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मऊ कोर्ट से मुस्कराते हुए निकले अब्बास अंसारी! कहा- “सुप्रीम कोर्ट ने मेरी ज़ुबान पर ताला लगा दिया, नहीं तो…"
Abbas Ansari News: मऊ कोर्ट में अब्बास अंसारी की पेशी! "सुप्रीम कोर्ट ने मेरी जुबान पर ताला लगा दिया है।" जानें क्यों कोर्ट ने पुलिस की दो धाराओं को किया खारिज और अब विधायक पर चलेगा कौन सा केस? पूरी रिपोर्ट।
Abbas Ansari News: उत्तर प्रदेश की सियासत में 'मुख्तार परिवार' का नाम आते ही हलचल तेज हो जाती है। मऊ की सदर सीट से विधायक अब्बास अंसारी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है। भारी पुलिस बल, सघन तलाशी और मऊ कोर्ट के गलियारों में गूँजती खामोशी के बीच अब्बास अंसारी की पेशी हुई। सड़कों पर तैनात खाकी और कोर्ट के अंदर चल रही कानूनी जंग ने माहौल को बेहद तनावपूर्ण बना दिया था। हर कोई जानना चाहता था कि क्या अब्बास अंसारी फिर किसी बड़ी मुश्किल में फंसने वाले हैं? लेकिन जब कोर्ट का फैसला आया और अब्बास बाहर निकले, तो उन्होंने कुछ ऐसा कहा जिसने सबको हैरान कर दिया।
बोलने पर पाबंदी है
कोर्ट से बाहर निकलते ही जब पत्रकारों के कैमरों ने अब्बास अंसारी को घेरा और केस को लेकर सवाल दागे, तो हर किसी को उम्मीद थी कि विधायक कोई तीखा बयान देंगे। लेकिन अब्बास ने अपने होंठों पर उंगली रख ली। उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में कहा, "मेरे बोलने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है, इसलिए मैं कुछ नहीं कहूंगा।" यह सुनकर वहां मौजूद लोग दंग रह गए। विधायक ने साफ किया कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, लेकिन वे किसी भी 'सब-जुडिस' (न्यायाधीन) मामले पर टिप्पणी करके अपनी मुश्किलें नहीं बढ़ाना चाहते। उनके चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान थी और बिना कुछ कहे वे भारी सुरक्षा के बीच वहां से निकल गए।
Mau, Uttar Pradesh: Mau Sadar MLA Abbas Ansari of the Bharatiya Samaj Party (Subhaspa) appeared in Mau court in connection with a case of Model Code of Conduct violation. The case, registered in February 2022, pertains to the South Tola police station area. Security arrangements… pic.twitter.com/f8ladQZPnd
— IANS (@ians_india) January 21, 2026
कोर्ट ने खारिज कर दीं दो धाराएं
अब्बास अंसारी के लिए मऊ कोर्ट से एक बड़ी राहत की खबर भी सामने आई। उनके वकील दरोगा सिंह ने बताया कि पुलिस ने उन पर जो कानूनी जाल बुना था, उसकी डोर कमजोर पड़ गई है। दरअसल, 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान अब्बास पर आरोप था कि उन्होंने काफिले में तय सीमा से ज्यादा गाड़ियों का इस्तेमाल किया है। पुलिस ने इस मामले में धारा-133, 177 और 188 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। लेकिन सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस की दलीलों को अपर्याप्त मानते हुए धारा-177 और 188 को पूरी तरह रद्द (रिफ्यूज) कर दिया है। अब अब्बास के खिलाफ केवल लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-133 के तहत ही केस चलेगा, जो पुलिस के लिए किसी झटके से कम नहीं है।
2022 का वो चुनावी काफिला
यह पूरा मामला दक्षिण टोला थाना क्षेत्र से जुड़ा है। साल 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान मऊ में सियासी पारा चढ़ा हुआ था। आरोप है कि 12 फरवरी 2022 को अब्बास अंसारी ने चुनाव प्रचार के दौरान नियमों की धज्जियां उड़ाई थीं। तत्कालीन थाना प्रभारी पंकज कुमार सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि अब्बास अंसारी ने बिना अनुमति के गाड़ियों का लंबा काफिला निकाला, जो सीधे-सीधे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन था। इसी आधार पर उन पर तीन धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। हालांकि, अब साढ़े तीन साल बाद कोर्ट ने साफ कर दिया है कि मामला उतना बड़ा नहीं है जितना पुलिस ने दर्शाया था, और दो मुख्य धाराओं को हटाकर अब्बास को कानूनी राहत दी है।
भारी सुरक्षा और छावनी में तब्दील मऊ कोर्ट परिसर
अब्बास अंसारी की पेशी को लेकर प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता था। सुबह से ही मऊ कोर्ट परिसर को छावनी में बदल दिया गया था। कोर्ट के हर प्रवेश द्वार पर पुलिस का कड़ा पहरा था। आम जनता तो दूर, वकीलों को भी सघन तलाशी के बाद ही अंदर जाने दिया जा रहा था। अब्बास अंसारी को जब कोर्ट लाया गया, तो सुरक्षा का घेरा इतना मजबूत था कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता था। यह गहमागहमी दिखा रही थी कि अब्बास अंसारी का मामला केवल एक साधारण चुनावी केस नहीं, बल्कि एक हाई-प्रोफाइल सियासी लड़ाई है। अब देखना यह होगा कि धारा-133 के तहत चलने वाले इस मुकदमे में आगे क्या मोड़ आता है।


