Bharat Me Mehngai: भारत में मँहगाई की मार

Bharat Me Kya Kya Mehnga Hua: वैश्विक तनाव और तेल आपूर्ति बाधित होने के बीच भारत में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। पेट्रोल-डीजल, दूध और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों का असर मध्यम वर्ग पर पड़ सकता है।

Yogesh Mohan
Published on: 7 Jun 2026 1:16 PM IST
Bharat Me Kya Kya Mehnga Hua
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Bharat Me Kya Kya Mehnga Hua (Newstrack AI)

Bharat Me Mehngai: ईरान और ट्रम्प के मध्य युद्ध के कारण सम्पूर्ण विश्व में तेल व गैस की आपूर्ति बाधित हो रही है, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि हो रही है जिसके फलस्वरूप भारत की जनता भी मँहगाई से त्रस्त हो रही है। ऐसी परिस्थिति की आंशका सभी को थी, क्योंकि आपातकालीन भण्डार भी अब समाप्तप्राय होते जा रहे है। सरकार अपनी ओर से जनता की माँग को पूर्ण करने के भरसक प्रयास कर रही है।

अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि नहीं हुई है। यदि हम 23 मई 2012 की कीमतों पर दृष्टिपात करें तो, उस समय कच्चे तेल का मूल्य 108 डालर प्रति बैरल था, जो अब वर्ष 2026 में करीब 100 डालर प्रति बैरल है। परन्तु मुख्य समस्या आपूर्ति का बाधित होना है, जोकि सरकार की चिंता का प्रमुख विषय है। यह सर्वविदित है कि समस्या का मुख्य स्रोत ईरान और ट्रम्प के मध्य युद्ध का होना है, जिस कारण आयात और निर्यात बाधित हो रहा है और इसका प्रत्यक्ष प्रभाव, आम जनता को सहन करना पड़ रहा है।

इस बार भारत देश प्रचंड गर्मी से ग्रस्त है, दूध और उससे निर्मित वस्तुओ की कीमतों में नित् प्रतिदिन वृद्धि हो रही हैं। औद्योगिक ईकाईयों को अपने व्यवसाय के अस्तित्व की आशंका होनी प्रारम्भ हो गई है। इसी कारण उन्होंने अपने उत्पादों की कीमतों में वृद्धि करनी प्रारम्भ कर दी है। अब सरकार का दायित्व है कि वे उनमें विश्वास उत्पन्न करें।

वास्तविकता यह है कि भारत युद्ध का भागीदार नहीं है, परन्तु देश की आन्तरिक स्थिति युद्ध सदृश हो गई है। देश में सर्वत्र हलचल उत्पन्न हो रही है। कुछ उद्योगपति लागत कम करने हेतु, अपने कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रहे है। रिजर्व बैंक का भी दायित्व है कि मँहगाई को नियंत्रण में रखे, क्योंकि खुदरा मँहगाई दर 4 प्रतिशत तक होनी चाहिए, क्योंकि उससे 2 प्रतिशत कम अथवा अधिक को सहन किया जा सकता है। अप्रैल में यह आंकड़ा 4.2 प्रतिशत था जोकि मई में वृद्धि के पश्चात 8.3 प्रतिशत हो गया है, जिसका मुख्य कारण ईंधन की कीमतों में 24.7 प्रतिशत की वृद्धि है।

विश्व के अधिकांश औद्योगिक जगत में एक अनिश्चितता का वातावरण व्याप्त हो गया है। ईरान पर आक्रमण से पूर्व भारत करीब 70 अरब डालर का सोना और 12 अरब डालर की चांदी का आयात कर चुका था। चांदी के आयात में 150 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी थी। युद्ध प्रारम्भ होने से पूर्व, इस्पात के साथ ही तांबे, एलम्युनियम की कीमतों में भी अत्यधिक वृद्धि हो चुकी थी, क्योंकि अनेक देशों में उपरोक्त सभी उत्पादों की मांग में वृद्धि हो रही थी।

आज सम्पूर्ण विश्व सामूहिक रूप से एक ही इच्छा की पूर्ति की कामना करता है कि शीघ्रातिशीघ्र युद्ध समाप्त हो जाए और उनके देश की व्यवस्था पूर्ववत हो जाए, क्योंकि यदि आज युद्ध विराम होता है तो परिस्थिति को सामान्य होने में कम से कम दो माह का समय अवश्य ही लगेगा। यह अच्छी बात है कि भारत अपने तेल के आयात को नियंत्रित कर रहा है, परन्तु डालर की कीमतों में वृद्धि होने से आयात के व्यय में वृद्धि हो रही है। भारत को डालर की कीमत पर नियंत्रण करना ही होगा, इसीलिए प्रधानमंत्री जी ने विदेश भ्रमण, सोने की खरीदारी और पेट्रोल, डीजल के उपयोग में कमी करने हेतु भारत की जनता से विनम्र आग्रह किया है।

मँहगाई मध्यम वर्ग के समक्ष निश्चितः अत्यधिक आर्थिक संकट उत्पन्न करेगी। इस संकट से मुक्त होने का उपाय यही है कि देश की जनता अपने व्यय को नियंत्रित करे और प्रवासी भारतीय जनता के द्वारा अधिक से अधिक विदेशी मुद्रा को भारत में भेजना होगा, जिससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार नियंत्रित हो सके। प्रधानमंत्री जी को अपने व्यक्तित्व के प्रभाव का प्रयोग करके युद्ध विराम कराना होगा, तभी विश्व की वर्तमान विकट समस्याओं का समाधान सम्भव हो पायेगा।

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