Begunkodor Railway Station: आधी रात की आखिरी लोकल और भूत की कहानी, आज भी लोगों को डराता है यह स्टेशन

Begunkodor Railway Station Ghost Story: पश्चिम बंगाल का यह स्टेशन भूतिया अफवाहों के कारण 42 साल तक बंद रहा और आज भी रहस्य का केंद्र बना हुआ है।

Jyotsana Singh
Published on: 7 Jun 2026 7:30 AM IST (Updated on: 7 Jun 2026 1:15 PM IST)
Begunkodor Railway Station haunted ghost story West Bengal Mysterious station closed for 42 years
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Begunkodor Railway Station Ghost Story

Begunkodor Railway Station Ghost Story: हमारे चारों ओर बिखरे किस्से कहानियों में एक अनजानी रहस्यमई दुनिया का हमेशा जिक्र होता रहा है, यानी भूत पिशाचों का। इसी कड़ी भारत में कई ऐसे रेलवे स्टेशन हैं जिनसे जुड़ी कहानियां लोगों को कुछ ऐसी ही खौफनाक कल्पनाओं को उड़ान देती हैं। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में स्थित बेगुनकोडोर रेलवे स्टेशन भी ऐसी ही एक जगह है, जिसे लंबे समय तक देश के सबसे रहस्यमयी रेलवे स्टेशनों में गिना जाता रहा। एक समय ऐसा था जब यहां भूत-प्रेत की अफवाहों ने लोगों में इतना डर पैदा कर दिया कि स्टेशन को करीब 42 वर्षों तक बंद रखना पड़ा। आज भले ही यहां सामान्य रूप से ट्रेनें रुकती हैं, लेकिन इसकी कहानी अब भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देती है।

एक घटना और फैल गया डर

बेगुनकोडोर रेलवे स्टेशन की शुरुआत वर्ष 1960 में हुई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, 1967 में यहां तैनात एक स्टेशन मास्टर ने दावा किया कि उसने रेलवे ट्रैक के पास एक युवती जैसी आकृति देखी थी। कहा जाता है कि वह आकृति ट्रेन के साथ-साथ दौड़ रही थी और कुछ देर बाद ट्रेन से आगे निकल गई। इस घटना के बाद स्टेशन मास्टर की अचानक मृत्यु हो गई। हालांकि उनकी मौत का वास्तविक कारण कभी आधिकारिक रूप से इस कथित घटना से नहीं जोड़ा गया, लेकिन स्थानीय स्तर पर दोनों बातों को जोड़कर देखा जाने लगा। देखते ही देखते भूत-प्रेत की कहानियां पूरे इलाके में फैल गईं।

कर्मचारियों और यात्रियों ने बनाना शुरू किया दूरी

अफवाहें इतनी तेजी से फैलीं कि रेलवे कर्मचारी यहां काम करने से कतराने लगे। कई लोगों ने दावा किया कि उन्होंने रात के समय स्टेशन परिसर में अजीब घटनाएं देखी हैं। धीरे-धीरे यात्रियों की संख्या घटने लगी और स्टेशन लगभग वीरान हो गया।

स्थिति ऐसी बन गई कि रेलवे को यहां नियमित परिचालन बंद करना पड़ा। इसके बाद बेगुनकोडोर स्टेशन करीब 42 वर्षों तक बंद पड़ा रहा। इस दौरान यह जगह रहस्य और डर की कहानियों का पर्याय बन गई।

2009 में फिर शुरू हुई रेल सेवाएं

लंबे अंतराल के बाद भारतीय रेलवे ने इस स्टेशन को दोबारा चालू करने का फैसला किया। वर्ष 2009 में यहां रेल सेवाएं बहाल कर दी गईं। स्टेशन के पुनः खुलने के बाद स्थानीय लोगों और यात्रियों का विश्वास धीरे-धीरे लौटने लगा। आज यहां कई यात्री ट्रेनें रुकती हैं और स्टेशन सामान्य रेलवे स्टेशन की तरह काम करता है। हालांकि, भूतिया कहानियों का असर अब भी बना हुआ है, जिसके कारण यह जगह चर्चा में रहती है।

रात की ‘लास्ट लोकल ट्रेन’ से जुड़ी है खास चर्चा

स्थानीय लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा रात में गुजरने वाली आखिरी लोकल ट्रेन को लेकर होती है। कहा जाता है कि रात करीब 12 बजे के आसपास यहां से गुजरने वाली अंतिम लोकल ट्रेन के समय माहौल बेहद शांत और रहस्यमय हो जाता है। हालांकि इस दौरान किसी असामान्य घटना का कोई प्रमाणित रिकॉर्ड मौजूद नहीं है, लेकिन स्टेशन के आसपास फैला घना सन्नाटा और पुरानी कहानियां लोगों की कल्पनाओं को और मजबूत कर देती हैं। यही वजह है कि कई पर्यटक केवल इस माहौल को महसूस करने के लिए यहां पहुंचते हैं।

हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता है यहां का खास आकर्षण

बेगुनकोडोर केवल अपनी भूतिया कहानियों के लिए ही नहीं जाना जाता। यह इलाका प्राकृतिक सुंदरता से भी भरपूर है। स्टेशन के आसपास हरियाली, पहाड़ी क्षेत्र और शांत वातावरण देखने को मिलता है।

दिन के समय यहां का नजारा बिल्कुल अलग दिखाई देता है। प्रकृति प्रेमी और फोटोग्राफी के शौकीन लोग यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। आसपास के ग्रामीण इलाकों की खूबसूरती इस जगह को एक अलग पहचान देती है।

आज भी रहस्यमई बना हुआ है यह स्टेशन?

लोगों के मन में आज भी सबसे रहस्य बना हुआ है कि क्या बेगुनकोडोर स्टेशन वास्तव में भूतिया है। वैज्ञानिक या आधिकारिक स्तर पर ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जो यहां अलौकिक शक्तियों की मौजूदगी साबित करता हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक चली अफवाहें, सुनसान माहौल और स्थानीय लोककथाएं मिलकर किसी स्थान को रहस्यमय बना देती हैं। बेगुनकोडोर के मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिलता है।

आज बन चुका है ऑफबीट टूरिस्ट डेस्टिनेशन

समय के साथ बेगुनकोडोर की पहचान बदल चुकी है। जो स्टेशन कभी डर की वजह से खाली पड़ा रहता था, वह अब रोमांच पसंद यात्रियों और जिज्ञासु पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।

सोशल मीडिया और ट्रैवल ब्लॉग्स में इसकी चर्चा होने के बाद यहां आने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। कई लोग इस स्टेशन की कहानी जानने और खुद वहां का माहौल महसूस करने के लिए पहुंचते हैं।

42 साल तक बंद रहने वाला यह स्टेशन आज सामान्य रूप से संचालित हो रहा है, लेकिन इससे जुड़ी कहानियां अब भी लोगों को रोमांचित करती हैं। भले ही भूत होने का कोई प्रमाण न मिला हो, फिर भी यह जगह भारत के सबसे चर्चित रहस्यमयी रेलवे स्टेशनों में अपनी खास पहचान बनाए हुए है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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