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Flight Ticket Mahanga Hoga: हवाई यात्रा का मन बनायें तो देख लें, जेब होगी ख़ाली, नहीं मिलेंगे जहाज़
Flight Ticket Mahanga Hoga: यदि आपने जून से अगस्त के बीच हवाई यात्रा की कोई योजना बनाई है। तो टिकट बुक करने से पहले एयरलाइन की वेबसाइट पर लाइव शेड्यूल और फ्लाइट स्टेटस ज़रूर चेक कर लें।
Flight Ticket Mahanga Hoga Air India-Indigo Reduced Flights
Flight Ticket Mahanga Hoga: यदि आपने जून से अगस्त के बीच हवाई यात्रा की कोई योजना बनाई है। तो टिकट बुक करने से पहले एयरलाइन की वेबसाइट पर लाइव शेड्यूल और फ्लाइट स्टेटस ज़रूर चेक कर लें। क्योंकि तमाम कंपनियों ने अपनी सेवाओं को न केवल कम किया है। बल्कि कई रुट पर विमान सेवाएँ बंद भी कर दिया है। इस निर्णय के तहत एयर इंडिया ने अपनी लगभग 20 फीसदी से 22 फीसदी और इंडिगो ने करीब 5 फीसदी से 7 फीसदी घरेलू उड़ानों को कम किया है।हालाँकि एयरलाइंस प्रभावित यात्रियों को री-शेड्यूलिंग या फुल रिफंड का विकल्प दे रही हैं।इसी के साथ हवाई यात्राएं खासी महंगी भी हो गई हैं। प्रभावित रूट्स पर औसतन 15 फीसदी से 20 फीसदी तक किराया बढ़ चुका है। उदाहरण के लिए, दिल्ली-राजकोट रूट पर जून की कुछ तारीखों का किराया सामान्य दिनों के ₹7,000–₹8,000 के मुकाबले बढ़कर ₹19,000 तक पहुँच गया है।
इसके तहत मुंबई से देश के कई बड़े और मध्यम शहरों के बीच चलने वाली उड़ानों के फेरों में सीधी कटौती की जा रही है। मुंबई – अहमदाबाद, मुंबई – नागपुर, मुंबई – पटना, मुंबई – भोपाल तथा दिल्ली – बेंगलुरु, दिल्ली – हैदराबाद, दिल्ली – कोलकाता रूट्स प्रमुख हैं। 3. गुजरात के क्षेत्रीय रूट्स (Gujarat Sectors)
गुजरात के कई शहरों में एयर इंडिया ने उड़ानों को अस्थाई रूप से निलंबित या बेहद कम कर दिया है। दिल्ली – वडोदरा रूट की एयर इंडिया की शाम की फ्लाइट (AI-2866/2867) 1 जून से 31 जुलाई तक पूरी तरह रद्द रहेगी। इसके अलावा सुबह की एक और फ्लाइट (AI-1701/1808) को भी पूरे जुलाई महीने के लिए सस्पेंड कर दिया गया है।राजकोट से दिल्ली जाने वाली सुबह की डेली फ्लाइट और मुंबई जाने वाली शाम की डेली फ्लाइट को पूरे जून महीने के लिए सस्पेंड कर दिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में हुई कटौती लगभग 27 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय उड़ानें पहले ही कम की जा चुकी हैं।पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य के तनाव के कारण विमान ईंधन (एटीएफ) की बढ़ती कीमतों और परिचालन लागत के दबाव को देखते हुए भारतीय विमानन कंपनियों ने बड़े कदम उठाए हैं। युद्ध क्षेत्र के कारण और सुरक्षा के मद्देनजर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को अब लंबा चक्कर काटकर जाना पड़ रहा है। रास्ता लंबा होने से ईंधन की खपत और ज्यादा बढ़ गई है, जिससे एयरलाइंस का वित्तीय घाटा और गहरा गया है।
भारत इस समय दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक विमानन बाज़ार बनने की राह पर है। वर्तमान में भारतीय कंपनियों के पास कुल मिलाकर लगभग 850 कमर्शियल हवाई जहाज़ हैं।इनमें इंडिगो के पास विमानों की संख्या तकरीबन 360 है। पर यह रोज़ाना दो हज़ार उड़ानें संचालित करती हैं। एयर इंडिया समूह के पास तीन सौ विमान हैं। पर आठ सौ सेवाएँ देती हैं। अकासा के पास विमान तो केवल चौबीस हैं। पर चौबीस ही जहाज़ 110 उड़ानें संचालित करती हैं। स्पाइस जेट के 30-35 विमान 150 फेरे लगाती हैं। बाक़ी कंपनियों के पास जो थोड़े बहुत विमान हैं, वे 150 उड़ानें रोज़ भरते हैं। कुल मिलाकर भारत के आसमान में रोज़ाना 3,200 से अधिक कमर्शियल उड़ानें संचालित होती हैं।सालाना आंकड़ों बताते हैं कि भारत में रोज़ाना लगभग 4.5 लाख से 4.6 लाख लोग घरेलू फ्लाइट्स से सफर करते हैं। यदि इसमें अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को भी जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या बढ़कर रोज़ाना करीब 5.5 लाख तक पहुँच जाती है।
अब सवाल उठाता है कि जहाज़ के ईंधन के ख़रीद फ़रोख़्त पर अमेरिका ईरान संकट के चलते कैसा व कितना असर पड़ रहा है। हवाई जहाज़ में इस्तेमाल होने वाले ईंधन को एविएशन टरबाइन फ्यूल या जेट ए-1 कहा जाता है। यह कच्चे तेल को रिफाइनरियों में बहुत ही उच्च तापमान पर उबालकर और साफ करके बनाया जाने वाला एक उच्च गुणवत्ता वाला केरोसिन-आधारित पारदर्शी ईंधन होता है। इसमें पानी की बूंदें या बर्फ जमने से रोकने के लिए विशेष एंटी-फ्रीज केमिकल मिलाए जाते हैं।
पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के बाद, भारत में इस समय इस ईंधन की कीमत लगभग 1,00,000 रुपये से1,05,000 रुपये प्रति किलोलीटर चल रही है। एक किलो लीटर में सौ से एक सौ पांच लीटर तक आता है। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय टैक्स के कारण इसकी कीमतों में अंतर होता है।
छोटे और मध्यम जहाज़ यानी एयरबस ए-320 या बोइंग 737 में औसतन 20,000 से 26,000 लीटर ईंधन भरने की क्षमता होती है।बड़े जहाज़ यानी बोइंग 777 या फिर एयरबस ए-350 अथवा लंबी दूरी के इन विमानों में 1,40,000 से 2,00,000 लीटर तक ईंधन भरा जा सकता है। एक सामान्य घरेलू विमान उड़ान के दौरान हर एक सेकंड में लगभग एक लीटर से अधिक ईंधन की खपत करता है।
मार्च 2026 में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने और तेल बुनियादी ढांचे पर हमलों के कारण वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में भारी उथल-पुथल मची है। इसे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने वैश्विक तेल बाजार के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी सप्लाई रुकावट कहा है।
युद्ध के शुरुआती हफ्तों में ही खाड़ी देशों— सऊदी अरब, यूएई , इराक़ व कुवैत से होने वाली तेल सप्लाई में रोजाना एक करोड़ बैरल से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई। चूंकि दुनिया का 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से जाता है, इसलिए वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल के पार चली गईं। भारत के लिए राहत की बात यह रही कि नागरिक विमानन मंत्रालय ने तेल कंपनियों द्वारा विमानों में इस्तेमाल किये जाने वाले ईंधन की कीमतों में महीने-दर-महीने बढ़ोतरी को 25 फीसदी पर कैप कर दिया, जिससे कीमतें एकाएक आसमान पर नहीं पहुंचीं।ईंधन की किल्लत और उसकी आसमान छूती कीमतों का भारतीय विमानन कंपनियों पर बहुत बुरा असर पड़ा है। क्योंकि किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ ईंधन पर जाता है।


