75 साल बाद भी नेहरू का ‘बाबरी प्रेम’ जिंदा? रेवंत रेड्डी ने अपने 'बयान' से उड़ाया हिंदू देवी-देवताओं का मज़ाक! क्यों हैं राहुल गांधी?

Revanth Reddy remarks controversy: देश के पूर्व मुख्यमंत्री पंडित नेहरू की बाबरी मस्जिद और सोमनाथ मंदिर को लेकर तुष्टीकरण की नीतियाँ कई बार चर्चा में रह चुकी हैं। आज भी, 75 साल बाद, रेवंत रेड्डी का बयान कांग्रेस की इसी पुरानी मानसिकता की याद दिला रहा है।

Priya Singh Bisen
Published on: 4 Dec 2025 2:06 PM IST (Updated on: 4 Dec 2025 2:07 PM IST)
Revanth Reddy remarks controversy
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Revanth Reddy remarks controversy (photo: social media)

Revanth Reddy remarks controversy: तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का हाल ही में दिया गया बयान राजनीतिक गलियारों में ज़ोरदार हलचल मचा रहा है। उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं और पूजा पर अपने ऐसे विचार साझा किए, जो कई लोगों के लिए विवादित बन गया है। भाजपा सहित अन्य दलों ने इस 'बयान' को हिंदू धर्म और उसकी परंपराओं का अपमान करार दिया है और आरोप लगाया है कि इसके पीछे कांग्रेस नेतृत्व की हरी झंडी हो सकती है।

यदि इसिहास के पन्नों पर एक बार फिर से नज़र डालें तो... पाएंगे कि देश के पूर्व मुख्यमंत्री पंडित नेहरू की बाबरी मस्जिद और सोमनाथ मंदिर को लेकर तुष्टीकरण की नीतियाँ कई बार चर्चा में रह चुकी हैं। आज भी, 75 साल बाद, रेवंत रेड्डी का बयान कांग्रेस की इसी पुरानी मानसिकता की याद दिला रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, ऐसे बयान पार्टी की चुनावी छवि और हिंदू मतदाताओं पर प्रभाव डाल सकते हैं। इन सबके बीच... अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इस विवाद को संभाल पाएगी और तो और... क्या भविष्य में Congress अपनी छवि को बचा पाएगी?

रेवंत रेड्डी का ये बयान बना विवाद का कारण

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा हाल ही में हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने के बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। 2 दिसंबर 2025 को हैदराबाद में कांग्रेस पार्टी की एक बैठक में रेवंत रेड्डी ने कहा कि हिंदू धर्म में कितने भगवान हैं और कितने देवी-देवता हैं, यह तय कर पाना मुश्किल है कि किसकी पूजा की जाए। उन्होंने इस बयान के माध्यम से 'हिंदू धर्म' और उसकी परंपराओं का अपमान किया, जिससे भाजपा समेत अन्य राजनीतिक दलों ने जमकर कड़ी आलोचना की है।

अब... इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि रेवंत रेड्डी के इस बयान के पीछे कांग्रेस लीडर राहुल गांधी और सोनिया गांधी की ही हरी झंडी हो सकती है। इसके साथ ही यह सवाल भी खड़े किये जा रहे हैं कि क्या कांग्रेस पार्टी में सालों से चली आ रही तुष्टीकरण नीति आज भी मौजूद है।

एक नज़र इतिहास के पन्नों पर...

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के बीच साल 1950 में हुई सबसे चर्चित बातचीत इसके प्रमाण स्वरूप है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुजरात के वड़ोदरा में 2 दिसंबर 2025 को कहा कि पंडित नेहरू सरकारी धन से 'बाबरी मस्जिद का निर्माण' करवाना चाहते थे, लेकिन सरदार पटेल ने इसे रोक दिया। पंडित नेहरू चाहते थे कि सरकारी खजाने द्वारा ही मस्जिद का निर्माण किया जाए, जबकि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में उन्होंने सरकारी धन के उपयोग का कड़ा विरोध जताया। पटेल ने साफ़ किया कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण जनता के दान और एक ट्रस्ट के माध्यम से हो रहा है, जिसमें सरकार का एक पैसा भी शामिल नहीं है।

और अधिक जानकारी और इस तथ्य की पुष्टि ‘इनसाइड स्टोरी ऑफ सरदार पटेल – द डायरी ऑफ मणबेन पटेल’ नाम की पुस्तक में भी मिलती है। मणिबेन पटेल, जो सरदार पटेल की बेटी थीं, उन्होंने अपनी डायरी के आधार पर यह पुस्तक लिखी थी। 20 सितंबर 1950 की बातचीत में नेहरू ने बाबरी मस्जिद का मुद्दा उठाया, लेकिन सरदार पटेल ने यह स्पष्ट कर दिया था कि सरकार किसी मस्जिद को बनाने के लिए पैसा खर्च नहीं कर सकती। वहीं, सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए बनाया गया ट्रस्ट पूरी तरह से जनता के दान पर ही चलता था।

सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन समारोह में सम्मिलित होने से नेहरू ने किया था इनकार

बता दे, सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन समारोह में पंडित नेहरू ने भाग लेने से साफ़ मना कर दिया था और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भी जाने से रोका था। नेहरू का तर्क था कि भारत के राष्ट्रपति का किसी विशेष धर्म के पूजा स्थल पर जाना देश की धर्मनिरपेक्ष छवि को प्रभावित कर सकता है। लेकिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसे मान्यता दी और उन्होंने उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया।

इन सभी घटनाओं से साफ़ होता है कि कांग्रेस पार्टी में 'तुष्टीकरण की प्रवृत्ति' नेहरू के समय से चली आ रही थी। और आज 75 साल बाद भी, रेवंत रेड्डी के बयान ने इसे फिर से उजागर कर दिया है।

भाजपा नेताओं का तर्क

भाजपा के नेताओं का इसपर स्पष्ट कहना है कि पहले 'तुष्टीकरण' किया जाता था और अब जनता के 'संतुष्टिरण' की जगह राजनीति में इसका प्रयोग किया जा रहा है। देखा जाए तो... अब रेवंत रेड्डी के बयान ने कांग्रेस की आंतरिक मानसिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां हिंदू देवी-देवताओं के प्रति 'असंवेदनशीलता' और 'तिरस्कार' की भावना आज भी जिंदा रखी है।

इसलिए भी है यह मामला गंभीर

खासतौर से यह मामला इसलिए भी इतना संवेदनशील है क्योंकि 3 दिसंबर को रेवंत रेड्डी ने दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की थी, लेकिन इस विवादित बयान पर अभी तक कांग्रेस नेतृत्व ने कोई स्पष्टीकरण या माफी नहीं दी है। इससे यह सवाल और भी गंभीर होता जा रहा है कि क्या कांग्रेस में आज भी वही मानसिकता कायम है जो पंडित नेहरू के समय में थी।

अब आगे क्या ?

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के बयान ने कांग्रेस पार्टी के पुराने तुष्टीकरण रुझान को फिर से सबके सामने उजागर कर दिया है। यह विवाद न सिर्फ धार्मिक भावनाओं को प्रभावित कर सकता है, बल्कि कांग्रेस की राजनीतिक छवि पर भी प्रश्न चिह्न लगाता है। अब यह देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को कैसे संभालती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं से पार्टी अपनी छवि को किस प्रकार बचाती है।

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Priya Singh Bisen is a Content Writer at Newstrack.com.

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