सौ वर्ष में मिटी तस्वीरों से संघ की दूरियां,संघ की प्रचार परंपराओं को तोड़ रहा सोशल मीडिया

RSS Social Media Strategy: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्ष पुरानी प्रचार परंपरा अब सोशल मीडिया के दौर में बदल रही है। तस्वीरों और जनसंपर्क अभियानों ने संघ की गोपनीय शैली को नई दिशा दी है।

Naved Shikoh
Published on: 8 Dec 2025 1:21 PM IST
RSS Social Media Strategy
X

RSS Social Media Strategy (Image Credit-Social Media)

RSS Social Media Strategy : करीब एक सदी तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यही विशेषता रही कि प्रचारक प्रचार खूब करते रहे पर दिखाई कुछ नहीं दिया। हांलांकि बिना प्रचार के प्रचार की कल्पना भी मुश्किल है पर संघ ने ऐसा कर दिखाया। दो लोगों ने यदि दस लोगों से जनसंपर्क किया और अपनी बात या विचार रखे तो इस मीटिंग,बात-मुलाकात की फोटो बाजी,प्रेस आमंत्रण या प्रेस विज्ञप्ति की जरुरत कभी नहीं महसूस की गई।

पंद्रह -बीस बरस पहले सोशल मीडिया शुरू हुआ तो इससे भी परहेज़ किया गया। किसी तरह की भी फोटोबाजी से हमेशा दूरी बनाई गई।सब कुछ खामोशी से, बिना मीडिया या सोशल मीडिया के सहारे, बिना शोर-शराबे और बिना शो-ऑफ के संघ प्रचारक प्रचार करते रहे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्षों का यही इतिहास रहा है। राष्ट्रवाद का संकल्प , हिन्दुत्व का प्रचार, जरुरत मंदों की मदद, शारीरिक व्यायाम, सादगी, समर्पण, लक्ष्य की प्राप्ति के लिए संघर्ष, तपस्या, अनुशासन, धैर्य और दिखावे से दूर रहना।दुनिया बदल रही है। भारत भी बदल रहा है। नए भारत में नई इनफार्मेशन टैक्नोलॉजी का नया दौर शुरू हो गया है। बदलाव की इस बेला में क्या संघ भी बदल रहा ?


सौ वर्ष पूरे होने की उपलब्धि से उत्साहित संघ अपने मूल कार्य प्रचार को नई दिशा देकर दिखावे, मीडिया ,सोशल मीडिया और तस्वीरों से दूर रहने के नियम को क्या तोड़ रहा ? दुनिया के सबसे बड़े इस भारतीय राष्ट्रवादी संगठन ने क्या अपने पारंपरिक प्रचार को बदलने का फैसला किया है ?

क्या अब संघ सोशल मीडिया से परहेज़ नहीं करेगा ! या फिर दिखावे से दूर रहने,अनुशासित रहने और सादगी का पर्याय बने इस संगठन में भी अनुशासनहीनता का वाइरस आ गया है ! या फिर आज के दौर में चाह के भी सोशल मीडिया से बचा नहीं जा सकता है, या इसके बिना प्रचार संभव ही नहीं ! अथवा इससे परहेज करना किसी के भी बस में नहीं। आप कहीं किसी से मिलने जाओ और फोटो ना खिंचवाने का आपका निर्णय हो,पर जिससे मिलने गए यदि वो फोटो खींचता है तो आप उसे रोक ही नहीं सकते।

जगह-जगह सीसी कैमरे है तो फोटो तो वैसे भी खिंच जाएगा। और वो फोटो कोई कभी भी इस्तेमाल कर सकता है। शायद इसीलिए इस मौजूदा दौर या नए सामाजिक मिजाज में संघ के प्रचार तंत्र की गोपनीयता भंग होने लगी है। या यूं कहिए कि तस्वीरों से दूर रहने की ज़िद पिघल रही है।सोशल मीडिया पर अब संघ की तमाम तस्वीरें वायरल होने लगी हैं।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूरे होने पर संघ जनसंपर्क अभियान चला रहा है। जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं।


पी.आर.(पब्लिक रिलेशन) सामाजिक सरोकारों से जुड़ा हो, राष्ट्रवाद से,सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से या हिन्दुत्व के प्रचार से ही क्यों ना जुड़ा हो, आपकी सादगी और दिखावे से दूर रहने की जिद को आज का सोशल मीडिया तोड़ ही देगा। आप फोटो नहीं भी खिंचवाओगे,पर दूसरे को रोकने का हक भी आप के पास नहीं रहेगा। शायद यही कारण है कि सौ साल बाद संघ और तस्वीरों के बीच की दूरियां अब मिटती दिख रही हैं। संघ ने मीडिया ने हमेशा मीडिया से दूरी बनाई, मीडिया का सहारा नहीं लिया लेकिन सोशल मीडिया संघ की परंपराओं को तोड़ने लगा है !

( लेखक पत्रकार हैं।)

Naved Shikoh
ABOUT THE AUTHOR

Naved Shikoh

Next Story