष्ठ सम्पादक का मानना यह है कि पाकिस्तान को सही जानकारी प्राप्त करके की समुचित निर्णय लेना चाहिये अन्यथा ब्लूचिस्तान पर वह अपना नियंत्रण नहीं रख पायेगा, क्योंकि किसी भी प्रदेश में यदि एकबार स्वतंत्रता की लौ प्रज्जवलित हो जाती है तो उसको बुझाना सम्भव नहीं होगा। स्वतंत्रता सभी का जन्मसिद्ध अधिकार है।

योगेश मोहन

(28.02.2026 )

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