Ram Mandir Donation: राम मंदिर से करोड़ों का चढ़ावा गायब? अखिलेश यादव के ट्वीट से मचा हड़कंप

Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या राम मंदिर से करोड़ों का चढ़ावा गायब होने के अखिलेश यादव के दावे से हड़कंप मच गया है। पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने करीब 7.5 करोड़ की चोरी का आरोप लगाते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को घेरा है। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

Shivam Shrivastava
Published on: 7 Jun 2026 6:21 PM IST (Updated on: 7 Jun 2026 10:25 PM IST)
Ram Mandir Donation:  राम मंदिर से करोड़ों का चढ़ावा गायब? अखिलेश यादव के ट्वीट से मचा हड़कंप
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Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम को लेकर इस समय एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि मंदिर से करोड़ों रुपए का चढ़ावा गायब हो चुका है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह खबर दुनियाभर के राम भक्तों के लिए बेहद संवेदनशील और विचलित करने वाली है। अखिलेश यादव ने इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और मौजूदा सरकार दोनों को कटघरे में खड़ा किया है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए का इस तरह गायब होना मंदिर ट्रस्ट के लिए बेहद शर्मनाक स्थिति है, और सबसे बड़ी बात यह है कि कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति इस पर खुलकर सफाई देने के लिए आगे नहीं आ रहा है। उन्होंने सरकार की चुप्पी को संदिग्ध बताते हुए अदालत से इस पूरे मामले पर खुद संज्ञान लेने की अपील की है, क्योंकि यह वैश्विक स्तर पर सनातन समाज की गहरी आस्था से जुड़ा विषय है।

पूर्व मंत्री का साढ़े सात करोड़ की चोरी का दावा

सपा सरकार में वन और मनोरंजन कर राज्य मंत्री रह चुके अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने इस विवाद को और हवा दे दी है। उन्होंने दावा किया है कि मंदिर के चढ़ावे में करीब पांच से साढ़े सात करोड़ रुपए तक की हेराफेरी हुई है। उन्होंने सीधे तौर पर ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय को चुनौती देते हुए कहा कि अगर यह बात झूठ है, तो वे सामने आएं और भगवान श्रीराम की कसम खाकर स्थिति स्पष्ट करें। उन्होंने मांग की है कि यदि यह आरोप सच है तो तुरंत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। पूर्व मंत्री ने इस बात पर भी सवाल उठाए कि यह गड़बड़ी कितने समय से चल रही थी और इसमें ट्रस्ट के कौन-कौन से सदस्य शामिल हैं, इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। गौरतलब है कि पवन पांडेय पहले भी मंदिर निर्माण के लिए खरीदी गई जमीनों में घोटाले के आरोप लगा चुके हैं।

मंदिर में चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा की मौजूदा व्यवस्था

इस पूरे विवाद के बीच राम मंदिर में आने वाले दान की गिनती और उसके रख-रखाव की एक तय प्रक्रिया है। मंदिर में आने वाले चढ़ावे को सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी में गिना जाता है, और इस दौरान बैंक कर्मचारियों के साथ-साथ ट्रस्ट के प्रतिनिधि भी वहां मौजूद रहते हैं। दान की गई पूरी धनराशि को सबसे पहले एक आधिकारिक रजिस्टर में दर्ज किया जाता है, जिसके बाद उसे परिसर में ही बने एक सुरक्षित लॉकर में रख दिया जाता है। अगले ही दिन इस पूरी रकम को बैंक में जमा करा दिया जाता है। ट्रस्ट का मुख्य खाता भारतीय स्टेट बैंक की अयोध्या धाम शाखा में संचालित होता है। इसके अलावा, इस पूरे चढ़ावे के ऑडिट का जिम्मा टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस की निगरानी में होता है। मंदिर में कुल कितना दान आ रहा है, इसकी आधिकारिक जानकारी केवल ट्रस्ट की बैठकों में ही साझा की जाती है, और आखिरी बार यह विवरण दिसंबर 2025 की बैठक में सामने रखा गया था।

मंदिर के खर्च और करोड़ों की संपत्ति का लेखा-जोखा

दिसंबर 2025 में हुई ट्रस्ट की बैठक के आंकड़ों के अनुसार, अब तक ट्रस्ट को कुल 4,575 करोड़ रुपए की धनराशि प्राप्त हो चुकी है। पिछले पौने छह वर्षों के दौरान मंदिर के भव्य निर्माण, जन्मभूमि परिसर के विस्तार, और आसपास की जमीनों व भवनों की खरीद जैसे विभिन्न कार्यों पर करीब 2,475 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इस खर्च के बाद ट्रस्ट के पास लगभग 2,100 करोड़ रुपए की राशि बची हुई थी। जनवरी 2024 में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से मंदिर में रोजाना एक करोड़ रुपए से ज्यादा का दान आ रहा है। मंदिर की कमाई का मुख्य जरिया भक्तों द्वारा दिया जाने वाला दान और बैंक में जमा रकम पर मिलने वाला ब्याज है। एक वैश्विक रिपोर्ट के मुताबिक, 70 एकड़ के मुख्य परिसर, निर्माणाधीन भव्य ऊंचे ढांचे और आसपास की अधिग्रहित जमीनों को मिलाकर मंदिर की कुल अचल संपत्ति का मूल्यांकन छह हजार करोड़ से आठ हजार करोड़ रुपए के पार जा चुका है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की स्थापना का इतिहास

इस पूरे प्रबंधन को संभालने वाले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक आदेश के बाद 5 फरवरी 2020 को केंद्र सरकार द्वारा किया गया था। सरकार ने शुरुआत में वरिष्ठ वकील के. पराशरण सहित कुल नौ सदस्यों को इसमें नियुक्त किया था। गठन वाले दिन ही अयोध्या के तत्कालीन रिसीवर ने बैंक खातों समेत पूरा प्रभार अयोध्या नरेश विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को सौंप दिया था। बाद में 20 फरवरी 2020 को हुई ट्रस्ट की पहली औपचारिक बैठक में महंत नृत्यगोपाल दास को ट्रस्ट का अध्यक्ष और चंपत राय को महासचिव चुना गया था।

सपा प्रमुख के आरोपों पर ट्रस्ट ने दी सफाई

बढ़ते विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है और समय-समय पर उसका आंतरिक ऑडिट कराया जाता है।

चम्पत राय ने बयान जारी कर कहा, 'सभी की जानकारी के लिए, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का समय-समय पर आंतरिक ऑडिट होता है। इस कार्य में ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि सम्मिलित रहते हैं। ऑडिट का कार्य कई दिनों तक चलता है और वही प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। अभी तक कोई उल्लेखनीय बात सामने नहीं आई है।

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Shivam Shrivastava

शिवम उत्तर प्रदेश के एक युवा और उभरते पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 4 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। वे राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और हाइपरलोकल खबरों की गहरी समझ रखते हैं और समसामयिक मुद्दों पर सटीक व प्रभावशाली रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी विशेष रुचि डाटा-ड्रिवन पत्रकारिता और विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग में है, जिससे उनकी खबरें अधिक तथ्यात्मक और विश्वसनीय बनती हैं। वे जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप को भी समझते हैं। लेखन और रिसर्च में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक सक्षम और जिम्मेदार पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।

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