इश्क का भूत उतारता है ये मंदिर! ‘दिल के रोग’ से परेशान युवा यहां आते हैं इलाज कराने

Balaji Saharanpur Mandir: जानिए इस अनोखे मंदिर के बारे में, जहां ‘आशिकी का भूत’ उतारने और ‘दिल के रोग’ के इलाज की मान्यता है

Jyotsana Singh
Published on: 21 April 2026 10:40 AM IST
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Balaji Saharanpur Mandir Uttar Pradesh

Balaji Saharanpur Mandir: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जिसके बारे में सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं। यहां लोग सिर्फ पूजा करने नहीं, बल्कि अपने बच्चों के सिर से 'आशिकी का भूत' उतारने भी आते हैं। बेहट रोड पर स्थित श्री बालाजी महाराज का यह मंदिर पिछले कई वर्षों से आस्था का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यहां विशेष पूजा और उपायों के जरिए युवाओं को गलत रास्ते से वापस लाने में मदद मिलती है। यही वजह है कि दूर-दूर से लोग इस मंदिर में अपनी समस्याओं का समाधान पाने के लिए पहुंचते हैं।

सहारनपुर का यह मंदिर क्यों है खास

बेहट रोड पर स्थित यह बालाजी धाम कोई साधारण मंदिर नहीं माना जाता। यहां भगवान हनुमान जी के बाल स्वरूप श्री बालाजी महाराज विराजमान हैं। मंदिर की स्थापना करीब 18 से 20 साल पहले की गई थी और तभी से यह लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां केवल बालाजी ही नहीं, बल्कि उनके साथ श्री काल भैरव और श्री प्रेतराज सरकार की भी स्थापना की गई है। मान्यता है कि ये तीनों शक्तियां मिलकर भक्तों की समस्याओं का समाधान करती हैं और उन्हें मानसिक व आध्यात्मिक शांति प्रदान करती हैं।

‘आशिकी का भूत’ उतारने की अनोखी मान्यता

इस मंदिर की सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात को लेकर होती है, वह है 'आशिकी का भूत' उतारने की मान्यता। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब कोई युवक या युवती प्रेम संबंधों में इस कदर उलझ जाता है कि उसका व्यवहार असामान्य हो जाता है, तो परिवार वाले उसे यहां लेकर आते हैं।

मंदिर में विशेष पूजा और उपाय करवाए जाते हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि इससे युवाओं का ध्यान भटकाव से हटकर सही दिशा में लगने लगता है। कई परिवारों का दावा है कि यहां आने के बाद उनके बच्चों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आया है।

हालांकि, इसे पूरी तरह धार्मिक आस्था और विश्वास का विषय माना जाता है, लेकिन इस मान्यता के चलते यहां हर हफ्ते बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा

मंदिर में हर दिन श्रद्धालु आते हैं, लेकिन मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष भीड़ देखने को मिलती है। इन दिनों मंदिर के संस्थापक अतुल जोशी महाराज विशेष पूजा और अनुष्ठान करवाते हैं।

इन अनुष्ठानों के दौरान केवल संबंधित युवक या युवती के परिजन ही मौजूद रहते हैं। पूजा के साथ-साथ परिजनों को कुछ विशेष उपाय भी बताए जाते हैं, जिन्हें घर पर करने की सलाह दी जाती है। मंदिर प्रबंधन का मानना है कि इन उपायों को सही तरीके से करने पर समस्या का समाधान हो जाता है।

माथा टेकने से मिलती है मानसिक शांति

मंदिर में आने वाले कई श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां सिर्फ 'आशिकी' से जुड़ी समस्याएं ही नहीं, बल्कि अन्य परेशानियों से भी राहत मिलती है। लोग अपने जीवन की विभिन्न समस्याओं जैसे तनाव, पारिवारिक कलह, मानसिक अस्थिरता को लेकर यहां आते हैं और बालाजी महाराज के सामने माथा टेकते हैं। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से प्रार्थना करने पर यहां हर मनोकामना पूरी होती है।

कई वर्षों से जल रही हैं तीन अखंड ज्योत

इस मंदिर की एक और खास पहचान है, यहां पिछले करीब 18 से 20 वर्षों से तीन अखंड ज्योत लगातार जल रही हैं। बताया जाता है कि ये ज्योत देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों से लाई गई थीं, जिनमें मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, बद्रीनाथ धाम और मां शाकुंभरी देवी मंदिर शामिल हैं। इन ज्योतों को मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है और श्रद्धालु इनके दर्शन को विशेष महत्व देते हैं।

दिव्य माहौल के बीच सुंदरकांड पाठ और भंडारे का आयोजन

हर मंगलवार को इस दिन जैन मंदिर में सुंदरकांड का पाठ किया जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। सुबह से शाम तक मंदिर में भक्ति का माहौल बना रहता है और भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। भक्तों की लंबी कतारें इस बात का प्रमाण हैं कि मंदिर के प्रति लोगों की आस्था कितनी गहरी है। कई लोग नियमित रूप से हर मंगलवार यहां आकर पूजा में शामिल होते हैं।

बालाजी जन्मोत्सव पर विशेष आयोजन

मंदिर में हर साल बालाजी महाराज का जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर बालाजी को स्वर्ण चोला चढ़ाया जाता है और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और पूरा परिसर भक्ति में डूब जाता है।

गौशाला भी बन रही सेवा का केंद्र

मंदिर परिसर में एक गौशाला भी संचालित की जा रही है, जिसे बालाजी कृपा गौशाला के नाम से जाना जाता है। यहां बेसहारा और जरूरतमंद गौवंश को आश्रय दिया जाता है। इस गौशाला की शुरुआत मंदिर के संस्थापक अतुल जोशी महाराज और बड़े गुरुजी श्री ज्ञानानंद जी महाराज ने की थी। खास बात यह है कि गौशाला का निर्माण उड़ीसा से बुलाए गए कारीगरों द्वारा किया गया है। गौसेवा को यहां धार्मिक सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और कई श्रद्धालु इसमें सहयोग भी करते हैं।

दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु

इस अनोखी मान्यता और मंदिर की प्रसिद्धि के कारण अब यहां सिर्फ सहारनपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और दूसरे राज्यों से भी लोग पहुंचते हैं। खासकर वे परिवार, जो अपने बच्चों के व्यवहार को लेकर परेशान होते हैं, यहां आकर समाधान खोजते हैं।

मंदिर के सेवकों का दावा है कि अब तक हजारों लोगों को यहां से सकारात्मक परिणाम मिला है। हालांकि यह पूरी तरह आस्था और विश्वास पर आधारित है, लेकिन लोगों का भरोसा लगातार बढ़ता जा रहा है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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